बहुत से युवाओं का विदेशों में नौकरी के जरिए उड़ान भरने का सपना होता है. ऐसे युवा ऐसे लोगों की तलाश में रहते हैं, जो उन्हें विदेशों में अच्छे जॉब दिला सके. कंसल्टेंसी एजेंसियां नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को सब्ज बाग दिखाती हैं. ये पैसे लेकर जॉब ऑफर करती हैं. जिस तरह का जॉब रहता है, कंसल्टेंसी एजेंसियां पैसा भी उसी के हिसाब से लेती हैं.
अगर आपका सपना कुछ बड़ा होता है तो पैसे भी कुछ ज्यादा ही देने पड़ते हैं. अगर आपका सपना विदेशों में अच्छी नौकरी पाने का हो तो ये लोग आपसे ज्यादा पैसे वसूल करते हैं. नौकरी मिले या ना मिले, लेकिन उससे पहले आपको इन्हें चढावा देना जरूर पड़ता है. छोटी मोटी नौकरियों में तो ठगे जाने का उतना डर नहीं रहता, लेकिन अगर बड़ी नौकरी की तलाश में हैं तो अधिकतर एजेंसियां बेरोजगार युवाओं के साथ छल करती हैं और उन्हें गुमराह करके उनसे मोटी रकम वसूल कर लेती हैं.
आमतौर पर कंसलटेंसी एजेंसी किसी बेरोजगार युवा को साधारण नौकरी दिलाती है तो जितनी तनख्वाह रहती है, उसका आधा पैसा वह पहले ही जमा करवा लेती है. उसके बाद ही बेरोजगार युवा को जाॅब दिलवाती है. विदेशों में नौकरी पाने का सपना देख रहे युवाओं को सिलीगुड़ी की एक कंसलटेंसी एजेंसी ने इस तरह से लूटा कि उन्हें बाद में लुटे जाने का पता चला. सिलीगुड़ी के राम और श्याम इसी कंसलटेंसी एजेंसी के पास नौकरी के लिए पहुंचे थे. कंसलटेंसी की ओर से उन्हें क्रूज में नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया गया.
सिलीगुड़ी के प्रधान नगर थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग, कर्सियांग, मिरिक, कालिमपोंग, मणिपुर और पड़ोसी राज्य झारखंड से कई लड़के लड़कियों ने इस कंसलटेंसी एजेंसी के जरिए दुबई में नौकरी पाने के लिए आवेदन किया था. कंसल्टेंसी की ओर से उन्हें भरोसा दिया गया कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय जहाज कंपनियों में मोटी सैलरी पर नौकरी मिल जाएगी. सपने दिखाकर उम्मीदवारों से ट्रेनिंग, मेडिकल टेस्ट, दस्तावेज तैयार करने वीजा, प्लेसमेंट आदि के रूप में भारी भरकम पैसे वसूले गए.
आज जहां एक अदद नौकरी पाने के लिए युवाओं की चप्पल घिस जाती है, वहां बैठे बिठाये विदेश में जहाज पर काम करने का सपना एक झटके में साकार हो जाए तो इससे बड़ी खुशी की बात क्या होती है! लिहाजा कई परिवारों ने अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य को देखते हुए कर्ज लेकर या गहने या जमीन बेचकर कंसलटेंसी एजेंसी की जेबें भर दी. कंसल्टेंसी एजेंसियां के लोग जहनी तौर पर काफी चालाक होते हैं. वे आखिर तक पता नहीं चलने देते हैं कि सामने वाले को लूट रहे हैं.
