May 6, 2026
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बंगाल जीता! एक बार फिर बंगाल ने ‘स्थिर सरकार’ की परंपरा को कायम रखा!

पूरे देश में बंगाल ही एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां आजादी के बाद से अब तक राज्य के लोगों ने हंग असेंबली अथवा गठबंधन की सरकार को नहीं चुना. बल्कि जिस पार्टी को जिताया और सरकार बनाई तो दिल खोलकर वोट दिया. यहां एक तरफा जनादेश की परंपरा कोई आज की नहीं है. बल्कि आजादी के बाद से ही चली आ रही है. बंगाल ने एक बार फिर से भाजपा को एक तरफा जनादेश देकर अपनी बांग्ला परंपरा और संस्कृति की रक्षा की है.

भारत की आजादी के बाद राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी. कांग्रेस ने कई वर्षों तक बंगाल पर शासन किया और अपना दबदबा बनाए रखा. उस समय विपक्ष काफी कमजोर था. राज्य की सत्ता कांग्रेस के पास सिमटी रही. यहीं से राज्य में एक तरफा जनादेश और राजनीति में स्थिर सरकार का दौर शुरू हुआ.

कांग्रेस के पतन के बाद 1977 में वाम मोर्चा सत्ता में आया. वाम मोर्चा ने राज्य की सत्ता में 34 सालों तक शासन किया था. पहली बार वाम मोर्चा के सत्ता में आने के बाद राजनीति का नया दौर शुरू हुआ. वाम मोर्चा ने बंगाल पर 34 वर्षों तक शासन किया. 7 बार चुनाव हुए और सातों बार वामोर्चा को भारी सफलता मिली. यहां हंग असेंबली कभी नहीं बनी.

इसके बाद 2011 में वाममोर्चा सत्ता से बाहर हुआ. टीएमसी का शासन 2011 से शुरू हुआ. राज्य की जनता ने टीएमसी को स्पष्ट बहुमत देकर राज्य की सत्ता सौंपी थी. टीएमसी ने 2016 और 2021 के चुनाव में भी भारी बहुमत हासिल किया. 2026 के चुनाव में भी बंगाल की जनता ने बीजेपी को स्पष्ट जनादेश देकर इस परंपरा को कायम रखा है.

इस तरह से बंगाल में कभी भी गठबंधन की सरकार नहीं बनी. मतगणना से पहले हालांकि कई राजनीतिक विश्लेषकों ने राज्य में गठबंधन अथवा हंग असेंबली की परिकल्पना की थी. पर बंगाल ने इसे झुठला दिया और भाजपा को स्पष्ट जनादेश दिया है. जानकार मानते हैं कि इसके पीछे विकास और जनकल्याण की जनभावना रही है.

बंगाल के लोग बुद्धिजीवी होते हैं. उन्हें पता है कि एक स्थिर सरकार ही लोगों की समस्याओं का समाधान कर सकती है. आमतौर पर गठबंधन की सरकार 5 साल पूरा नहीं कर पाती है और गठबंधन की सरकार में जनता का काम कम और आपसी खींचतान ज्यादा होती है. यह अनुभव ही बंगाल को देश के दूसरे प्रदेशों से सर्वोच्च सीढ़ी पर रखता है.

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