एक तरफ अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस पर सरकार और विभिन्न संस्थाओं की ओर से आम आदमी और बच्चों की मुसीबत कम करने और उन्हें सहयोग करने के कार्य अथवा संकल्प लिए जाते हैं. आमतौर पर सरकार अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस पर जनता को राहत देती है. लेकिन यहां तो मामला ही उल्टा हो गया. सरकार ने तो जैसे आम आदमी से लेकर कारोबारी तक की खाल ही उतार ली है.
एलपीजी सिलेंडर के इतिहास में यह पहला अवसर है, जब कमर्शियल गैस की कीमतों में लगभग ₹1000 की एक बार में ही बढ़ोतरी कर दी गई है. ₹200, ₹300 ,₹50 वृद्धि की बात तो आप हजम कर लेंगे. लेकिन 993 रुपए की एक बार में वृद्धि को कैसे सहन कर सकेंगे? उधर चुनाव खत्म हुआ और इधर तेल कंपनियां इसी मौके की ताक में बैठी थीं. 1 मई आया और कंपनियों ने बगैर सोचे विचारे कमर्शियल गैस सिलेंडर के मूल्य में एक बड़ी छलांग लगा दी. गनीमत रही कि घरेलू रसोई गैस की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
लेकिन कमर्शियल गैस के मूल्य में हुई भारी वृद्धि का असर कारोबारी से लेकर आम आदमी की थाली पर पडना तय है. सिलीगुड़ी में होटल और रेस्टोरेंट चलाने वाले कारोबारी काफी परेशान हैं. लोगों की आमदनी तो बढ़ नहीं रही है. जबकि खाना महंगा हो जाएगा तो आम आदमी इसे कैसे झेल सकेगा. सिलीगुड़ी के होटल कारोबारी चिंतित और परेशान है. होटल कारोबारियों के लिए दो ही रास्ते हैं. या तो खाने के मेन्यू में बदलाव करो या फिर थाली का दाम बढ़ाओ. पर जो लोग ₹50 और ₹100 में पेट भरने के आदी हैं या उनकी आमदनी गिनती की है, तो ऐसे में थाली की बढी कीमत को कैसे झेल सकेंगे.
सिलीगुड़ी के कुछ होटल कारोबारियों ने बताया कि उनकी दुकान में कम आय वाले व्यक्ति खाना खाने आते हैं. अगर थाली का दाम बढ़ाया गया तो ग्राहक कम हो जाएंगे और उन्हें होटल बंद करने की नौबत आ सकती है. होटल कारोबारियों की भी कई मजबूरियां हैं. अगर थाली का दाम नहीं बढ़ाया तो उन्हें कारोबार में घाटा उठाना होगा और अगर थाली का दाम बढ़ा देते हैं तो ग्राहकों की संख्या में कमी आ सकती है. नौकरी पेशा, दिहाड़ी मजदूर, श्रमिक, मजदूर आदि को गिनती के पैसे मिलते हैं. इसलिए सबसे बड़ी समस्या उनकी है कि आखिर उनका भरण पोषण कैसे होगा. क्योंकि उनमें से कई लोग सिलीगुड़ी में अकेले रहते हैं और होटल में नियमित रूप से खाना खाते हैं.
यह तो सभी देख रहे हैं कि वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट आई है. पूरा विश्व ऊर्जा संकट झेल रहा है. दुनिया के बड़े-बड़े देशों में हालत खराब है. ऐसे में भारत में एलपीजी सिलेंडर की कीमत में वृद्धि पूर्व से ही तय मानी जा रही थी. सभी का यही मानना था कि चुनाव के बाद सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि होगी लेकिन इतनी ज्यादा वृद्धि होगी, यह किसी ने भी नहीं सोचा था. कमर्शियल गैस सिलेंडर के मूल्य में इस वृद्धि से सिलीगुड़ी के होटल और रेस्टोरेंट के मालिक सबसे बड़े दबाव में आ गए हैं.
एक तो पहले से ही महंगाई इतनी है और ऊपर से गैस के मूल्य में भारी वृद्धि से महंगाई लगभग दुगनी हो जाएगी. जबकि एक आम आदमी की जेब पहले की तरह ही टाइट है. दुकानों और प्रतिष्ठानों में काम करने वाले लोगों की सैलरी नहीं बढ़ी लेकिन खर्च बढ़कर दोगुना हो गया है. केवल 3 महीने में ही कमर्शियल गैस सिलेंडर के मूल्य में ₹1300 से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है. लोगों की चिंता और नाराजगी स्वाभाविक है. लेकिन सरकार को क्या फर्क पड़ता है. सरकार तो कह देगी कि तेल कंपनियों ने मूल्य वृद्धि की है. ऐसे में सरकार कुछ नहीं कर सकती है.
आने वाले समय में महंगाई का एक और और बड़ा झटका लग सकता है. जानकारों का मानना है कि सरकार डीजल और पेट्रोल की कीमत भी बढ़ा सकती है. अगर ऐसा होता है तो डीजल पेट्रोल से लेकर गैस तक के मूल्य में भारी वृद्धि आम आदमी से लेकर कारोबारी तक सभी को काफी प्रभावित करेगी.
