बंगाल का चुनाव संपन्न हो गया है. एग्जिट पोल भी आ गए हैं. अधिकतर एग्जिट पोल में बीजेपी को बंगाल में सरकार बनते दिखाया गया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस एग्जिट पोल को नहीं मानती. उन्होंने कहा है कि सोमवार को जब मतगणना होगी तो उनकी पार्टी 226 से अधिक सीटें जीतेगी.
उधर भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी दावा कर रहे हैं कि उनकी पार्टी 170 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज कर सरकार बनाएगी. दोनों ही पार्टियों की ओर से दावे प्रति दावे किए जा रहे हैं. सोमवार को क्या होगा, कोई नहीं जानता. लेकिन सरकार की भविष्यवाणी को लेकर न केवल राजनीतिक दलों के नेता अपनी बात रख रहे हैं, बल्कि आम जनता में भी काफी उत्सुकता बरकरार है.
आज सिलीगुड़ी में भी जगह जगह चाय की दुकानों से लेकर होटल बाजार सब जगह यही चर्चा होती रही. पहली बार एक लंबे अरसे के बाद बंगाल में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान हुआ है. हिंसा कम हुई है. मतदाताओं ने जमकर वोट डाला है. भारी संख्या में महिलाएं भी मतदान केन्द्रों पर वोट डालने आई. क्या ये महिलाएं तृणमूल कांग्रेस के समर्थन में वोट करने आई थीं या फिर बंगाल में बदलाव की लहर थी?
आजादी के बाद बंगाल में लगभग 93% मतदान हुआ. इसका श्रेय चुनाव आयोग को जाता है. सोमवार को दोपहर तक स्पष्ट हो जाएगा कि पिछले 15 वर्षों के तृणमूल कांग्रेस के वर्चस्व और भाजपा के अधूरे वैचारिक मिशन के बीच का क्या फैसला सामने आता है. राजनीतिक विश्लेषक भी मौजूदा स्थिति में विश्वास के साथ कुछ कहने की स्थिति में नहीं है.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की साख दांव पर लगी है. उनके लिए यह चुनाव उनके राजनीतिक जीवन की सबसे निर्णायक लडाई है. अगर ममता बनर्जी चौथी बार जीत हासिल करती है तो 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले वह विपक्ष का सबसे मजबूत चेहरा बनाकर उभरेंगी. जबकि भारतीय जनता पार्टी चुनाव हारती है तो उसे फिर से टीएमसी का विकल्प बनना आसान नहीं होगा. क्योंकि इस बार भाजपा अभी नहीं तो कभी नहीं की तर्ज पर ही चुनाव लड़ी है.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव आसान नहीं था. सत्ता विरोधी लहर, भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप और भर्ती घोटाले जैसे कई चुभते हुए सवालों के बीच ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी की कमान संभाली थी. उन्होंने चुनाव में बंगाली अस्मिता की बात की. वह लगातार भाजपा, चुनाव आयोग, केंद्रीय बलों पर हमलावर रही.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को राज्य की उन महिलाओं पर भरोसा है जो लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाओं का लाभ उठाती रही है. दूसरी तरफ भाजपा के लिए बंगाल चुनाव एक प्रतिष्ठा का प्रश्न बना है. बंगाल चुनाव जीतने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने पूरी ताकत झोंक रखी थी. अगर भाजपा चुनाव हारती है तो भाजपा के बड़े-बड़े नेताओं का मनोबल कमजोर होगा.
वर्ष 2011 में भारतीय जनता पार्टी को महज चार प्रतिशत वोट बंगाल के चुनाव में मिला था. लेकिन वहां से उसकी यात्रा शुरू हुई और 2021 में 77 सीटों तक पहुंच गई. पहली बार भाजपा ने ममता बनर्जी के शासनकाल में भ्रष्टाचार और मतदाता सूची में सुधार को बड़ा मुद्दा बनाया था. भाजपा ने घुसपैठ के मामले में भी ममता बनर्जी पर हमला किया था.
बहरहाल मतदान तो हो चुका है. अब चुनाव आयोग का पूरा ध्यान सोमवार को होने वाली मतगणना पर टिका है. पहली बार काउंटिंग सेंटर्स पर क्यूआर कोड आधारित फोटो पहचान पत्र अनिवार्य किया गया है. इसके अलावा तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था भी की गई है. जब 4 मई को मतगणना शुरू होगी तो सिलीगुड़ी से लेकर कोलकाता तक नेताओं और आम जनता की सांसे जैसे थम जाएंगी.
