अब अपनी आदत सुधार लीजिए. दादाजी या पापा जी को खांसी हुई है. ऑफिस से लौटते समय मेडिकल स्टोर से कफ सिरप ले आऊंगा. बेटी को बुखार है. कोई कोई बात नहीं. मम्मी मेडिकल स्टोर से पैरासिटामोल सिरप ले आएगी. तुरंत बुखार उतर जाएगा. अभी तक तो परिवार में यही सब होता है. चाहे बच्चे हो या बडे या कोई भी व्यक्ति, बीमार पड़ने पर सांत्वना दी जाती है नजदीक में मेडिकल स्टोर्स है ना! कफ सिरप लेते ही खांसी बुखार छूमंतर अब यह सब नहीं चलेगा…
सर्दी, खांसी, बुखार, वायरल जैसी बीमारियां घर-घर में दस्तक देती है.इन्हें सामान्य बीमारियां कह सकते हैं, जिनका इलाज घर पर ही बिना विशेष दवा के ही किया जा सकता है या फिर नजदीकी मेडिकल स्टोर्स अथवा केमिस्ट शॉप से सिरप लेकर खांसी या छोटे बच्चों के बुखार को ठीक किया जा सकता है. आमतौर पर लोग ऐसे सामान्य वायरल रोगों के लिए डॉक्टर के पास जाना जरूरी नहीं समझते हैं.
पर अब केंद्र सरकार ने जो फैसला लिया है, उसके अनुसार घर परिवार में किसी को भी कोई भी सामान्य बीमारी जैसे खांसी सर्दी बुखार आदि चाहे बच्चों को हो या बड़ों को, अगर उपचार के लिए दवा आदि की जरूरत है तो उसके लिए डॉक्टर को दिखाना जरूरी है.अगर आप यह सोचते हैं कि नजदीकी मेडिकल स्टोर से कफ सिरप लेकर खुद ही डॉक्टर बनकर अपना इलाज कर ले तो यह मुमकिन नहीं होगा. आपको चाह कर भी मेडिकल स्टोर्स अथवा फार्मेसी की दुकानों से किसी भी तरह का कफ या सामान्य सिरप नहीं मिल सकेगा.
दुकानदार आपसे डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन अथवा पर्ची मांगेंगे. पर्ची लेकर ही कफ सिरप दे पाएंगे. इस नियम को सरकार ने अनिवार्य कर दिया है. इसके तहत अब कोई भी केमिस्ट शॉप, फार्मेसी की दुकान, मेडिकल स्टोर्स आदि प्रिस्क्रिप्शन के बिना किसी भी तरह का कफ सिरप नहीं बेच सकेंगे. अगर वह ऐसा करते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जा सकती है. केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने दवा नियमों में संशोधन करते हुए यह व्यवस्था लागू कर दी है.
हो सकता है कि सरकार के इस फैसले से रोगी की परेशानी और आर्थिक भार बढ़ जाए. जैसे उसे डॉक्टर के पास जाना होगा.डॉक्टर की फीस चुकानी होगी. इसमें समय और पैसा दोनों लगेगा. फिर आप प्रिस्क्रिप्शन लेंगे और तब मेडिकल स्टोर से आप सिरप ले सकते हैं.आप जानना चाहेंगे कि सरकार ने ऐसा क्यों किया? दरअसल पिछले कुछ वर्षों में कफ सिरप को लेकर देश भर में काफी बवाल मचा हुआ है. राजस्थान, मध्य प्रदेश ,उत्तर प्रदेश और कई राज्यों में नकली कफ सिरप या मिलावटी कफ सिरप के दुष्परिणाम से कई बच्चों की मौत हो गई.
कई रोगियों ने यह भी शिकायत की कि कफ सिरप लेने के बाद उन्हें सांस लेने में भी तकलीफ हुई. कुछ रोगियों की मौत भी हो गई. यह घटना देशभर में कुछ इस तरह से तूल पकड़ी कि इसको लेकर परिवार कल्याण एवं स्वास्थ्य विभाग चिंता में पड़ गया. जांच आयोग बैठाए गए. कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई. इस तरह की छिटपुट घटनाएं देशभर में होती रही. केंद्र सरकार ने लोगों की स्वास्थ्य समस्याओं तथा मौत की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए इन दवाओं की अनियंत्रित बिक्री रोकने और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया है.
केंद्र सरकार की अधिसूचना जारी हुई है. इसकी उम्मीद पहले से ही की जा रही थी कि सरकार कुछ इसी तरह का फैसला लेने वाली है. 30 दिसंबर 2025 को ही इस संबंध में केंद्र सरकार की ओर से जो मसौदा नियम जारी किया गया था और जनता से सुझाव तथा प्रतिक्रियाएं मांगी गई थी, उसी समय स्पष्ट हो गया था कि आने वाले समय में सरकार कुछ इस तरह की व्यवस्था करने जा रही है और आज केंद्र सरकार ने दो टूक फैसला कर लिया है.
परिवार कल्याण और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कहा गया है कि देश भर के सभी मेडिकल स्टोर्स, फार्मेसी की दुकान ,केमिस्ट शॉप सभी को यह नियम मानना होगा और बिना पर्ची के किसी भी मरीज या मरीज के रिश्तेदार को सिरप नहीं बेचना होगा. अगर उन्होंने ऐसा करने से मना किया अथवा चोरी छिपे सिरप बेचते हुए पकड़े गए तो उनके खिलाफ संबंधित प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. सरकार और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बताते हैं कि सरकार का यह कदम दवाओं के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए है. लेकिन आप क्या सोचते हैं? सरकार का यह कदम क्या सामान्य रोगियों की परेशानी बढ़ाने वाला है या फिर सुरक्षित दवा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए उपयुक्त है?

