एशिया का सबसे बड़ा स्लम एरिया मुंबई का धारावी माना जाता है. धारावी की गलियां भूल भुलैया की तरह हैं. कहते हैं कि धारावी में वह होता है, जो कहीं नहीं होता है. अपराध, नशे का कारोबार और अपराधियों की शरण स्थली के रूप में कुख्यात धारावी को फिल्मों में भी दिखाया गया है . यहां दिन दहाड़े अपराध होते हैं. यहां अक्सर पुलिस का रेड पड़ते देख सकते हैं.
मुंबई के धारावी की बरबस याद दिलाता सिलीगुड़ी के वार्ड नंबर 7 स्थित कोयला डिपो का एरिया भी कुछ कम नहीं है. झंकार मोड, वर्धमान रोड, विवेकानंद रोड, डांगीपाडा और रेलवे लाइन से घिरा यह एरिया शुद्ध वायु और स्वच्छ वातावरण से महरूम रहता है. इस क्षेत्र में एक गली से प्रवेश करके दूसरी गली से निकलना आसान नहीं होता है. एक अनजान व्यक्ति गली में प्रवेश करके भूल भुलैया की तरह ही रास्ता भटक सकता है. यहां छोटे-छोटे मकानो॔ में रहने वाले गरीब, मेहनतकश लोग, छोटे-छोटे काम करके गुजारा करने वाली महिलाएं मिल जाती हैं. इन दिनों इस क्षेत्र में रहने वाले शांतिप्रिय स्त्री पुरुष, घर के मालिक, माता-पिता काफी परेशान हैं.
स्थानीय लोगों, पीड़ित व्यक्तियों, पुलिस व अन्य सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सिलीगुड़ी का यह क्षेत्र नशा और नशेड़ियों का आतंक काट रहा है. स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां के नौजवान नशे की गिरफ्त में आ गए हैं. यहां नशे के कारण ही आए दिन अपराध की घटनाएं भी घटती हैं. यहां रहने वाले लोगों को रात में नींद नहीं आती है. घर-घर में लड़ाई झगड़ा, मारपीट, खून खराबा आदि देखे जाते हैं
इन सभी का कारण नशा ही है. यहां के लोगों ने बताया कि यहां घर-घर में नशेड़ी बच्चों को देख सकते हैं. जो गरीब हैं और जिनके घर में खाने को कुछ नहीं है, वे बच्चे भी डेंड्राइट का नशा करते हैं. इसके अलावा हेरोइन, गांजा, ड्रग्स जैसे नशीले पदार्थों की इन बंद गलियों में बिक्री खुलेआम होती है. यहां पुलिस रेड डालने तभी आती है, जब पुलिस के पास गंभीर शिकायत आती है. सूत्रों ने बताया कि कोयला डिपो के इस क्षेत्र में स्मगलिंग का धंधा तेजी से पसर रहा है. खासकर यहां ड्रग्स का धंधा तेजी से फल फूल रहा है.
कुछ लोगों ने बताया कि ड्रग्स का धंधा करने वाले एजेंट यहीं से पूरे सिलीगुड़ी में ड्रग्स का कारोबार कर रहे हैं. यहां छोटे-छोटे मकानों में रहने वाले गरीब माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं. वे चाहते हैं कि पुलिस यहां से नशे का कारोबार खत्म कर दे और अवैध नशा बिक्री पर रोक लगाए. ताकि नौजवान पीढी को बर्बाद होने से बचाया जा सके.
टीएमसी की सरकार में हालांकि सिलीगुड़ी मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने नशे के खिलाफ अभियान तो चलाया था, मगर यह कामयाब नहीं रहा. अब राज्य में सरकार बदल चुकी है और शुभेंदु अधिकारी की सरकार आरंभ से ही नशा और नशेड़ियों के खिलाफ पुलिस को कहर बनकर काम करने का निर्देश दे चुकी है. स्थानीय 7 नंबर वार्ड के निवासियों की लगातार मिल रही शिकायत के बाद खालपारा आउटपोस्ट की पुलिस ने कोयला डिपो एरिया में नशा और नशेड़ियों के खिलाफ दबिश की कार्रवाई की.
आज सिलीगुड़ी नगर निगम के अंतर्गत 7 नंबर वार्ड कोयला डिपो के एरिया में जिस तरह से खालपाड़ा पुलिस और केंद्रीय बल नशा और नशेड़ी-तस्करो के खिलाफ सांप की तरह टेढी मेढी, दमघोंटू व संकीर्ण गलियों में घूमते हुए छोटे-छोटे दरबेनुमा मकानों पर दबिश डाल रहे थे, तो यहां के लोग यही गुहार लगा रहे थे कि क्षेत्र की शांति के लिए पुलिस यहां से नशा उन्मूलन को प्राथमिकता दे.
यह कई घरों को बर्बाद कर रहा है. हालांकि कोयला डिपो के इस ‘धारावी’ क्षेत्र से गुजरते हुए पुलिस को नशेड़ियों को गिरफ्तार करने में कोई बड़ी कामयाबी तो नहीं मिली है, पर सूत्र बताते हैं कि यहां बंद गलियों में नशे के कारोबारी अड्डों का सुराग पुलिस को मिल चुका है. सब देखकर अचानक ही मुंबई की धारावी की याद ताजा हो गई. हालांकि कोयला डिपो का यह क्षेत्र धारावी तो नही है, पर यहां की गलियां इतनी संकीर्ण और पतली है कि आडे तिरछे होकर ही निकल सकते हैं.
और जो स्थान मुंबई के धारावी का भ्रम उत्पन्न करे, वहां से असामाजिक, अनैतिक और गैर कानूनी धंधों को रातों रात सफाया कर देना शायद पुलिस के लिए आसान नहीं होगा. हालांकि पुलिस ने एक ठोस रणनीति बनाकर काम करना शुरू कर दिया है. इसलिए अंधेरे में भी उम्मीद की किरण नजर आ रही है.

