भारत में डिजिटल पेमेंट का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्र सरकार भविष्य में ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI ट्रांजैक्शनों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) यानी प्रोसेसिंग चार्ज लगाने की अनुमति दे सकती है। हालांकि, अभी इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है और आम उपभोक्ताओं को फिलहाल किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।
जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था केवल बिजनेस या मर्चेंट को किए जाने वाले ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर लागू हो सकती है। इस पर 0.25 प्रतिशत से 0.40 प्रतिशत तक MDR लगने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, व्यक्ति से व्यक्ति (Person-to-Person) होने वाले सामान्य UPI ट्रांसफर पूरी तरह मुफ्त रहेंगे और उन पर किसी प्रकार का शुल्क लागू नहीं होगा।
दरअसल, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश किए गए टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल के जरिए इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड पर MDR लगाने से जुड़े मौजूदा प्रतिबंध को हटाने का प्रस्ताव रखा है। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि भविष्य में बड़े UPI ट्रांजैक्शनों पर चार्ज लगाया जा सकता है। हालांकि, सरकार की ओर से साफ किया गया है कि इसे कब और किस रूप में लागू किया जाएगा, इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, ₹2,000 की सीमा कुल UPI ट्रांजैक्शनों का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा कवर करेगी, लेकिन इनका मूल्य कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू का करीब 65 प्रतिशत है। यानी रोजमर्रा के छोटे भुगतान, जैसे दूध, सब्जी, किराना, चाय, ऑटो या टैक्सी का किराया देने वाले अधिकांश उपभोक्ताओं पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
आंकड़ों पर नजर डालें तो जुलाई महीने में देशभर में लगभग 23.7 अरब UPI ट्रांजैक्शन किए गए, जिनकी कुल राशि करीब ₹29.9 लाख करोड़ रही। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत में UPI डिजिटल भुगतान का सबसे मजबूत माध्यम बन चुका है। ऐसे में सरकार और संबंधित संस्थाएं इस व्यवस्था को और अधिक टिकाऊ तथा मजबूत बनाने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि MDR लागू भी किया जाता है, तो इसका सीधा असर मुख्य रूप से बड़े व्यापारियों और व्यवसायों पर पड़ेगा। साथ ही यह भी जरूरी नहीं है कि सभी व्यापारी यह अतिरिक्त शुल्क ग्राहकों से वसूलें। कई व्यापारी इसे स्वयं वहन करने का निर्णय भी ले सकते हैं।
फिलहाल आम UPI यूजर्स के लिए घबराने की कोई जरूरत नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सामान्य व्यक्ति द्वारा किए जाने वाले रोजमर्रा के UPI भुगतान पहले की तरह निशुल्क रहेंगे। अब सभी की नजर सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी है, जो आने वाले समय में देश के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की दिशा तय करेगा।

