October 8, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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इको सेंसेटिव जोन के दायरे में बने अवैध निर्माण पर चलेगा बुलडोजर?

Bulldozer action against illegal construction and encroachment in Siliguri has been dealt a blow! Find out the full story!

अगर आप सिलीगुड़ी शहर से सटे मिलन मोड़ और सालूगाड़ा की ओर जाते हैं तो तोड़ीबारी इलाके से होकर गुलमा नदी बहती है. आप इस नदी का नजारा देखकर दंग रह जाएंगे. आपको पता भी नहीं चलेगा कि यह नदी है या बस्ती में नदी है. यहां कई तरह के रिजॉर्ट और भवन देखने को मिलेंगे, जो नदी के गर्भ तक में फैले हुए हैं. सिलीगुड़ी के आसपास माटीगाड़ा, बागडोगरा, खोरीबाड़ी आदि इलाकों में भी नदी के गर्भ में अथवा नदी का अतिक्रमण करके निर्माण कार्य किए गए हैं.

सिलीगुड़ी और आसपास के कई संवेदनशील स्थलों को देखने के बाद पता ही नहीं चलता है कि यह नदी है या नाला. नदी अपनी प्राकृतिक दिशा को खो चुकी है. नदी का जो प्राकृतिक प्रवाह है, वह कब का बाधित हो चुका है. ऐसे में नदी के स्वरूप से किया गया छेड़छाड़ पर्यावरण को काफी हद तक प्रभावित कर रहा है. छोटी बड़ी नदियों की गोद में अनेक रेस्टोरेंट चल रहे हैं, जहां आए दिन बर्थडे तथा दूसरे तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. डीजे बजाए जाते हैं. ये शोर जंगली पशुओं के लिए अच्छा नहीं है.

इसी तरह से तीस्ता नदी से लेकर Dooars की अन्य सहायक नदियों के गर्भ में भी पिछली सरकार के कार्यकाल में काफी अवैध निर्माण हुए थे और ये सभी निर्माण इको सेंसेटिव जोन के नियमों और व्यवस्था को ताक पर रखकर किए गए थे. अब इन खूबसूरत भवनों और रेस्टोरेंट, stay हाउस आदि का क्या होगा? क्या चलेगा इन पर बुलडोजर?

सिलीगुड़ी और आसपास के क्षेत्र में इको सेंसेटिव जोन को लेकर नए प्रस्ताव को केंद्र सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जा चुका है. यह प्रस्ताव इको सेंसेटिव जोन के दायरे में बदलाव को लेकर है. सूत्र बता रहे हैं कि केंद्र सरकार नए प्रस्ताव को मंजूर कर लेगी. सूत्रों ने बताया कि जैसे ही केंद्र सरकार की तरफ से नए प्रस्ताव को मंजूर किया जाता है, बंगाल सरकार वैसे ही इको सेंसेटिव जोन के दायरे में बनाए गए अवैध निर्माणों को ध्वस्त करना शुरू कर देगी.

अब सवाल है कि पिछली सरकार में इको सेंसेटिव जोन में गैर कानूनी रूप से कई व्यावसायिक हितों के लिए ठोस निर्माण कार्य हुए हैं? क्या उन्हें बुलडोजर से नष्ट कर दिया जाएगा? यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि बंगाल सरकार ने कुछ इसी तरह का एक्शन प्लान बनाया है. वन विभाग इको सेंसेटिव जोन को लेकर किसी भी तरह के समझौते के खिलाफ है.

वन विभाग के सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार विभाग ने ऐसे सभी अवैध निर्माण की पहचान कर ली है, जिनका निर्माण नियम और कानून के दायरे में नहीं हुआ है. या फिर किन्हीं हेराफेरी के तहत इस तरह के निर्माण किए गए हैं. इनमें रेस्टोरेंट, पर्यटकों के लिए कमरा, भवन, होटल आदि शामिल है. बहुत से रिजॉर्ट, रेस्टोरेंट तथा मकान तो नदी के गर्भ में ही बने हैं.

अब इन सभी का सर्वे कराया जा रहा है. जल्द ही इन सभी को चिन्हित कर लिया जाएगा. वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारी इको सेंसिटिव जोन को लेकर काफी गंभीर है और यही कारण है कि सरकारी जमीन, वन क्षेत्र और नदी के किनारो पर हुए कथित अवैध निर्माण को लेकर उनकी तरफ से कार्रवाई करने की तैयारी शुरू कर दी गई है.

पर्यावरणविद बंगाल सरकार पर लगातार दबाव बनाए हुए हैं. वन विभाग से लेकर अन्य विभागों के पर्यावरण चिंतक, पशु चिंतक आदि का कहना है कि इन अवैध निर्माण के कारण कई इलाकों में हाथी कॉरिडोर प्रभावित हुआ है. वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा है. इसके अलावा नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हुआ है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र पर विपरीत प्रभाव पड़ा है.

इसी का नतीजा है कि जंगली जानवरों के आवागमन मार्ग बाधित होने से मानव तथा हाथी संघर्ष की आशंका बढ़ी है. वन विभाग का यह भी मानना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो सरकारी भूमि पर अतिक्रमण और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति और बढ़ सकती है.ऐसे में सर्वे के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की तैयारी बंगाल सरकार और खासकर वन विभाग की है.

अब देखना होगा कि बंगाल सरकार, वन विभाग इन अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाता है या फिर दोषियों के खिलाफ जुर्माना और आपराधिक मुकदमा दर्ज कराता है. वन विभाग विभिन्न कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर रहा है.

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