बंगाल के युवा काफी समय से मांग कर रहे हैं कि उन्हें हर महीने बेरोजगारी भत्ता नहीं, बल्कि काम चाहिए. यहां इंडस्ट्री की स्थापना हो. हर हाथ को काम मिले. सरकार से उनकी यही अपेक्षा है. उन्हें नहीं चाहिए ₹3000 का बेरोजगारी भत्ता.अब राज्य की नई भाजपा सरकार युवाओं की मांग पूरी करने की दिशा में कदम उठाने जा रही है.
वर्तमान में बंगाल में उद्योग धंधों से लेकर टेक्नोलॉजी के स्तर पर कुछ खास उपलब्धि नजर नहीं आ रही है. अगर दक्षिण बंगाल को छोड़ दे तो उत्तर बंगाल उद्योग धंधो और कल कारखानों के मामले में सर्वथा पिछड़ा हुआ है. यहां के युवा रोजगार के लिए देश के दूसरे प्रदेशों की रूख करते हैं. उत्तर बंगाल के आठ जिलों में एक भी ऐसा कोई बड़ा कारखाना नहीं है, जहां सैकड़ो और हजारों हाथ को काम मिल सके.
चाय बागान, चाय फैक्ट्री के अलावा कुछ छोटे-मोटे कल कारखाने यहां जरूर हैं, जहां कुछ लोगों को ही रोजी रोटी मिलती है. अधिकतम युवा दुकानों में काम करते हैं. बरसों से ऐसा ही देखा जा रहा है. कई सरकारें आई और चली गई. माकपा की सरकार से लेकर टीएमसी की सरकार तक उत्तर बंगाल में कोई बड़ी इंडस्ट्री नहीं लगी है. हालांकि यहां बड़े-बड़े कल कारखानों के लिए जोर-शोर से घोषणा की जाती है. परंतु जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं होता है.
हर साल बंगाल ग्लोबल बिजनेस सम्मिट होता है. संकल्प व बड़ी-बड़ी बातें होती है और फिर सब कुछ शांत पड़ जाता है. यहां उद्योग के विस्तार में पिछली सरकारों द्वारा अभिरुचि नहीं लेने से उत्तर बंगाल के युवा रोजी रोजगार के लिए देश के दूसरे राज्यों में पलायन करते हैं, जहां उन पर भाषा विवाद और अन्य तरीके से अत्याचार और उत्पीड़न किया जाता है. बंगाल की मौजूदा भाजपा सरकार इस स्थिति को अच्छी तरह समझती है और इसीलिए यह सरकार एक ऐसी उद्योग नीति लाने जा रही है, जो पूरे बंगाल में औद्योगिक क्षेत्र में एक क्रांति लाएगी.
राज्य में सत्ता में आने के बाद पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार राज्य में पलायन को रोकने के लिए सभी तरह के कदम उठा रही है. कुछ दिनों पहले ही काफी समय से बंद पड़ी जूट मिलों को खोला जा चुका है. अब राज्य में उद्योग धंधों के विकास के लिए सरकार अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में एक पर एक बड़े कदम उठाने जा रही है. राज्य में गुंडा दमन कानून लागू हो चुका है. यह कानून एक तरफ निवेशकों को निवेश सुरक्षा देगा तो दूसरी तरफ राज्य में निवेश के लिए शांत और सुरक्षित वातावरण तैयार करेगा.
सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से कहा है कि बंगाल में पलायन को रोकना बहुत जरूरी है. बंगाल से पलायन तभी रूक सकता है, जब यहां के श्रमिकों को काम करने का अवसर मिलेगा. उन्हें उचित मजदूरी मिलेगी. इसके अलावा शांत और सुरक्षित वातावरण का होना जरूरी है. राज्य सरकार ने सभी मुद्दों और व्यवस्थाओं के लिए काम करना शुरू कर दिया है. राज्य सरकार 15 अगस्त को नई औद्योगिक नीति ला रही है.
सरकार की यह नयी औद्योगिक नीति निवेश केंद्रित सुधारो, पारदर्शी व्यवस्था और आधुनिक औद्योगिक ढांचे पर आधारित होगी. राज्य में उद्योग धंधों के विकास के लिए उद्योगों को प्रोत्साहन देने की नीति पर मजबूती से काम करने की जरूरत होगी. राज्य के वित्त मंत्री स्वप्न दास गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार की कोशिश होगी कि राज्य में उद्योग विकास के लिए सभी मानदंडों को पूरा किया जाए. भाजपा सरकार की ओर से उद्योग मंत्री तापस राय कहते हैं कि उनकी सरकार बंगाल को 2027 तक देश के प्रमुख औद्योगिक केन्द्रों में विकसित करने का लक्ष्य हासिल कर सके, इसके लिए सरकार कृत संकल्प लाता है
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की नई उद्योग नीति में 100 करोड रुपए से अधिक के निवेश वाली परियोजनाओं के लिए भूमि स्वीकृति की सिंगल विंडो व्यवस्था, GIS आधारित डिजिटल लैंड बैंक तथा उद्योगों को मिलने वाले प्रोत्साहन के स्पष्ट मानदंड शामिल किए जा रहे हैं. राज्य सरकार राज्य में निवेश को आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन केवल निवेश राशि के आधार पर नहीं बल्कि उद्योग द्वारा सृजित रोजगार के आधार पर भी तय करेगी.
राज्य सरकार पहले ही औद्योगिक विकास को गति देने के लिए भूमि नीति में बदलाव की दिशा में कदम उठा चुकी है. शहरी भूमि सीमा कानून को समाप्त करने की योजना पर भी काम चल रहा है. जिस तरह से राज्य सरकार की योजना है,अगर उसका ठीक तरह से क्रियान्वयन किया जाता है तो निश्चित रूप से उत्तर बंगाल और राज्य के दूसरे इलाकों में भी बड़े निवेश आएंगे. इससे राज्य से युवाओं का पलायन रुकेगा. यहां के युवाओं की भी मांग है कि उन्हें महीने में ₹3000 बेरोजगारी भत्ता नहीं चाहिए, बल्कि काम चाहिए.

