April 25, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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बाहर ‘ठेका’ बंद है तो क्या, घर का ‘ठेका’ तो खुला ही है!

कभी सिनेमा हॉल पर टिकट के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती थी. उसी तरह से शुक्रवार सुबह जब शराब की दुकान खुली तो लोग शराब लेने के लिए ठेके पर भीड़ करने लगे. आज सुबह में भी ऐसा ही नजारा देखा गया. जलपाईमोड़ के एक ठेके पर एक व्यक्ति ने झोले में भरकर बीयर और शराब की बोतल ली. उसने हंसकर बताया कि एक बार फिर से ठेके चार दिनों के लिए बंद हो रहे हैं इसलिए उसने चारों दिन के लिए स्टॉक कर लिया है.

सिलीगुड़ी में अधिकांश पीने वालों ने ऐसा ही किया है. इधर-उधर से पैसे लेकर लोगों ने चार दिनों का स्टॉक घर में ही उपलब्ध कर लिया है. इसलिए अब उन्हें मन मसोस नहीं करना पड़ेगा. जब भी पीने की तलब होगी, घर के ठेके से काम चला लेंगे. दो दिनों में सिलीगुड़ी में रिकॉर्ड तोड़ शराब की बिक्री हुई है.

केवल सिलीगुड़ी ही नहीं, बल्कि सभी जगह कुछ ऐसा ही आलम है. अगर एक ठेके पर स्टॉक उपलब्ध नहीं हुआ तो अन्य ठेकों से बोतलें हासिल की गयी हैं.मसलन कि कहीं ना कहीं से चार दिनों के लिए स्टॉक जो जमा करना था. चुनाव आयोग के निर्देशानुसार शाम से ठेके बंद कर दिए गए. लेकिन लोगों को कोई चिंता नहीं.

उन्होंने घर में ही बोतल जमा कर ली है. अब पीने की इच्छा हो गई, तो पहले की तरह इच्छा को कुचलना नहीं होगा. शराब घर में उपलब्ध है. पहले चरण के चुनाव में चुनाव आयोग ने एकाएक फैसला लिया था. लोगों को समय नहीं मिला और जब उन्हें चुनाव आयोग के फैसले का पता चला, तब तक ठेके बंद हो चुके थे.

इस बार ऐसा नहीं हुआ है. मानो चुनाव आयोग ने पीने वालों को पहले से ही अलर्ट कर दिया. दूसरे दौर का ठेका बंद करने से पहले लोगों को समय मिल गया. इसलिए उन्होंने जमकर खरीदारी की. सिलीगुड़ी में चार दिनों की बंदी के बाद जैसे ही ठेके खुले, शराब लेने वालों की भीड़ लग गई. लोगों ने कार्टून और झोले में भरकर बीयर की बोतलों से लेकर देसी ठर्रा और अंग्रेजी सभी तरह की शराब खरीदी.

शराब की खरीदारी में वृद्धि का एक बड़ा कारण दूसरे दौर की बंदी की सूचना थी. आज से 29 अप्रैल तक शराब की दुकानें बंद रहेंगी.लिहाजा चार दिनों के लिए लोगों ने कोटा फुल कर लिया. हालांकि कई जगह ठेकों में स्टॉक की कमी की शिकायत भी सामने आई है. फिर भी बहुत से लोगों ने चार दिनों के लिए शराब अथवा बीयर की बोतले संग्रह कर ली है.

चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार एक व्यक्ति ₹10000 से अधिक की शराब नहीं खरीद सकता है. शनिवार को शाम 6:00 बजे के बाद दुकानें बंद हो गयी हैं. लोगों ने बताया कि उन्होंने चार दिनों के लिए अपना स्टॉक फूल कर लिया है. शुक्रवार से लेकर शनिवार शाम तक ठेकों में लोगों की जबरदस्त भीड़ देखी गई. इसके बाद ठेके 30 तारीख को ही खुलेंगे.

जिन्हें शराब पीने की लत लग चुकी है, उन्हें कहीं ना कहीं से शराब तो चाहिए ही. सूत्र बता रहे हैं कि पहले चरण के चुनाव के संदर्भ में चुनाव आयोग के फैसले के बाद शराब की दुकान बंद होने के दौरान ब्लैक में भी लोगों ने शराब खरीदी है. मिली जानकारी के अनुसार ₹50 से लेकर ₹500 तक महंगी शराब की बिक्री हुई है.

यह नजारा केवल सिलीगुड़ी का ही नहीं है. बल्कि सिलीगुड़ी से लेकर कोलकाता और पूरे बंगाल तक ऐसा ही देखा गया. शराब की भारी खरीददारी को देखते हुए आबकारी विभाग के अधिकारियों को लगता है कि डैमेज कंट्रोल हो गया है. हालांकि इसका कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. पर सूत्रों का मानना है कि केवल एक दिन में ही दार्जिलिंग जिला में लगभग ढाई करोड रुपए की शराब बिक्री हुई है.

बहरहाल यह कहा जा सकता है कि पहले चरण के दौरान बंद हुई शराब की दुकानों के कारण शराब नहीं मिलने के कारण शराब के तलबगारों की बेचैनी कम से कम दूसरे चरण की बंदी में नहीं दिखेगी.

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