पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभालने के बाद डॉ. शंकर घोष ने राज्य के पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि पर्यटन को राज्य की आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन, निवेश आकर्षित करने और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का मजबूत माध्यम बनाया जाएगा।
डॉ. घोष ने कहा कि पश्चिम बंगाल के पास ऐतिहासिक धरोहर, प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक स्थल, वन्यजीव, नदियां, समृद्ध खानपान, कला, संस्कृति और त्योहारों का अनूठा संगम है। इन सभी विशेषताओं को विश्वस्तरीय पर्यटन अनुभव में बदलना सरकार की प्राथमिकता होगी।
उन्होंने पर्यटन विकास के लिए पांच प्रमुख रणनीतिक प्राथमिकताओं की घोषणा की। पहली प्राथमिकता राज्य को अगले तीन वर्षों में घरेलू और विदेशी पर्यटकों के लिए सबसे तेजी से विकसित होने वाले पर्यटन स्थलों में शामिल करना है। दूसरी प्राथमिकता “टूरिज्म फॉर ऑल” पहल के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और दिव्यांग नागरिकों को सुरक्षित, सुलभ और सम्मानजनक यात्रा का अवसर प्रदान करना है।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि लक्जरी पर्यटन, हेरिटेज टूरिज्म, वेलनेस, रिवर क्रूज, प्रकृति और सांस्कृतिक पर्यटन जैसे विशेष क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए आधुनिक पर्यटन अवसंरचना विकसित की जाएगी।
डॉ. घोष ने पर्यटन क्षेत्र में ब्रांडिंग और वैश्विक प्रचार को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में पश्चिम बंगाल को “अनुभव आधारित जिम्मेदार पर्यटन” की पहचान के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया जाएगा।
उन्होंने राज्य की भौगोलिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल को पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के प्रवेश द्वार के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजारों के साथ बेहतर हवाई, रेल, सड़क और जलमार्ग संपर्क स्थापित करने पर भी जोर दिया जाएगा।
पर्यटन उद्योग में साझेदारी की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार, उद्योग जगत, निवेशकों, स्थानीय समुदायों और विभिन्न विभागों के सहयोग से एक मजबूत और टिकाऊ पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जाएगा।
डॉ. शंकर घोष ने कहा कि उनकी सरकार का विजन “जिम्मेदार पर्यटन, समावेशी विकास और वैश्विक पहचान” है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पर्यटन के माध्यम से रोजगार, निवेश और स्थानीय समुदायों के सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए पश्चिम बंगाल को विश्व के सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थलों में शामिल किया जा सकेगा।
उन्होंने अपने संदेश का समापन करते हुए कहा, “ऐसा पर्यटन जो समृद्धि पैदा करे, विरासत को संरक्षित रखे और समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चले।”

