October 11, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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सिलीगुड़ी काॅरिडोर की सुरक्षा की ऐसी तैयारी कि चीन और बांग्लादेश की निकल जाएगी हेकड़ी!

Such preparations have been made for the security of Siliguri Corridor that China and Bangladesh will be left speechless!

सिलीगुड़ी गलियारा भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है, यह इसी बात से समझा जा सकता है कि एकमात्र सिलिगुड़ी कॉरिडोर ही वह सेतु है, जो पूर्वोत्तर के 6 राज्यों को शेष भारत से जोड़ता है. बांग्लादेश और चीन चाहते हैं कि भारत का यह सेतु विखंडित हो जाए या फिर उस पर किसी तरह से अपना प्रभाव स्थापित किया जा सके. भारत चीन के इरादे को नाकाम करना चाहता है और बांग्लादेश को एहसास दिलाना चाहता है कि चीन ना कभी किसी का हुआ है और ना होगा. भारत -बांग्लादेश को सावधान करना चाहता है कि वह चीन की साजिश का शिकार होने से बचे.

चीन हमेशा कुछ ना कुछ ऐसी चाल चलता रहता है, जिसके कारण सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा पर खतरे के बादल मंडराने लगते हैं. जब बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार थी, तब तक बांग्लादेश से भारत को कोई खतरा नहीं था. लेकिन बांग्लादेश में नई सरकार के आने के बाद स्थिति एकदम बदल गई है. बांग्लादेश की नई सरकार का झुकाव चीन की तरफ है.

हाल ही में चीन और बांग्लादेश ने तीस्ता नदी के अध्ययन के बहाने सिलीगुड़ी गलियारा पर अपनी कुदृष्टि जमाने का प्रयास किया था. सिलीगुड़ी गलियारा के नजदीक ही बांग्लादेश का लालमोहिनीरहाट हवाई अड्डा है, जिसे बांग्लादेश जीवित करने में लगा है. इसमें चीन बांग्लादेश की मदद कर रहा है. सिलीगुड़ी गलियारा की स्थिति ऐसी है कि यह नेपाल, बांग्लादेश ,चीन और भूटान से घिरा हुआ है और काफी संवेदनशील स्थिति में है. चीन चुंबी घाटी से इस पर सीधी नजर रखता है.

सिलीगुड़ी गलियारा के दक्षिण में बांग्लादेश, उत्तर पूर्व में चीन की चुंबी घाटी, पश्चिम में नेपाल और उत्तर में भूटान है. भारत की नेपाल और भूटान से मैत्री है. लेकिन बांग्लादेश और चीन की कूटनीति भारत को परेशान करती है. सिलीगुड़ी कॉरिडोर 22 किलोमीटर चौड़ा पतला गलियारा है. परंतु यह कितना महत्वपूर्ण है, यह इसी बात से समझा जा सकता है कि अगर किसी तरह से सिलीगुड़ी गलियारे को अव्यवस्थित करने की कोशिश की गई तो भारत का पूर्वी राज्यों से संपर्क कट जाएगा. यही कारण है कि भारत अपने इस कॉरिडोर की सुरक्षा को इस स्थिति में मजबूत करना चाहता है कि अगर चीन या बांग्लादेश की तरफ से हमला होता है तो भारतीय सेना उसका मुंहतोड़ जवाब दे सके.

यूं तो भारत ने डोकलाम विवाद के बाद ही अपनी सैन्य नीति का विस्तार करना शुरू कर दिया था. अब भारत चाहता है कि अगर दुश्मन देश की ओर से सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर हमला होता है तो उस स्थिति में भारत की सेना दुश्मन का मुंह तोड़ जवाब दे सके. वर्तमान में भारतीय सेना उचित संसाधनों के अभाव में समय पर मोर्चा नहीं संभाल सकती है. एक तो बर्फीली चट्टाने है, पहाड़ी रास्ता और सिंगल लेन नेटवर्क है. ऐसे में सीमा पर भारी तोप तथा अन्य सैनिक दस्तों को समय रहते पहुंचने में कठिनाई है. अभी जो स्थिति है, उसके अनुसार भारतीय सेना को सीमा तक रसद व अन्य उपकरणों को पहुंचाने में 12 से 18 घंटे लग जाते हैं.

अगर भारतीय सेना न्यूनतम समय में यह काम कर लेती है तो इस स्थिति में दुश्मन देश का मुंह तोड़ जवाब दिया जा सकता है. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर भारत सरकार ने चार सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स शुरू किया है, जिसके 2029 में पूरे होने के आसार हैं. अगर यह projects पूरा होता है तो इस स्थिति में भारतीय सेना को सिलीगुड़ी गलियारा तक पहुंचने में महज 3 घंटे ही लगेंगे. अब आप जरूर जानना चाहेंगे कि भारत सरकार के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स क्या हैं. तो चलिए आपको बताते हैं.

यह 4 projects हैं, अंडरग्राउंड रेल टनल प्रोजेक्ट, गोरखपुर शिलांग एक्सप्रेसवे, ऑपरेशन फोर्टिस व गुप्त सेन चक्रव्यूह परियोजना. अंडरग्राउंड रेल टनल उत्तर दिनाजपुर जिले के तीन माइल हाट से रांगापानी तक बनाई जाएगी. इस प्रोजेक्ट की खासियत जमीन से 20 मीटर नीचे बनने वाली 36 किलोमीटर लंबी रेल टनल है. भारत की यह रेल टनल नेपाल और बांग्लादेश की सीमाओं के बेहद करीब से गुजरेगी और इस पर रेल चलेगी. दुश्मन के हवाई और ड्रोन हमलों का इसपर कोई असर नहीं होगा. इसके साथ ही युद्ध होने की स्थिति में भारतीय सेना महत्वपूर्ण हथियारों को बिना किसी रूकावट के युद्ध चौकियों तक पहुंचा सकती है.

सिलीगुड़ी गलियारा के पास 534 करोड़ से बन रहे ऑपरेशन फोर्टिस प्रोजेक्ट की भी अपनी विशेषता है. यह भारत की सैन्य सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य किला जैसा बनाती है. यह 7 लेयर डिफेंस चक्रव्यूह होगा, जो जमीन में नीचे पांच कमांड सेंटर, 6 संचार केंद्र, 12 एयर डिफेंस तथा गोला बारूद स्टोरेज व 12 बम shelters से संपन्न होगा.

चीन तिब्बत सीमा पर नए गांव बसा रहा है. इसके जवाब में भारत की रणनीति अंडरग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर को मिसाइल, ड्रोन या हवाई हमले से पूरी तरह सुरक्षित और अभेद्य बनानी है. गोरखपुर शिलांग एक्सप्रेसवे, जिसकी लंबाई 630 किलोमीटर होगी, इसका मकसद सिलीगुड़ी को गुवाहाटी व शिलांग से जोड़ने के अलावा आपात स्थितियों में सेना के लिए एक तेज और वैकल्पिक मार्ग बनाना है.

अगले 4 साल में इन सभी प्रोजेक्ट्स को पूरा कर लेना है. उम्मीद की जानी चाहिए कि 2029 तक भारत सरकार की सिलीगुड़ी गलियारे को लेकर बनाई गई अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था एक नए अवतार में सामने आएगी!

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