राजनीति में पप्पू शब्द काफी प्रचलित हो गया है. कांग्रेस के युवराज के लिए संदर्भित करता यह शब्द आज कल राजनीति में व्यंग्य, हास्य और व्यंग्य बाण के रूप में उपयोग किया जा रहा है. किसी नेता के चरित्र को संदर्भित करता यह शब्द नेता के वजन को जनता के सामने रखता है. किसी नेता को पप्पू बता देने से जनता सब समझ जाती है.
कांग्रेस में राहुल गांधी को कई बार भाजपा के नेताओं से यह शब्द सुनने को मिला है. यह पप्पू शब्द इतना चर्चित हो गया कि राजनीतिक मंचों के अलावा सांस्कृतिक मंचों पर कब कवियों की व्यंग्य वाणी में समा गया, इसका पता ही नहीं चला. आमतौर पर किसी नेता को पप्पू तब कहा जाता है, जब वह राजनीति में अनुभवहीन होता है. ऐसा नेता दिगभ्रमित और सिद्धांत हीन बातें करता है. वह सच्चाई से हटकर अप्रास॔गिक बातें करता है.
भारतीय जनता पार्टी के नेता राहुल गांधी को इसी तरह का नेता मानते हैं. यूं तो राजनीतिक दलों में कोई ना कोई नेता पप्पू बनता रहता है. पर उसकी चर्चा कम ही होती है. आज एक बार फिर से यह पप्पू शब्द लोगों की जुबान पर आ गया है. इस शब्द का प्रयोग एक बार फिर से दार्जिलिंग के भाजपा सांसद और भाजपा के तेजतर्रार नेता राजू बिष्ट ने किया है.
लेकिन राजू बिष्ट ने इस पप्पू शब्द का प्रयोग टीएमसी के एक नेता को लेकर किया है, जो सुर्खियों में है. उनका इशारा टीएमसी सांसद और महासचिव अभिषेक बनर्जी को लेकर था. हालांकि उन्होंने अपनी जुबान से अभिषेक बनर्जी का नाम तक नहीं लिया. परंतु इशारों ही इशारों में वह काफी कुछ कह गए. जब राजू बिष्ट से दिल्ली में घटने वाली घटनाओं के संदर्भ में यह पूछा गया कि टीएमसी का कांग्रेस में विलय हो रहा है तो क्या यह भाजपा के लिए चुनौती होगी?
इसके जवाब में राजू बिष्ट ने कहा कि टीएमसी और कांग्रेस में कोई ज्यादा फर्क नहीं है. टीएमसी बंगाल विरोधी है तो कांग्रेस देश विरोधी. दोनों की सोच राष्ट्र विरोधी है. कांग्रेस में सीनियर पप्पू है तो टीएमसी में जूनियर पप्पू है. आखिर राजू बिष्ट ने अभिषेक बनर्जी के लिए पप्पू शब्द का इस्तेमाल क्यों किया? हालांकि उन्होंने इसका कोई कारण नहीं बताया.
पर समझा जाता है कि पिछले विधानसभा चुनाव में बंगाल में टीएमसी की करारी हार के लिए अभिषेक बनर्जी जिम्मेवार हैं. टीएमसी के बागी गुट के नेताओं के बयान तथा राजनीतिक विश्लेषको का अध्ययन बताता है कि टीएमसी का बेडा गर्क अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी के घमंड ने किया. खासकर अभिषेक बनर्जी के बड़बोलेपन ने टीएमसी को खत्म करने की स्थिति में ला खड़ी की है.
अपने इस शब्द के जरिए राजू विष्ट व्यंग्य करते हुए यह जताने की कोशिश करते हैं कि जिनको राजनीति की एबीसीडी की समझ तक नहीं है, वह भला भाजपा से क्या टक्कर लेंगे! राजू बिष्ट इस तरह के बयान पहले भी देते रहे हैं. खुद को सबसे बड़ा गुंडा बताने से लेकर पुलिस को औकात बताने और टीएमसी के नेताओं के लिए नफरत भरे बयान देकर वह चर्चा में आ चुके हैं.
टीएमसी और कांग्रेस को एक ही तराजू में तौलने के बाद राजू बिष्ट का यह पप्पू शब्द तेजी से वायरल हो रहा है.
