सिलीगुड़ी समेत पूरे बंगाल में मांस-मछली का सेवन करने वाले लोगों की एक बड़ी आबादी है. मांस तो ठीक है, लेकिन अगर आप मछली का सेवन करते हैं तो आपके लिए अच्छी खबर नहीं है. यह खबर आपको सतर्क करने के लिए प्रस्तुत की जा रही है, जब आप मछली खरीदने के लिए बाजार जाएं!
चर्चा है कि सिलीगुड़ी के विभिन्न बाजारों में आजकल कई छोटे-मोटे दुकानदार मरी हुई ऐसी मछलियां बेच रहे हैं, जो भूटान से बहने वाली नदियों या तालाब से मारकर लाई गई होती हैं. इन मरी हुई मछलियों को लेकर अलीपुरद्वार जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है और लोगों से ऐसी मछली नहीं खाने की अपील की जा रही है. अब इसे लेकर लोग तरह-तरह की चर्चा कर रहे हैं.
सिलीगुड़ी के आसपास के इलाकों में खासकर भूटान से सटे जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार के नदी इलाकों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि भूटान से आई बाढ़ के कारण Dooars में बहने वाली कई नदियों में मछलियां मरी हुई अवस्था में प्राप्त हुई हैं, जिन्हें खाने योग्य नहीं समझा गया है. कई लोगों का मानना है कि नदी का पानी जहरीला हो गया है. यही कारण है कि नदी में जलचर मर रहे हैं.
संकोष नदी का पानी जहरीला हो गया है. इस नदी में मरी हुई मछलियां पाई गई हैं, जो भूटान से बहती हुई Dooars में पहुंच गई हैं. चर्चा यह भी है कि अनेक मवेशी और जंगली जानवर नदी के पानी में मर गए हैं. संकोष नदी के पानी में एक भालू के भी मरने की जानकारी मिली है. लोग बताते हैं कि इस नदी का पानी काला पड़ गया है. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि नदी का पानी कितना जहरीला हो गया है!
काला पानी कई इलाकों में नालों और पोखर में फैला है. यही कारण है कि नदी और नालों के निकट रहने वाले लोग चिंतित और घबराए हुए हैं. आसपास के इलाकों में लोगों में व्याप्त दहशत के बाद राज्य के पर्यावरण एवं वन मंत्री तथा कुमार ग्राम के विधायक मनोज कुमार उरांव इसका मुआयना करने नदी तट पहुंचे. उन्होंने संकोष नदी के तट पर रहने वाले कई लोगों से बात की. उन्होंने नदी का पानी काला पाया और इसके साथ ही नदी में मरी हुई मछलियों की भी पुष्टि की है.
बताया जा रहा है कि आसपास के इलाकों में नदी से मरी हुई मछलियों को पकड़ कर उन्हें दूर इलाकों में सस्ती दर पर बेचा जा रहा है. चर्चा तो यह भी है कि ऐसी मरी हुई मछलियों को कुछ व्यापारी सिलीगुड़ी के मंडियों में भी पहुंचा रहे हैं. हालांकि आधिकारिक रूप से अभी इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है और ना ही प्रशासन ने इसकी जानकारी दी है.
अगर आप मछली खरीदने के लिए बाजार में जाते हैं तो पूरी सतर्कता के साथ मछली लें. मरी हुई मछलियों की पहचान करें. ये छोटी बड़ी मछलियां हो सकती हैं. यह जहरीली हो सकती है. हालांकि जहरीली मछलियों को आसानी से पहचाना नहीं जा सकता है. पर सीधी बात है कि इन नदी की मरी हुई मछलियों से सावधान रहे और भूलकर भी ना लें. चाहे आपको खूब सस्ता ही क्यों ना मिले. लेकिन ऐसी मरी हुई मछलियों से दूर रहे. या तो बाहर से मंगाई गई बड़ी मछलियां खरीदे या फिर ताजी मछलियां ले सकते हैं.
अलीपुरद्वार जिला मत्स्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉक्टर सोमनाथ चक्रवर्ती ने संकोष नदी में मरी हुई मछलियों तथा उसके काले पानी की जांच कराने का फैसला किया है. इस बीच माइकिंग के द्वारा अलीपुरद्वार जिला प्रशासन लोगों को नदी का पानी इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दे रहा है. जिला प्रशासन की ओर से लोगों से कहा जा रहा है कि वे ना ही मछलियां पकड़ें, न खाएं और न ही बिक्री के लिए बाजार में ले जाएं, जब तक कि जांच पूरी नहीं हो जाती.
इस स्थिति में सिलीगुड़ी के लोगों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण हो सकती है. किसी तरह की स्वास्थ्य जोखिम लेने के बजाय सच्चाई का पता लगाएं. विश्वसनीय दुकानदार से ही मछली खरीदें. अज्ञात दुकान से मछली खरीदना भारी पड़ सकता है. अलीपुरद्वार जिला प्रशासन ने नागरिकों से अफवाहों से दूर रहने की अपील की है.
हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने नदी इलाके में अपनी मुस्तैदी बढ़ा दी है. लेकिन इस बीच पैसे कमाने के लिए कुछ दुकानदार चोरी-छिपे ऐसी विषाक्त मरी हुई मछलियों को सिलीगुड़ी या आसपास के इलाकों में स्थित बाजारों में बेच सकते हैं. इसलिए मछली खरीदते समय आपको सावधान रहना जरूरी है.
