जब धरती पर, खेत खलिहानों में, बाग बगीचों में हरियाली और जनमानस में भक्ति का उल्लास तथा उमंग अंगड़ाई लेने लगे तो समझ लेना चाहिए कि सावन की शुरुआत हो गई है. सावन का महीना भगवान शिव को अर्पित होता है. सावन शुरू होते ही चारों तरफ, घर से लेकर आंगन, गली,बस्ती सब जगह बोल बम का नारा गूंजने लगता है.
रिमझिम फुहारों के बीच कांवड़ ढोते कांवडिए जब समूह में सड़कों पर बोल बम का नारा लगाते हुए गुजरते हैं तो वातावरण में एक अजीब सी दिव्यता बिखर जाती है. प्रकृति भी जैसे उन्हें आशीर्वाद देने लगती है. सिलीगुड़ी में सावन की छटा शुरू हो चुकी है. एक तरफ जहां भोले बाबा के भक्तों को सावन का पूरे साल का इंतजार रहता है,तो दूसरी तरफ शिवालयों को भी इसी दिन, इसी महीने का इंतजार रहता है.
हिंदू धर्म ग्रंथों में सावन का महीना अत्यंत पवित्र माना गया है. सिलीगुड़ी में आज से इस पवित्र महीने की दस्तक बाजारों में बिक रहे बेलपत्र, फूलमाला, रुद्राक्ष, शिवलिंग और पूजन सामग्री के साथ-साथ गेरूए रंग के कपड़ों से दिख जाती है. सिलीगुड़ी में शिवालयों की साफ सफाई शुरू हो गई है. पूरे महीने सिलीगुड़ी और आसपास के शिवालयों में भक्तों का आवागमन बना रहेगा. खासकर प्रत्येक सोमवार को शिवालयों में भक्तों का सैलाब देखा जा सकेगा.
सिलीगुड़ी और आसपास में कई शिवालय हैं. जैसे शिव मंदिर, चांदमुनि, जंगली बाबा मंदिर, सेवक रोड ,हाकिम पाड़ा, आश्रम पाड़ा और अन्य इलाकों में स्थित शिवालियों में विशेष रौनक देखी जा रही है.यहां साफ सफाई ही नहीं बल्कि शिव व अन्य मंदिरों का कायाकल्प भी किया जा रहा है. मंदिरों में जलाभिषेक पूरे महीने चलता रहेगा. नजदीक ही जल्पेश शिवालय है, जहां सिलीगुड़ी, उत्तर बंगाल और पहाड़ से काफी संख्या में भक्त जल चढ़ाने के लिए जाते हैं.
सोमवार को यहां भक्तों का सैलाब देख सकेंगे. सोमवार को होने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन की ओर से विशेष व्यवस्था की जा रही है. भक्त बाबा का दर्शन आसानी से कर सकें, इसके अलावा उनकी सुरक्षा तथा दूसरे इंतेजामात ठीक तरह से हो सके, इसके लिए मंदिर कमेटी और स्थानीय प्रशासन के द्वारा विशेष व्यवस्था की जा रही है.
शास्त्रों में कहा गया है कि सावन के महीने में जो नर नारी भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा, व्रत या जलाभिषेक करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. कहते है कि सावन के महीने में अगर लड़कियां जलाभिषेक करती हैं तो उन्हें मनोवांछित वर मिलता है. जबकि पुरुष कांवडिए बाबा का सच्चे मन से सुमिरन करते हैं तो उनका सपना साकार हो जाता है.
इस बार सिलीगुड़ी के नजदीक जल्पेश शिवालय में भक्तों के लिए विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं. यहां अनावश्यक भीड़ न हो, श्रद्धालु जल चढ़ाएं और तुरंत ही दूसरे रास्ते से निकल जाएं, इस तरह की व्यवस्था की गई है.श्रद्धालुओं को यहां गाइड भी मिलेंगे. और उनका मार्गदर्शन करेंगे. कुछ ही समय पहले राज्य के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने जल्पेश में आकर यहां की व्यवस्था का भी जायजा लिया था. इस बार जल्पेश में नई सरकार की कुछ नई व्यवस्था आपको देखने को मिलेगी.
वही सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों से काफी संख्या में लोग बाबा बैजनाथ धाम जाते हैं.देवघर में स्थित बाबा बैजनाथ धाम मंदिर प्रशासन की व्यवस्था भी इस बार अनूठी देखने को मिलेगी. पिछले सभी अनुभवों से सबक लेते हुए मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर बाबा बैजनाथ धाम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, जलाभिषेक व्यवस्था और कांवरियों के आवागमन की सरलता सुनिश्चित करने के कदम उठाए हैं.
अगर कोई व्यक्ति किन्हीं कारणों से जल्पेश अथवा बाबा धाम जाने में असमर्थ है तो वह सच्चे मन से घर पर ही या घर के आसपास शिवालय में जलाभिषेक करता है तो उसे भी जल्पेश या बाबा बैजनाथ धाम में जल चढ़ाने जैसा पुण्य प्राप्त होता है. इसलिए आप चाहे तो जल्पेश जाएं या देवघर या फिर स्थानीय मंदिरों में भोले बाबा का जलाभिषेक करें,वही कृपा प्राप्त कर सकते हैं. बस, मन साफ होना चाहिए.
