October 6, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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सिलीगुड़ी के अभिषेक साहा चर्चित दुर्घटना कांड से खुलीआंख! सिलीगुड़ी से पहाड़ की यात्रा करने से पहले जान लें!

अगर आप सिलीगुड़ी से दार्जिलिंग,कर्सियांग अथवा सिक्किम के रास्ते पिकनिक मनाने, घूमने-फिरने आदि की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए है. अभिषेक साहा जैसी घटना की पुनरावृत्ति ना हो, इसके लिए पूरी तैयारी और व्यवस्था जरूरी है. क्योंकि लोग मानते हैं कि अभिषेक साहा की जान बचाई जा सकती थी, अगर दुर्घटना के बाद आपात व्यवस्था चुस्त दुरुस्त होती!

सोशल मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार घटना के चश्मदीदों के बयान और इंतेजामत देखने के बाद पहाड़ में आपात व्यवस्था की पोल खुल गई है, जहां दुर्घटनाग्रस्त लोगों की मदद के लिए सिलीगुड़ी से एंबुलेंस बुलानी पड़ी. जहां दुर्घटना घटी थी, उस जगह का नाम कारगिल दांडा है, जो कर्सियांग में आता है. वहां से कर्सियांग थाने की दूरी लगभग 5 किलोमीटर थी. लेकिन पुलिस को सूचना देने के बाद पुलिस को घटना स्थल पर पहुंचने में 45 मिनट लग गए. पहाड़ में पुलिस के पास संसाधन भी कम होते हैं.

अगर सिलीगुड़ी से आवश्यक संसाधन जुटाए नहीं गए होते तो शायद अभिषेक साहा के साथ उनकी थार कार में गए उनके बाकी पांचो दोस्तों की भी जिंदगी नहीं बची होती! क्योंकि इस हादसे ने कर्सियांग अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था व उपलब्ध स्वास्थ्य संसाधनों पर भी सवाल उठाए हैं. अगर घायलों को वहां समुचित उपचार मिलता तो उन्हें आधी रात में सिलीगुड़ी लाने की जरूरत नहीं पड़ती! इस घटना ने यह सबक दी है कि पहाड़ में दुर्घटना की रोकथाम और दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को बचाने के लिए समुचित संसाधन उपलब्ध नहीं है.

अगर आप अपनी गाड़ी से पहाड़ की यात्रा कर रहे हैं तो हमेशा यह बात दिमाग में बिठाकर रखें कि अगर रास्ते में कोई अनहोनी हो जाए तो भगवान ही मालिक हैं! पहाड़ में मैनफोर्स तो है और मुसीबत के समय मैनफोर्स ही आगे रहती है. लेकिन दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की तत्काल और उचित चिकित्सा की जरूरत होती है. फिलहाल पहाड़ में कोई सुव्यवस्थित और बड़ा अस्पताल भी नहीं है. यह देखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार दार्जिलिंग अथवा पहाड़ के अन्य इलाकों में स्वास्थ्य सेवा को बेहतर बनाने के लिए उन्नत अस्पताल का निर्माण करवा रही है.

लेकिन यह जब होगा, तब होगा. फिलहाल आपको पहाड़ की यात्रा करते समय पूरी सावधानी और चौकसी रखनी होगी. अगर आप समतल में अपनी गाड़ी कुशलता के साथ चला लेते हैं तो यह जरूरी नहीं है कि पहाड़ी सड़कों पर भी आप इसी तरह से गाड़ी चला सकेंगे. वहां की भौगोलिक अवस्था समतल से अलग होती है. अपनी गाड़ी उस व्यक्ति को चलाने दें जो पहाड़ी सड़कों पर गाड़ी चलाने में एक्सपर्ट हो.

कार चालक को पहाड़ में धैर्य के साथ गाड़ी चलानी होती है. जल्दबाजी दुर्घटना को न्यौता देती है. अपनी गाड़ी को पहाड़ी सड़कों पर ले जाने से पहले उसका अच्छी तरह मुआयना कर लें. जैसे गाड़ी का ब्रेक, टायर अथवा अन्य पार्ट्स इत्यादि की पूर्व जांच कर ले. सिलीगुड़ी के अभिषेक साहा के साथ यह चूक हो गई कि उन्होंने सिलीगुड़ी रवाना होने से पहले अपनी गाड़ी का शायद ठीक तरह से मुआयना नहीं किया था. अन्यथा ब्रेक फेल होने अथवा तकनीकी गड़बड़ी जैसी घटना नहीं होती! जिससे उनकी जान चली गई!

पहाड़ी रास्तों पर गाड़ी चलाने वाले चालक को पूरे होशो हवास में गाड़ी चलाना चाहिए. उसे हर पल यह सोचना चाहिए कि उसकी गाड़ी में बैठे कई परिवार और बच्चों की जिंदगी की सुरक्षा का उस पर महत्वपूर्ण दायित्व है. पहाड़ी ढलान और मोडों पर सावधानी के साथ सिग्नल का इंतजार करना चाहिए. इस भयानक हादसे ने कई सबक दिए हैं. उसमें सबसे बड़ा सबक यह है कि जिंदगी आपके हाथ में है. पहाड़ी रास्तों पर कोई गंभीर दुर्घटना होती है तो पर्याप्त संसाधनों के अभाव में वक्त से पहले जान जा सकती है.

बताते चलें कि सिलीगुड़ी, हाकीमपाड़ा के रहने वाले सिलीगुड़ी विधान मार्केट व्यवसायी समिति के सचिव और सिलीगुड़ी के चर्चित सामाजिक व्यक्ति वापी साहा के पुत्र अभिषेक साहा की रविवार की रात कर्सियांग से सिलीगुड़ी लौटते समय रोहिणी रोड पर हुई सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी. अभिषेक साहा खुद अपनी गाड़ी चला रहे थे. बताया जा रहा है कि उनकी गाड़ी का ब्रेक काम नहीं कर रहा था. अपने दोस्तों को बचाने के चक्कर में वह गाड़ी समेत सैकड़ो फुट गहरी खाई में गिर पड़े और ईश्वर के प्यारे हो गए!

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