अब ज्यादा समय नहीं रह गया है. अगर आपके बच्चे प्राइमरी स्कूल में पढ़ाई कर रहे हो तो उनके भोजन की चिंता छोड़ दीजिए और यह मत सोचिए कि पिछली सरकार की तरह ही आपके बच्चे को कुपोषण वाला मिड डे मील दिया जाएगा. इसी तरह से अगर आपका कोई मरीज किसी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती हो तो उसके खाने की टेंशन मत ले. सरकार आपके रोगी की डाइट पर पूरा ध्यान देगी. मरीज जो खाएगा, अस्पताल को खिलाना होगा. आपको घर से भोजन तैयार करके अस्पताल ले जाने की जरूरत नहीं.
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी लगातार एक पर एक धमाके करते जा रहे हैं. सत्ता में आए 100 दिन भी नहीं हुए कि अधिकारी सरकार ने अपनी पार्टी के घोषणा पत्र के एक-एक संकल्प को पूरा करने की दिशा में सक्रियता बढ़ा दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें ऊर्जावन मुख्यमंत्री कहा है.
पिछली तृणमूल कांग्रेस की सरकार में स्वास्थ्य और शिक्षा का हाल संतोष जनक नहीं था. प्राइमरी स्कूलों में बच्चों को मिड डे मील के रूप में जो आहार उपलब्ध कराया जाता था, वह पौष्टिक नहीं होता था. आमतौर पर बच्चों को खिचड़ी, सोयाबीन और अंडे दिए जाते थे. यह बच्चों के पोषण के अनुकूल नहीं था. कई बार तो बच्चों को अंडे मिलते ही नहीं थे. फल मूल से भी उन्हें महरूम रखा जाता था. राज्य में सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस पर ध्यान दिया है.
पिछली टीएमसी सरकार में सरकारी अस्पतालों में भर्ती रोगियों के लिए आहार की जो व्यवस्था होती थी, वह रोगियों के पोषण के अनुकूल नहीं होती थी. यही कारण था कि बहुत से रोगी अस्पताल का खाना न खाकर अपने रिश्तेदारों या परिजनों द्वारा घर से ले जाए गए खाना को ही खाते थे. कई बार आरोप भी लगा. इसके साथ ही रोगी के इलाज से लेकर अन्य सफाई प्रबंधों पर भी उतना ध्यान नहीं दिया जाता था. भाजपा की ओर से आरोप लगाया गया है कि मोटे तौर पर टीएमसी की सरकार में रोगी का प्रबंधन अच्छा नहीं था.
दरअसल इसका कारण भी था. पिछली टीएमसी सरकार ने राज्य के स्वास्थ्य और शिक्षा तथा पोषण पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था और बजट उसके अनुकूल नहीं रखा था. खासकर स्वास्थ्य पर सरकार का बजट अपेक्षित नहीं था. यह सभी आरोप हैं. रोगियों के भी और भाजपा की ओर से भी पिछली सरकार पर आरोप लगाए गए हैं. स्वयं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी की सरकार में इन दोनों ही मुद्दों पर ममता बनर्जी को घेरा था और कहा था कि प्राइमरी स्कूल के बच्चे कुपोषण के शिकार होते जा रहे हैं. इसी तरह से रोगियों के लिए अस्पताल द्वारा उपलब्ध कराए गए भोजन की भी उन्होंने आलोचना की थी.
सत्ता में आने के बाद सुवेंदु अधिकारी की सरकार ने दोनों ही मुद्दों पर फोकस किया है. मुख्यमंत्री अधिकारी ने एक तरफ सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के भोजन के बजट में लगभग दोगुना वृद्धि कर दी है तो दूसरी तरफ प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के मिड डे मील के दैनिक बजट को बढा दिया है. अब प्राइमरी स्कूल के बच्चों के लिए मिड डे मील का बजट ₹6.78 प्रति छात्र से बढ़ाकर ₹10 प्रति छात्र कर दिया है. इसी तरह से उनकी सरकार ने सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के भोजन के दैनिक बजट को लगभग दोगुना कर दिया है.
इसके अनुसार अब प्रति मरीज दैनिक भोजन पर 110 रुपए खर्च किए जाएंगे. जो पहले 56. 64 पैसे होते थे. जाहिर है कि सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को अब पहले से ज्यादा अच्छा और गुणवत्ता पूर्ण खाना खाने को मिलेगा. सरकार का यह नया आदेश 1 अगस्त 2026 से लागू हो जाएगा. इस संबंध में राज्य सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग की ओर से एक नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है और सभी संबंधित इकाइयों को सूचित कर दिया गया है.
आपको बताते चलें कि सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के खाने से लेकर मिड डे मील बजट महंगाई के हिसाब से बढ़ाने को लेकर कोलकाता हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही थी. कोलकाता हाई कोर्ट के एक आदेश के बाद संबंधित मामलों की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया था. इस समिति ने जून में खाद्य पदार्थों की मौजूदा बाजार कीमतों और महंगाई का पुनरीक्षण किया था. इसके बाद समिति ने जो सिफारिश की थी, बंगाल सरकार ने उसे मान लिया है और बाकायदा उसकी मंजूरी भी दे दी है. अब 1 अगस्त से सरकारी स्वास्थ्य केदो में भर्ती मरीजों को बढे हुए बजट के अनुसार ही हेल्दी डाइट मिलेगा.
मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के इस फैसले को ऐतिहासिक और जन केंद्रित कदम बताया है. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह टिप्पणी की है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार के द्वारा उठाए गए ये कदम एक तरफ जहां सरकारी अस्पतालों में भर्ती गरीब रोगियों को राहत देगा, तो दूसरी तरफ प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले गरीब बच्चों को भी कुपोषण से मुक्त रखने में सहायता करेगा.अब रोगियों और अभिभावकों को 1 अगस्त 2026 का बेसब्री से इंतजार है!