उम्मीदवारों से पैसे लेने के बाद कंसल्टेंसी एजेंसी के द्वारा कुछ इस तरह का जाल बिछाया गया जैसे उनका चयन हो गया है. कंसल्टेंसी की ओर से कुछ युवाओं को दुबई भी भेजा गया. लेकिन दुबई पहुंचने के बाद उन्हें सच्चाई का पता चला. काम तो नहीं मिला, ऊपर से खाने के भी लाडले पड़ गए, तो घर वालों ने पैसे भेज कर उनकी मदद की. ऐसे युवाओं को नौकरी नहीं मिली और ना ही मिलने के दूर-दूर तक आसार नजर आ रहे थे. कुछ युवा ऐसे भी थे जिन्हें ट्रांजिट वीजा पर खाड़ी देशों में भेजा गया. इसके बाद उनका हाल तक का पता नहीं चला. कुछ लोग तो दुबई पहुंच कर ऐसे फ॔स गए कि वहां से भारत लौटना उनके लिए पहाड़ सा बन गया.
बहुत से युवा भूखों मरने लगे. दुबई भेजे गए कुछ युवा ऐसे भी थे जिनके दस्तावेज फर्जी थे. इसलिए उन्हें दुबई में कानूनी और वीजा संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा. कंसल्टेंसी एजेंसी की ओर से उनसे संपर्क भी नहीं किया गया और ना ही यह जानने की कोशिश की गई कि वे किस हाल में है. एक पीडित युवक ने बताया कि जब उसने दुबई से कंसल्टेंसी को फोन करने की कोशिश की तो उसका फोन बंद मिला. अब उन्हें एहसास हो गया कि उनके साथ धोखा हुआ है.
इस खेल का मास्टरमाइंड अभिषेक धीमीरे है, जिसे प्रधान नगर थाना की पुलिस ने माटीगाड़ा इलाके से गिरफ्तार करके रिमांड पर लिया है. बहरहाल पीड़ित युवक किसी तरह से विदेश से वापस आ चुके हैं और अब अभिषेक से पैसा वापस करने की मांग कर रहे हैं. अभिषेक की गिरफ्तारी तो कब की हो जाती, लेकिन अभिषेक ने युवाओं को लिखित भरोसा दिया था कि वह डेढ़ महीने के अंदर उनके पैसे वापस कर देगा. उसके इस लिखित बयान पर पीड़ित युवा भरोसा कर बैठे. लेकिन इस बीच अभिषेक और उसके साथी अपनी दुकान बंद करके फरार हो गए. तब लुटे-पिटे युवाओं ने प्रधान नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई.
प्रधान नगर थाना की विशेष पुलिस ने कंसल्टेंसी संचालक अभिषेक धीमीरे की गिरफ्तारी के लिए जाल बिछाया और माटीगाड़ा इलाके से उसे गिरफ्तार कर लिया. पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है. पुलिस यह पता लगाना चाहती है कि इस ठगी के खेल में और कौन-कौन लोग शामिल हैं. पुलिस यह भी पता लगाना चाहती है कि इस कंसल्टेंसी ने कितने युवाओं को नौकरी देने के नाम पर लूटा है. पुलिस यह भी पता लगाना चाहती है कि कंसल्टेंसी के द्वारा युवाओं को दिया जाने वाला दस्तावेज असली होते हैं या नकली.
बहरहाल यह घटनाक्रम ऐसे युवाओं को एक सबक देता है जो अपनी योग्यता और क्षमता पर भरोसा ना करके किसी कंसल्टेंसी के जरिए नौकरी पाने का सपना देखते हैं. यहीं उनके साथ धोखा होता है. युवाओं को चाहिए कि नौकरी पाने के लिए एक सही, प्रामाणिक और विश्वसनीय मंच की तलाश करें और उसके लिए प्रयास करें.
अभिषेक ने जो बोया, वह काटेगा ही. यह घटनाक्रम इस बात का भी संदेश है कि शॉर्टकट रास्ते पर चलकर कोई अमीर नहीं बन सकता है. जैसा कि आज के युवाओं की सोच है. हर काम का अपना तरीका होता है. इसमें समय और धैर्य की भी जरूरत होती है. बहरहाल यह देखना होगा कि अभिषेक ठगी का शिकार हुए युवाओं को पैसे लौटाता है या नहीं. इस मामले का कुछ सच बाहर निकलना है. पुलिस सच्चाई की तह तक जाना चाहती है.
