यह कैसी विडंबना है कि एक तरफ पूरे देश में महत्वपूर्ण नगरों में सिलीगुड़ी शहर शामिल हो गया है तो दूसरी तरफ बॉर्डर पर स्थित यह शहर सामरिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है और संवेदनशील भी है. इस शहर में क्या कुछ नहीं है. विकास पर्यावरण विनिर्माण से लेकर एक विशाल आबादी भी है.
लेकिन हैरानी की बात है कि यहां के लोगों को न्याय पाने के लिए या तो 50 किलोमीटर दूर जलपाईगुड़ी जाना पड़ता है या फिर 80 किलोमीटर दूर दार्जिलिंग जाना पड़ता है. जिसमें काफी पैसा और समय की भी बर्बादी होती है. बरसों से यही देखा जा रहा है. सिलीगुड़ी नगर निगम के अंतर्गत जलपाईगुड़ी जिले के कई महत्वपूर्ण वार्ड हैं. यहां के लोग कोर्ट कचहरी के मामले में जलपाईगुड़ी पर आश्रित हैं. जबकि सिलीगुड़ी के लोगों को अपना सारा काम धाम छोड़कर दार्जिलिंग जाना पड़ता है.
वर्तमान समय में यह सवाल उठना लाजिमी भी है. आखिर सिलीगुड़ी के लोगों को सिलीगुड़ी में ही क्यों नहीं न्याय मिलना चाहिए? जब बंगाल में टीएमसी की सरकार थी तो 2012 में टीएमसी सरकार ने सिलीगुड़ी में पुलिस कमिश्नरेट की स्थापना कर दी.लेकिन यहां के लोगों की न्यायिक कार्यों में सुविधा दिलाने के लिए यहां मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट की उठ रही मांग को अनसुना कर दिया. पूर्ववर्ती सरकार ने कालिमपोंग को जिला घोषित कर दिया. जबकि हैरानी की बात है कि सबसे महत्वपूर्ण शहर सिलीगुड़ी को जिला घोषित नहीं किया जा सका.
सिलीगुड़ी में मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट की स्थापना तभी हो सकती है, जब सिलीगुड़ी को जिला घोषित किया जाए. सिलीगुड़ी के नागरिकों को न्यायिक मामलों में सुविधा पाने का हक है.2012 से ही सिलीगुड़ी को जिला बनाने की मांग यहां के कई सामाजिक संगठन उठा रहे हैं. उनमें से बृहतर सिलीगुड़ी नागरिक मंच भी प्रमुख है.
इस मंच की ओर से 2012 से ही सिलीगुड़ी को जिला बनाने की मांग की जा रही है. इसके लिए आंदोलन भी किए गए. नागरिक सभाओं का आयोजन भी किया गया. सामूहिक हस्ताक्षर से लेकर विभिन्न स्तरों पर ज्ञापन एवं पत्राचार भी किए गए. लेकिन स्थिति ढाक के वही तीन पात की तरह बनी रही.
आज एक बार फिर से सिलीगुड़ी को अलग जिला बनाने की मांग तेज हो गई है. राज्य में भाजपा की नई सरकार है और यह सरकार छोटे-छोटे जिलों के गठन के पक्ष में भी है. इसलिए सिलीगुड़ी के लोगों को नई सरकार से उम्मीद बढ़ गई है. बृहतर सिलीगुड़ी नागरिक मंच के द्वारा सिलीगुड़ी को अलग जिला बनाने की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ाने के साथ ही आंदोलन को और तेज करने का फैसला किया गया है.
अगर सरकार चाहे तो सिलीगुड़ी के लोगों को उनका हक दे सकती है. क्योंकि भौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी सिलीगुड़ी को अलग जिला बनाया जा सकता है. सिलीगुड़ी के अंतर्गत सिलीगुड़ी नगर निगम क्षेत्र, वार्ड, महकमा के चार ब्लॉक, भक्ति नगर थाना, एनजेपी थाना, बिनागुड़ी क्षेत्र इत्यादि को मिला कर एक नया सिलीगुड़ी जिला बनाया जा सकता है. इसमें वे क्षेत्र भी आ सकते हैं जो सिलीगुड़ी के अंतर्गत जलपाईगुड़ी जिले के भाग हैं.
अगर यहां जिला बनता है तो वहां के लोगों को भी न्यायिक कार्यों के लिए जलपाईगुड़ी जाना नहीं पड़ेगा. सिलीगुड़ी के सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवों का एक वर्ग इस बात पर सहमत है कि अब समय आ गया है जब सिलीगुड़ी व्यावहारिक तौर पर जिला बनाया जा सकता है. क्योंकि इन सभी इलाकों को मिलाकर यहां की आबादी 15-17 लाख से अधिक हो जाएगी.
बुद्धिजीवों और नागरिक मंच ने एक रणनीति बनाने का फैसला किया है. हालांकि सामाजिक संगठन, विचारक और बुद्धिजीवी सभी इस बात पर सहमत है कि इसकी व्यापक समीक्षा करने के बाद सिलीगुड़ी को अलग जिला बनाने को लेकर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को एक ज्ञापन सौपा जाए.
स्वयं मुख्यमंत्री भी संकेत दे चुके हैं कि सिलीगुड़ी के महत्व को देखते हुए इसको अलग जिला के रूप में विचार किया जाना चाहिए.अब जब सभी तरह की तैयारी हो चुकी है तो ऐसे में उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले समय में बंगाल सरकार सिलीगुड़ी को अलग जिला बनाने के संदर्भ में कोई महत्वपूर्ण घोषणा कर सकती है.
