सिलीगुड़ी से राष्ट्रभावना का संदेश: मदरसा सहित कई स्कूलों में शुरू हुई ‘वंदे मातरम’ प्रशिक्षण पहल
सिलीगुड़ी | 1 जून 2026 : देश में राष्ट्रीय एकता, संस्कार और राष्ट्रभक्ति को नई दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत आज सिलीगुड़ी से हुई, जब भारत विकास परिषद ने पश्चिम बंगाल सरकार के निर्देशानुसार विद्यालयों एवं मदरसों में प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम’ के प्रभावी, शुद्ध एवं सम्मानपूर्ण गायन को सुनिश्चित करने हेतु एक विशेष अभियान का शुभारंभ किया।
इस राष्ट्रीय सोच से प्रेरित मुहिम की शुरुआत खालपाड़ा स्थित शम्सिया हाई मदरसा (Shamsia High Madrasah) से की गई, जहाँ परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने मदरसा प्रबंधन से मुलाकात कर राष्ट्रगीत के सही प्रशिक्षण की रूपरेखा साझा की। भारत विकास परिषद की ओर से यह निर्णय लिया गया है कि विद्यालयों एवं मदरसों में ‘वंदे मातरम’ को सही उच्चारण, ताल-लय एवं भाव के साथ सिखाने के लिए प्रशिक्षक (Trainers) उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि बच्चे राष्ट्रगीत को सही रूप में सीख सकें।
मदरसा प्रबंधन ने जताया आभार
इस अवसर पर शम्सिया हाई मदरसा के टीचर-इन-चार्ज जियाउद्दीन अली ने भारत विकास परिषद की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि:
“गर्मी की छुट्टियों के बाद आज स्कूल खुला है और भारत विकास परिषद ने राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखते हुए इस अभियान की शुरुआत हमारे मदरसे से की, यह हमारे लिए सम्मान और प्रेरणा की बात है। बच्चे देश का भविष्य हैं और राष्ट्रगीत के माध्यम से उनमें देश के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी।”
मदरसा से शुरुआत, फिर कई स्कूलों तक पहुँची मुहिम
आज के अभियान की शुरुआत मदरसा से करने के बाद भारत विकास परिषद का प्रतिनिधिमंडल सेंट जोसेफ स्कूल, भक्तिनगर, हिन्दी विद्यापीठ, राजेन्द्र प्रसाद गर्ल्स हाई स्कूल, सिलीगुड़ी हिन्दी हाई स्कूल सहित अनेक हिन्दी, बंगला एवं अंग्रेज़ी माध्यम स्कूलों में पहुँचा, जहाँ विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों ने इस पहल का गर्मजोशी से स्वागत किया।
अभियान को लेकर विद्यालयों में बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया (Excellent Response) देखने को मिली। कई स्कूलों ने तत्काल इसे अपनाते हुए ‘वंदे मातरम’ की नियमित प्रैक्टिस भी प्रारंभ कर दी है, जबकि अन्य संस्थानों ने प्रशिक्षित शिक्षकों के माध्यम से इसे व्यवस्थित रूप से लागू करने की सहमति दी है।
विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि यह पहल केवल राष्ट्रगीत सिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों
अनुशासन, राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक जुड़ाव और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने का भी माध्यम बनेगी।
भारत विकास परिषद के इन सदस्यों ने संभाली कमान
सिलीगुड़ी में इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील अभियान को सफल बनाने में भारत विकास परिषद के समर्पित सदस्य कैलाश कंदोई, मनोज शर्मा “गौड़” एवं बबीता भूपाल सक्रिय रूप से नेतृत्व कर रहे हैं। विभिन्न स्कूलों और संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर राष्ट्रगीत प्रशिक्षण अभियान को धरातल पर उतारने में इनकी विशेष भूमिका रही।
परिषद का मानना है कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, एकता, अखंडता और सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक है। इस प्रकार की पहल से विभिन्न समुदायों के बीच आपसी सद्भाव, राष्ट्रीय गौरव और साझा भारतीय पहचान को नई मजबूती मिलेगी।
राष्ट्रीय स्तर पर बन सकता है मॉडल
भारत विकास परिषद की यह पहल भविष्य में देशभर के मदरसों, हिन्दी, बंगला और अंग्रेज़ी माध्यम स्कूलों के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकती है, जहाँ शिक्षा के साथ-साथ राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय मूल्यों को भी प्रभावी ढंग से विद्यार्थियों तक पहुँचाया जा सके।
वीडियो और विजुअल उपलब्ध
इस प्रेस विज्ञप्ति के साथ विभिन्न स्कूलों एवं मदरसा प्रबंधन के साथ हुई बैठकों की तस्वीरें, वीडियो संदेश एवं विजुअल्स संलग्न हैं, जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, यूट्यूब चैनल, डिजिटल पोर्टल एवं समाचार माध्यम अपने प्रसारण हेतु उपयोग कर सकते हैं।

