देश में हाई-स्पीड सड़क कनेक्टिविटी का नेटवर्क लगातार विस्तार ले रहा है। अब कई अलग-अलग एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़कर एक ऐसा विशाल कॉरिडोर तैयार करने की दिशा में काम चल रहा है, जो उत्तर भारत को सीधे पूर्वी भारत और सिलीगुड़ी तक जोड़ेगा। इस महत्वाकांक्षी नेटवर्क में अंबाला-शामली, शामली-गोरखपुर और गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे अहम कड़ियां होंगी।
करीब 1500 किलोमीटर के इस पूरे नेटवर्क के तैयार होने के बाद दिल्ली से सिलीगुड़ी यानी देश के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘चिकन नेक’ तक सड़क यात्रा का समय मौजूदा करीब 28 से 32 घंटे से घटकर लगभग 15 से 16 घंटे तक आने की उम्मीद है। यानी जिस सफर में अभी करीब डेढ़ दिन लग जाता है, वह भविष्य में लगभग 16 घंटे में पूरा किया जा सकेगा।
इस महाकॉरिडोर की पहली कड़ी अंबाला-शामली एक्सप्रेसवे होगी। करीब 122 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे हरियाणा के अंबाला को उत्तर प्रदेश के शामली से जोड़ेगा। अंबाला की लोकेशन इसे पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की ओर से आने वाले यातायात के लिए महत्वपूर्ण बनाती है। इस कनेक्शन से इन इलाकों से पूर्वी भारत की ओर जाने वाले वाहनों को दिल्ली क्षेत्र पर निर्भरता कम करने वाला वैकल्पिक तेज मार्ग मिल सकता है।
इसके बाद शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे इस नेटवर्क की सबसे लंबी कड़ी होगी। करीब 740 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे पूर्वी उत्तर प्रदेश से जोड़ेगा। इसके जरिए उत्तर प्रदेश के करीब 22 जिलों को हाई-स्पीड सड़क नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। पूरा होने के बाद पश्चिमी यूपी से गोरखपुर और आगे बिहार तथा पश्चिम बंगाल की ओर जाने वाले यातायात के लिए एक नया सीधा मार्ग उपलब्ध होगा।
इस महाकॉरिडोर की तीसरी और पूर्वी हिस्से की महत्वपूर्ण कड़ी गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे होगी। इसकी लंबाई करीब 519 किलोमीटर बताई जा रही है। यह गोरखपुर से उत्तर बिहार होते हुए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक पहुंचेगा। इससे अररिया और किशनगंज जैसे उत्तर बिहार के क्षेत्रों को भी हाई-स्पीड सड़क संपर्क का लाभ मिलने की उम्मीद है।
इस पूरे नेटवर्क का दायरा केवल उत्तर प्रदेश और बिहार तक सीमित नहीं रहेगा। अंबाला के जरिए पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। वहीं शामली के पास दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के इंटरचेंज के जरिए दिल्ली-NCR को भी इस कॉरिडोर से जोड़े जाने की उम्मीद है। उत्तराखंड के देहरादून और हरिद्वार की ओर जाने वाला यातायात भी इससे लाभान्वित हो सकता है।
यात्रा समय में संभावित कमी इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियतों में से एक होगी। दिल्ली से सिलीगुड़ी का सफर जहां 28-32 घंटे का है, वहीं भविष्य में यह करीब 15-16 घंटे में पूरा हो सकता है। शामली से गोरखपुर का सफर भी 14-15 घंटे से घटकर करीब 7-8 घंटे और गोरखपुर से सिलीगुड़ी का सफर 15-18 घंटे से घटकर लगभग 7 से साढ़े 7 घंटे तक आने की उम्मीद है। वहीं अंबाला से शामली की यात्रा करीब 3 घंटे से घटकर लगभग सवा से डेढ़ घंटे हो सकती है।
सिलीगुड़ी के लिए इस कॉरिडोर का महत्व और भी ज्यादा है। सिलीगुड़ी को देश के मुख्य भूभाग और पूर्वोत्तर राज्यों के बीच महत्वपूर्ण संपर्क क्षेत्र माना जाता है। इसलिए यहां तक तेज और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी का असर यात्रियों के साथ-साथ माल परिवहन, व्यापार और लॉजिस्टिक्स पर भी पड़ सकता है। रणनीतिक दृष्टि से भी बेहतर सड़क संपर्क से आवश्यक और सुरक्षा संबंधी आवाजाही के लिए अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।
इसके अलावा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा से पूर्वी भारत की ओर जाने वाले लंबी दूरी के वाहनों को दिल्ली के भीतर प्रवेश किए बिना वैकल्पिक हाई-स्पीड रूट मिल सकता है। इससे दिल्ली-NCR के प्रमुख मार्गों पर लंबी दूरी के ट्रैफिक का दबाव कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
यानी अंबाला से सिलीगुड़ी तक बनने वाला यह नेटवर्क सिर्फ तीन एक्सप्रेसवे का जोड़ नहीं है। यह उत्तर भारत, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को एक तेज सड़क नेटवर्क में जोड़ने वाली बड़ी कनेक्टिविटी परियोजना है, जिसका सबसे बड़ा असर दिल्ली से सिलीगुड़ी की दूरी और यात्रा समय पर देखने को मिल सकता है।
