July 11, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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ऐसी होती है सिलीगुड़ी पुलिस!

This is how Siliguri Police is!

अगर पुलिस चाहे तो अपराधी अपराध करने के बाद ज्यादा समय तक कानून से दूर नहीं रह सकते हैं. अगर पुलिस ईमानदारी तथा सच्ची कर्तव्यनिष्ठा से काम करे, तो पीड़ित पक्ष को न्याय पाने के लिए भटकना नहीं पड़ता है. सिलीगुड़ी पुलिस ने इससे पहले कोई बड़े कारनामे किए हों, पता नहीं. लेकिन आज सिलीगुड़ी पुलिस की एक घटना के मामले में खूब चर्चा हो रही है. पीड़ित व पीड़ित पक्ष के लोग सिलीगुड़ी पुलिस की काफी प्रशंसा कर रहे हैं.

सिलीगुडी पुलिस ने महज 1 घंटे में सिलीगुड़ी से लापता हुई एक नाबालिग बालिका को न केवल ढूंढ कर बरामद कर लिया बल्कि सिलीगुड़ी से उसे भगाकर ले जा रहे आरोपी युवक को मुर्शिदाबाद जिले के अजीमगंज से गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया. वर्तमान समय में जहां एक साधारण मामले में भी पुलिस को कार्रवाई करने में 1 दिन से ज्यादा समय लग जाता है, वहीं सिलीगुड़ी पुलिस ने इतनी बड़ी घटना को महज 1 घंटे में निपटा दिया. शहर में सिलीगुड़ी पुलिस की कार्यशैली की चर्चा शुरू हो गई है.

सिलीगुड़ी नगर निगम वार्ड नंबर 24 के अंतर्गत भारत नगर एक इलाका है. यहीं अर्पिता ( कल्पित नाम) रहती थी. आजकल के बच्चे सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं. अर्पिता ने यूं ही एक दिन मुंबई निवासी जामिन खान नामक एक युवक के एक पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उसकी प्रतिक्रिया को जामिन खान ने काफी पसंद किया और उसकी तारीफ की.

इसके बाद जामिन खान फेसबुक और इंस्टाग्राम पर बराबर पोस्ट डालने लगा. अर्पिता उसके पोस्ट का इंतजार करती रहती थी और अपनी राय भेजती रहती थी.धीरे-धीरे उन दोनों में दोस्ती होती चली गई. उन्होंने एक दूसरे के पर्सनल मोबाइल नंबर भी साझा किये और आपस में बातचीत करने लगे. फिर एक दिन युवक ने अर्पिता के मोबाइल पर वीडियो कॉल किया.

वीडियो कॉल के बाद दोनों की दोस्ती प्रेम में तब्दील हो गई. युवक उसे मुंबई की रंगीनियों के बारे में बताता तो अर्पिता हसरत भरे अंदाज में उसे सुनने लगती थी.

एक दिन दोनों बातें कर रहे थे. तभी अर्पिता ने मुंबई की माया नगरी देखने की इच्छा व्यक्त की. युवक जामिन खान ने कहा, मुंबई क्या बड़ी चीज है. इस तरह से जामिन खान अर्पिता को अपने वाकजाल में फंसाता रहा. अर्पिता अभी नाबालिग थी.कच्ची उम्र की थी. उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या अच्छा और क्या बुरा है. लेकिन धीरे-धीरे वह उसकी तरफ आकर्षित होती चली गई. उसने युवक से शादी करने की हामी भर दी. युवक खुशियों से उछल पडा.

फिर एक दिन जामिन खान अपनी निर्धारित योजना के अनुसार अर्पिता को लेने सिलीगुड़ी पहुंच गया. उसने फोन करके अर्पिता को स्टेशन बुलाया. अर्पिता मुंबई जाने के लिए पूरी तरह तैयार थी. उसने इस बारे में घर में किसी को भी नहीं बताया और चुपचाप घर से निकल गई. लेकिन उसे घर से चोरों की तरह बाहर जाते देखकर उसके एक पड़ोसी ने देख लिया और उसके घर वालों को बता दिया. मिली जानकारी के अनुसार परिजनों ने अर्पिता के नंबर पर फोन किया तो उसने जवाब दिया कि वह किसी जरूरी काम से अपने किसी दोस्त से मिलने जा रही है. 2 घंटे में लौट आएगी.

