August 30, 2026
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मुख्यमंत्री सिलीगुड़ी को दे सकते हैं पूजा का बड़ा तोहफा!

Chief Minister can give a big puja gift to Siliguri!

कोई भी चीज हमेशा एक जैसी नहीं रहती. बदलाव प्रकृति का नियम है. जड़- चेतन सभी वस्तुएं समय के अनुसार बदलती जाती हैं. अगर पिछले 50 वर्षों का सिलीगुड़ी का इतिहास देखें तो शहर में काफी बदलाव हुआ है. गांव कस्बे से शुरू हुआ सिलीगुड़ी का सफर अब सिटी की तरफ अग्रसर हो रहा है.

सिलीगुड़ी के इस बदलाव में सिलीगुड़ी नगर निगम प्रशासन की भूमिका तो है ही, सिलीगुड़ी के लोगों का व्यक्तिगत प्रयास और निजी डेवलपर्स बिल्डर्स की मेहनत भी रंग ला रही है. पिछले 10 वर्षों में सिलीगुड़ी की आबादी कई गुना बढ़ गई है. आवासीय बस्तियों का विस्तार हुआ है. डेवलपर्स और बिल्डर्स ने सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में बहुमंजिली भवन बनाकर शहर को एक नई पहचान दी है.

आरंभ में सिलीगुड़ी एक नगर पालिका थी. इसकी स्थापना 24 मई 1949 को हुई थी. जबकि वर्ष 1994 में नगर पालिका को अपग्रेड करके नगर निगम का दर्जा दिया गया था. नगर निगम के अंतर्गत सिलीगुड़ी को लाए जाने के बाद यहां विकास की गति पकड़ी, जो अब तक जारी है. सिलीगुड़ी नगर निगम के अंतर्गत 47 वार्ड हैं. सिलीगुड़ी की आबादी बढ़ने के साथ ही वार्डो की संख्या बढ़ाए जाने को लेकर चर्चा शुरू हो गई है, ताकि सरकार और प्रशासन की जारी सेवाओं का समुचित लाभ नागरिकों को मिल सके.

सिलीगुड़ी का क्षेत्रफल तो नहीं बढ़ा, लेकिन आबादी बढ़ गई. ऐसे में बढ़ती आबादी और सामान्य नागरिक सेवाओं के बहाल को लेकर इसकी आवश्यकता महसूस की जा रही है कि वार्डों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि हर व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके. सुझाव मिल रहे हैं कि जो वार्ड बड़े हैं, उनका विभाजन किया जाए. और इस तरह से सिलीगुड़ी नगर निगम के अंतर्गत वार्डों की संख्या 60 कर देने से सिलीगुड़ी के नागरिकों की शिकायत को दूर किया जा सकेगा.

मिल रही जानकारी के अनुसार वार्ड के विभाजन का एक फार्मूला सेट किया जा रहा है. जहां आबादी 5000 है वहां एक वार्ड किया जाए. जबकि 5000 से ज्यादा आबादी होने पर वार्ड का विभाजन किया जाना चाहिए. इस तरह से परिसीमन का प्रस्ताव लाया जा रहा है. इस पर भाजपा के नेता और मंत्री विचार कर रहे हैं और जल्द ही प्रस्ताव को मंजूर करके अनुमोदन के लिए राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा. सूत्रों ने बताया कि अगले हफ्ते तक अथवा सितंबर के पहले हफ्ते में राज्य सरकार सिलीगुड़ी के विकास को लेकर एक बड़ी घोषणा कर सकती है. इसमें वार्ड बढाए जाने की बात भी शामिल है.

सिलीगुड़ी नगर निगम के अंतर्गत कई वार्ड का क्षेत्रफल आबादी से कई गुना ज्यादा है.कई वार्ड ऐसे हैं जहां आबादी कम है. लेकिन क्षेत्रफल बड़ा है. बहुत से वार्ड काफी बड़े हैं तो बहुत से वार्ड काफी छोटे हैं. जनसंख्या के दृष्टिकोण से सिलीगुड़ी नगर निगम के बहुत से वार्ड समन्वय नहीं रखते हैं. जैसे सिलीगुड़ी नगर निगम के वार्ड नंबर 1, 3 ,40, 41 और 42 इत्यादि में जनसंख्या 10000 से भी अधिक है. इन वार्डो को दो भागों में बांटा जा सकता है.

सिलीगुड़ी नगर निगम के 46 नंबर वार्ड में वोटर की संख्या 20000 से भी अधिक है. जबकि इतनी बड़ी आबादी पर केवल एक पार्षद विकास कार्यों के लिए उत्तरदाई होते हैं. जाहिर है कि इस स्थिति में सरकारी योजनाओं का लाभ सभी तक नहीं पहुंच पाता है. अगर वार्ड नंबर 46 को दो या तीन वार्ड में बांट दिया जाए तो इससे नागरिक प्रशासनिक सुविधाओं में वृद्धि तो होगी ही, नागरिकों को भी प्रशासन से शिकायत का मौका नहीं मिलेगा. विकास कार्यों को भी गति मिलेगी.

सूत्रों ने बताया कि लगभग 5000 की आबादी पर एक वार्ड गठित करने पर लगभग सहमति बन चुकी है. इस हिसाब से सिलीगुड़ी में जनसंख्या के दृष्टिकोण से कुल 60 वार्ड बनते हैं. 60 वार्ड कर दिए जाने से सड़क, पेय जल ,निकासी व्यवस्था इत्यादि सभी बुनियादी सुविधाओं का विकास होगा. अनेक भाजपा के पूर्व पार्षदों का भी यही मत है. पूर्व पार्षद अमित जैन ने तो साफ कह दिया है कि अगर सिलीगुड़ी नगर निगम के अंतर्गत 60 वार्ड किए जाते हैं तो विकास और बदलाव के क्षेत्र में सिलीगुड़ी का मानचित्र बदल जाएगा. बहरहाल देखना होगा कि राज्य सरकार सिलीगुड़ी को लेकर क्या बड़ी घोषणा करती है.

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