चार-पांच ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं काफी खुश थीं. माइक्रो फाइनेंस कंपनी से उन्हें लोन मिलने वाला था. अधिकारियों ने प्रत्येक जरूरतमंद महिला को 60000 रुपए का ऋण देने का भरोसा दिलाया था. ऋण लेने के लिए समूह की सभी महिलाओं ने माइक्रो फाइनेंस कंपनी के निर्धारित मानदंडों तथा प्रक्रिया का पालन किया था. समूह की सभी महिलाओं को जिलेबिया मोड़ स्थित माइक्रो फाइनेंस कंपनी के दफ्तर बुलाया गया था.
महिलाएं काफी खुश थीं. उनके पर्स में माइक्रो फाइनेंस कंपनी द्वारा दिया गया ॠण कार्ड रखा था.उक्त कंपनी के द्वारा चार-चार महिलाओं का समूह बनाकर ऋण कार्ड तैयार करने की प्रक्रिया अपनाई गई थी. माइक्रो फाइनेंस कंपनी ने कार्ड जारी करने के एवज में प्रत्येक महिला से 4000 रू से लेकर ₹7000 तक वसूल किए थे.
कम से कम 200 महिलाओं को लोन देने के लिए कंपनी के दफ्तर में बुलाया गया था. ग्रामीण क्षेत्र की इन गरीब महिलाओं के चेहरे पर खुशी दिख रही थी. क्योंकि उन्हें एक साथ एक बड़ी रकम ₹60,000 मिलने जा रही थी. इसी खुशी में महिलाएं कंपनी के ऑफिस पहुंची तो उन्हें ऑफिस बंद नजर आया. महिलाओं ने सोचा कि शायद कर्मचारी कहीं बाहर गए होंगे. इसलिए उन्होंने उनका इंतजार करने का फैसला किया और दफ्तर के बाहर ही बैठ गईं. लेकिन सुबह से शाम हो गई. दफ्तर नहीं खुला और ना ही कोई कर्मचारी वहां नजर आया.
अब तक महिलाओं को एहसास हो गया था कि उनके साथ धोखा किया गया था. इसके बाद महिलाओं ने वहां हंगामा कर दिया. माइक्रो फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी और अधिकारी दफ्तर बंद कर फरार हो चुके थे. यह घटना सिलीगुड़ी के निकट सीमांचल इलाके में स्थित ठाकुरगंज की है. इस तरह की माइक्रो फाइनेंस कंपनियां सिलीगुड़ी, माटीगाड़ा, बागडोगरा आदि इलाकों में भी खूब चल रही हैं. अगर आपके आसपास में समूह लोन वाली कोई माइक्रो फाइनेंस कंपनी चल रही हो तो सावधान हो जाएं.
यह जरूरी नहीं है कि सभी माइक्रोफाइनेंस कंपनियां फर्जी होती हैं. लेकिन अधिकतर माइक्रो फाइनेंस कंपनियां फर्जी चल रही हैं और ग्रामीण महिलाओं को ठगी का शिकार बना रही हैं. क्या आपके घर की कोई महिला माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से जुड़ी हैं? क्या उन्हें ऐसी कंपनियों से नियमित रूप से ऋण मिलता है? कोई भी लोन लेने अथवा इन माइक्रोफाइनेंस कंपनियों से जुड़ने से पहले कंपनियों के एजेंट, अधिकारी व कर्मचारियों की गतिविधियों की जांच जरुर कर लें अन्यथा आपको पछताना पड़ सकता है. आपकी मेहनत की कमाई से बचा कर रखे गए रूपए एक झटके में ही गायब हो सकते हैं.
सिलीगुड़ी तथा आसपास के इलाकों में ऐसी कई छोटी-छोटी माइक्रो फाइनेंस कंपनियां चल रही हैं, जो जरूरतमंदों को लोन देती है. बातचीत की भाषा में इसे समूह लोन भी कहा जाता है. समूह लोन में एक साथ कई महिलाएं जुड़ी रहती हैं, जो माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की सदस्य रहती हैं. कार्ड तथा कंपनी से जुड़ने के लिए प्रत्येक महिला को हजारों रुपए खर्च करने पड़ते हैं. जब लोन लेने की बारी आती है, तब पता चलता है कि माइक्रो फाइनेंस कंपनी बंद हो चुकी है. महिलाओं को पछताने के अलावा हाथ कुछ नहीं लगता.
बिहार में गली गली, शहर शहर अनेक माइक्रोफाइनेंस कंपनियां चल रही हैं. इनमें से कुछ ही कंपनियां सही हैं, जबकि अधिकतर कंपनियों का रिकॉर्ड काफी खराब है. सीमांचल इलाके में तो ऐसी फर्जी कंपनियों की भरमार है. इन फर्जी माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के अधिकारी और एजेंटों ने सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में अपना जाल बिछाना शुरू कर दिया है.
मिली जानकारी के अनुसार गांव की महिलाओं के भोलेपन का लाभ उठाने वाले ये शातिर लोग सर्वप्रथम सोशल मीडिया पर आकर्षक नौकरी का विज्ञापन देते हैं. उनके आकर्षक ऑफर तथा कमीशन के लालच में अनेक बेरोजगार युवा उनसे जुड़ जाते हैं. इन युवाओं को ऑनलाइन भर्ती कराया जाता है. उसके बाद उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है. फिर उन्हें अलग-अलग इलाकों में भेज दिया जाता है.
कंपनी के कथित अधिकारी जिले या कस्बे में बड़ी-बड़ी हस्तियों की मौजूदगी में फर्जी कार्यालय भी खोल देते हैं. उद्देश्य एक ही रहता है कि लोगों का उन पर भरोसा जम सके. उनके एजेंट गांव-गांव गली-गली घूम कर महिलाओं एवं पुरुषों से संपर्क बनाते हैं तथा उन्हें आसान लोन देने और व्यवसाय के लिए जरूरी सामान उपलब्ध कराने का आश्वासन देते हैं.
माइक्रोफाइनेंस कंपनी से जुड़ी महिलाओं को लोन तभी दिया जाता है जब उन्हें कंपनी के द्वारा ऋण कार्ड मिल जाता है. ऐसे लोन कार्ड को प्राप्त करने के लिए महिलाओं को ₹4000 से लेकर ₹8000 तक खर्च करना पड़ता है. इन समूह की महिलाओं से रकम एकत्र करने के बाद कंपनी के अधिकारी कंपनी में ताला लगाकर फरार हो जाते हैं.
ठाकुरगंज में इस घपले की जांच में माइक्रो फाइनेंस कंपनी से जुडे कई लोग पकड़े गए हैं.इनमें गिरोह का मुख्य सरगना भी शामिल है. उनसे पूछताछ के बाद पता चला है कि सीमांचल और आसपास के इलाकों में एक विशाल नेटवर्क सक्रिय है. ऐसे में आपको सावधान रहने की जरूरत है. क्योंकि ऋण मिले या ना मिले लेकिन आपकी मेहनत की कमाई एक झटके में ही ठगों की गिरफ्त में जा सकती है. इसलिए सावधान रहें और माइक्रोफाइनेंस कंपनी की पृष्ठभूमि की जांच तथा अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सच्चाई जाने बगैर ना तो उनसे जुड़े और ना ही उनके किसी प्रलोभन में आए.