अर्पिता के जाने के बाद घर वालों ने शाम तक उसका इंतजार किया. और फिर रात हो गई. लेकिन अर्पिता घर नहीं लौटी तो घर वालों को चिंता होने लगी. इस बीच पड़ोसियों ने अर्पिता के बारे में जो कुछ बताया था, उसके बाद कुछ अनहोनी की आशंका से ग्रस्त होकर परिजन तुरंत ही सिलीगुड़ी थाना पहुंच गए और शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि कोई लड़का उनकी बेटी को बहका कर ले गया है.

मामला एक नाबालिग बच्ची के अगवा करने का था. अतः पुलिस हरकत में आई. मामले की देखरेख के लिए थाना प्रभारी प्रवीर दत्त के नेतृत्व में एक पुलिस दल का गठन हुआ. थाना प्रभारी प्रवीर दत्त ने तुरंत ही जांच शुरू कर दी. सर्वप्रथम युवक और युवती के मोबाइल की लोकेशन ट्रैक का फार्मूला अपनाया गया, ताकि यह पता चल सके कि इस समय दोनों कहां पर हैं. प्रवीर दत्त सर्वप्रथम बालिका को सुरक्षित बरामद करना चाहते थे. उसके लोकेशन का पता लगाने में मोबाइल ट्रैकिंग काफी मददगार रहा.

जल्द ही पता चल गया कि दोनों मुर्शिदाबाद जिले के अजीमगंज की ओर ट्रेन से जा रहे हैं. इस जानकारी के बाद पुलिस ने अजीमगंज जीआरपी से संपर्क किया और नाबालिग बच्ची की तस्वीर जीआरपी को भेज दी. जीआरपी ने अजीमगंज रेलवे स्टेशन पर ट्रेन रुकी तो तस्वीर के सहारे लड़की को ढूंढना शुरू कर दिया. जल्द ही ट्रेन की एक बोगी से जीआरपी पुलिस ने लड़की को ढूंढ लिया. जीआरपी ने लड़की के साथ बैठे जामिन खान को भी हिरासत में ले लिया.

हालांकि जीआरपी की प्रारंभिक पूछताछ में लड़की ने जीआरपी को झूठ बोलकर उन्हें बरगलाने की कोशिश की, लेकिन जब अधिकारियों ने दोनों को थाने में लाकर कड़ी पूछताछ की तो वे ज्यादा समय तक टिक नहीं सके और पूरी घटना का खुलासा कर दिया. इस तरह से सिलीगुड़ी पुलिस ने आधुनिक तकनीक और मोबाइल ट्रैकिंग की मदद से महज 1 घंटे में ही शीघ्रता से कार्रवाई करते हुए नाबालिग लड़की को अजीमगंज से सुरक्षित बरामद करने में सफलता हासिल कर ली.

अगर पुलिस की कार्यशैली चुस्त नहीं होती तो अब तक लड़की का कुछ पता भी नहीं चलता. या तो वह मानव तस्कर की भेंट चढ़ गई होती या फिर उसके साथ कुछ भी हो सकता था. लेकिन सिलीगुड़ी पुलिस में भी कुछ अफसर ऐसे हैं जो प्रवीर दत्त जैसे होते हैं. अगर पुलिस चाहे तो अपराधी अपराध करने से पहले 100 बार सोचेंगे. इस रिपोर्ट के तैयार होने तक सिलीगुड़ी पुलिस आरोपी और पीड़िता को अजीमगंज से सिलीगुड़ी ला चुकी थी. लड़की का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद पुलिस ने उसे उसके परिजनों के हवाले कर दिया है. पुलिस इस पूरे प्रकरण की पुलिस जांच में जुटी है.

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