पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 1 सितंबर 2026 से सरकारी कार्यालयों में बंगाली भाषा के साथ अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के उपयोग को बढ़ावा देने की घोषणा के बाद दार्जिलिंग, तराई और डुआर्स के नेपाली भाषी समाज में कई तरह की आशंकाएं पैदा हो गई थीं। लोगों के मन में सवाल उठने लगे थे कि कहीं प्रशासनिक व्यवस्था में नेपाली भाषा की भूमिका कम तो नहीं हो जाएगी। ऐसे समय में दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट एक बार फिर जनता की आवाज़ बनकर सामने आए और उन्होंने बिना देर किए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से सीधे संवाद कर पूरे मामले पर स्पष्टता हासिल की।
सांसद राजू बिष्ट ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि मुख्यमंत्री से हुई विस्तृत बातचीत में उन्हें स्पष्ट आश्वासन मिला है कि पश्चिम बंगाल में नेपाली भाषा को वही सम्मान, पहचान और अधिकार मिलता रहेगा, जो संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को प्राप्त है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार का उद्देश्य किसी भाषा को कम या ज्यादा महत्व देना नहीं, बल्कि बंगाली के साथ-साथ नेपाली सहित सभी क्षेत्रीय भाषाओं को प्रशासनिक व्यवस्था में उचित स्थान देना है।
राजू बिष्ट ने कहा कि दार्जिलिंग पहाड़, तराई और डुआर्स की पहचान केवल उसकी प्राकृतिक सुंदरता से नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध नेपाली भाषा, संस्कृति और विरासत से भी है। राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि इस पहचान को किसी भी स्थिति में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। प्रशासनिक कार्यों में नेपाली भाषा के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि स्थानीय लोगों को अपनी मातृभाषा में सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सके।
सांसद ने कहा कि यह केवल भाषा का विषय नहीं, बल्कि लाखों नेपाली भाषी नागरिकों के सम्मान, आत्मसम्मान और संवैधानिक अधिकारों का प्रश्न है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर विश्वास न करें, क्योंकि सरकार ने साफ कर दिया है कि नेपाली भाषा के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं।
मालूम हो की जब-जब दार्जिलिंग संसदीय क्षेत्र की जनता के सामने कोई चुनौती आई है, उन्होंने हमेशा सबसे पहले जनता की आवाज़ को सरकार तक पहुंचाने का कार्य किया है। चाहे भाषा और संस्कृति का मुद्दा हो, क्षेत्रीय विकास हो या आम लोगों की समस्याएं—उन्होंने हर विषय पर सक्रियता के साथ पहल की है और समाधान सुनिश्चित करने का प्रयास किया है।
प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी सांसद राजू बिष्ट लगातार प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे, राहत कार्यों को तेज कराने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर समन्वय स्थापित किया तथा लोगों की सहायता के लिए हरसंभव प्रयास किए। बेली ब्रिज के निर्माण को गति दिलाने से लेकर माटीगाड़ा–सेवक फोर लेन और सिक्स लेन परियोजना जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। इन परियोजनाओं ने न केवल क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत किया, बल्कि विकास की नई संभावनाओं के द्वार भी खोले।
सांसद ने कहा कि नेपाली भाषा को आठवीं अनुसूची में प्राप्त संवैधानिक मान्यता केवल एक कानूनी अधिकार नहीं, बल्कि करोड़ों नेपाली भाषी लोगों की पहचान का प्रतीक है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे भविष्य में भी नेपाली भाषा, संस्कृति और दार्जिलिंग, तराई एवं डुआर्स के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर मजबूती से आवाज़ उठाते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति का उद्देश्य केवल विकास कार्य कराना नहीं, बल्कि हर समुदाय, हर भाषा और हर नागरिक को समान सम्मान दिलाना है। सांसद ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार के इस स्पष्ट आश्वासन के बाद नेपाली भाषी समाज की सभी शंकाएं समाप्त होंगी और बंगाली के साथ-साथ नेपाली समेत सभी क्षेत्रीय भाषाओं को समान सम्मान और संरक्षण के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

