सिलीगुड़ी के प्रधान नगर थाना के मौजूदा आईसी बी डी सरकार हैं, जो अपनी कर्तव्य निष्ठा और ड्यूटी के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपनी पुलिस की अब तक की सेवा में कई मामलों को सुलझाया है. गरीब, वंचित और बेकसूर को न्याय दिलाया तथा दोषी लोगों को जेल भिजवाने से लेकर उन्हें सजा दिलवाने तक का भी काम किया है.
आज प्रधान नगर थाने के इस आईसी बी डी सरकार की चर्चा करना इसलिए जरूरी हो गया है कि आज से लगभग 18 साल पहले जब वह अलीपुरद्वार जिला के अंतर्गत एक थाने में SI के पद पर तैनात थे, तो उसी समय उन्होंने एक मजबूर और पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलाने के लिए स्वयं भाग दौड़ करके दोषी के खिलाफ मजबूत केस बनाया. उसके खिलाफ पुख्ता साक्ष्य और गवाह एकत्र किए तथा निर्धारित समय के भीतर चार्जशीट तैयार करके न्यायालय में प्रस्तुत किया.
उन्हीं की प्रस्तुत की गई चार्जशीट पर अदालत ने इंसाफ की मांग कर रहे पीड़ित पक्ष को न्याय देते हुए दोषी व्यक्ति को आजीवन कारावास और अर्थ दंड की सजा सुनाई है, जिसकी सिलीगुड़ी में खूब चर्चा हो रही है. बी डी सरकार और इस मामले की चर्चा इसलिए भी शुरू हो गई है कि मुल्जिम के धमकाने के बाद पीड़ित पक्ष डरकर अपना घर छोड़कर दिल्ली चला गया था, जहां से बी डी सरकार ने पीड़ित को न्याय दिलाने का भरोसा देखकर वापस बुलाया और इंसाफ भी दिलाया है. आज देर से ही सही लेकिन पीड़ित को न्याय मिल चुका है.
यह कहानी शुरू होती है 18 साल पहले, जब अलीपुरद्वार जिले के अंतर्गत शामुकतला थाना क्षेत्र के कोहिनूर ग्राम पंचायत के सालधुरा इलाके में स्थानीय निवासी कंचन महाली अपनी पत्नी सुधानी महली के साथ शामुकतला हाट से बाजार करके साइकिल पर घर लौट रहे थे. शाम हो रही थी. अचानक ही रास्ते में सुपौल महाली टकरा गया. उसने कंचन महाली और उनकी पत्नी सुधानी महाली का रास्ता रोक दिया. कंचन और सुपौल में कहासुनी होने लगी. देखते देखते बात इस कदर बढ़ गई कि सुपौल महाली ने अपने पास रखे भुजाली से कंचन महाली पर हमला कर दिया और उन्हें मौत के घाट उतार दिया.
सुदानी महाली ने अपनी आंखों के सामने अपने पति को तड़प कर मरते देखा था. इस घटना के बाद सुदानी पति के वियोग में अर्द्ध विक्षिप्त सी हो गई थी. स्थानीय लोगों, पुलिस सूत्रों तथा घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वास्तव में सुपौल महाली सुदानी से एक तरफा मोहब्बत करता था. वह अक्सर उसे धमकियां दिया करता था. लेकिन सुदानी अपने पति के सिवा किसी गैर मर्द को नहीं चाहती थी. वह सुपौल से दूर-दूर रहती थी.
जब सुदानी उसकी नहीं हो सकी तब सुपौल ने एक खतरनाक योजना बनाकर उसके पति को ही मौत के घाट उतार दिया. यह घटना 22 अगस्त, 2008 की है. इस घटना के बाद सुदानी महाली अपने रिश्तेदारों को लेकर शामुकतला थाना पहुंची. थाने में एस आई बीडी सरकार ड्यूटी पर थे. सुदानी महाली ने उन्हें घटना के बारे में बताया. इसके बाद बीडी सरकार के निर्देश पर सुदानी ने थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर सरकार और उनकी पुलिस टीम ने तत्काल आरोपी को गिरफ्तार कर लिया.
इस मामले की जांच के अधिकारी बी डी सरकार बनाए गए. उन्होंने प्रारंभिक इन्वेस्टिगेशन के बाद इस मामले को भारतीय दंड विधान की धारा 302 व अन्य धाराओं के तहत पंजीकृत कर लिया और दोषी को दंड और पीडित पक्ष को इंसाफ दिलाने की अपनी मुहिम में जुट गए. इस घटना के बाद बताया जा रहा है कि आरोपी सुदानी महाली को जान से मारने की धमकियां दे रहा था. वह सुदानी से केस वापस लेने की धमकी दे रहा था. डर के कारण सुदानी दिल्ली चली गई और लंबे समय तक वह दिल्ली में ही रही.
बाद में इस मामले की विवेचना अधिकारी बी डी सरकार ने कानूनी दाव पेच और औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए सुदानी महाली का पता लगाया और उसे दिल्ली से वापस बुलाया. विभिन्न कारणों से मुकदमे की सुनवाई में काफी विलंब हुआ. कानूनी प्रक्रिया पूरी करने और लंबी सुनवाई में लगभग 18 साल लग गए.
बी डी सरकार के लिए यह आसान कतई नहीं था. मुख्य गवाह और मृतक की पत्नी सुदानी महाली की रक्षा, आरोपी को सलाखों के पीछे भेजना, आरोपी के आतंक से पीड़ित और गवाहों की रक्षा करना, उसके खिलाफ सबूत और साक्ष्य जुटाना आसान नहीं था. जिसमें पुलिस को काफी समय लग गया. काफी समय तक इस केस की वादिनी सुदानी महाली गायब रही. इस वजह से भी मामले की सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी.
सरकारी पक्ष के वकील अमरेंद्र नाथ राय ने बताया है कि इस मामले में कुल 13 गवाहों ने अपने बयान दर्ज कराए थे. सभी सबूत और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया. अलीपुरद्वार जिला अदालत की अतिरिक्त जिला एवं सत्र फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सुपौल महाली को दोषी करार देते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई. कोर्ट ने मुल्जिम सुपौल महाली पर 5000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना नहीं भरने पर उसे एक महीने की अतिरिक्त जेल सजा काटनी होगी.
