May 6, 2026
Sevoke Road, Siliguri
प्रमुख हेडलाइंस और अपडेट्स

क्या SMC को भाजपा टेक ओवर करेगी? टीएमसी के कई पार्षदों के भाजपा में जाने की अटकलें तेज!

मीडिया खबरों में चल रही चर्चाओं के अनुसार सिलीगुड़ी नगर निगम के मौजूदा मेयर गौतम देव अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं. गौतम देव द्वारा मेयर पद छोड़ने की इच्छा केवल विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी की करारी हार का कारण मात्र नहीं है और ना ही सिलीगुड़ी विधानसभा चुनाव में उनकी स्वयं की करारी हार इसका प्रमुख कारण है.बल्कि इसके पीछे की वजह कुछ और है, जिससे गौतम देव काफी दुखी हैं.

आज गौतम देव सिलीगुड़ी नगर निगम दफ्तर नहीं जा रहे हैं. राज्य में भाजपा के बहुमत में आने के बाद से ही सिलीगुड़ी नगर निगम में सन्नाटा छाया हुआ है. निगम का काम नहीं हो रहा है. लोगों की शिकायत है कि कर्मचारी से लेकर पार्षद या दूसरे अधिकारी प्रशासनिक कार्यों में रुचि नहीं ले रहे हैं. विपक्ष टीएमसी के जिम्मेदार अधिकारियों और नेताओं पर हमला कर रहा है. विपक्ष का कहना है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो जनता का काम कैसे होगा? कैसे सिलीगुड़ी का विकास होगा?

जानकारों के अनुसार इसमें कोई शक नहीं है कि चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद टीएमसी के बड़े-बड़े नेता प्रशासनिक कार्यों में रुचि नहीं ले रहे हैं और पार्टी की हार के सदमे में डूबे हुए हैं. लेकिन गौतम देव की चिंता कुछ अलग है. दरअसल गौतम देव अपनी पार्टी के कुछ पार्षदों के पार्टी बदलने की आशंका से चिंतित है. उन्हें लगता है कि उनके कई पार्षद आने वाले समय में टीएमसी छोड़ सकते हैं और भाजपा के साथ जा सकते हैं.

सूत्र बताते हैं कि गौतम देव को अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं और पार्षदों से भितरघात मिला है. उन्हें हराने में उनके ही कई लोगों का हाथ है, जिनमें कुछ पार्षद भी शामिल हैं. ये वही पार्षद हैं जिनके बारे में राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्होंने कुछ दिन पहले चुपचाप कोलकाता भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी से मिलने गए थे. उन्होंने इच्छा व्यक्त की थी कि वे भाजपा से जुड़ना चाहते हैं.

हालांकि तब चुनाव में व्यस्त रहने के कारण सुवेंदु अधिकारी से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी थी. लेकिन सिलीगुड़ी के टीएमसी पार्षदों को संदेश दिया गया था कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद उनसे बातचीत की जा सकती है. सूत्र बता रहे हैं कि इस दल में टीएमसी के 15 पार्षद थे. गौतम देव को लगता है कि ऐसे पार्षद कभी भी पाला बदल सकते हैं और बीजेपी में जा सकते हैं.

राज्य में बीजेपी की सरकार बनने जा रही है. उधर मौका परस्त टीएमसी के नेता और पार्षद पाला बदलने की तैयारी में है. गौतम देव को इसकी भनक लग चुकी है. बहुत से टीएमसी के नेता जो पाला बदलने की तैयारी में है, उचित मौके का इंतजार कर रहे हैं. इसकी शुरुआत टीएमसी नेता पापिया घोष ने कर दी है. उन्होंने पिछले 15 सालों से पार्टी में रहकर उठाई गई जिल्लत और अपमान की भड़ास भी निकाली है. उन्होंने कहा है कि टीएमसी में उनकी जगह मात्र एक नौकर की तरह थी.

पापिया घोष ने कई ऐसी बातें बताई है जिसे सुनकर टीएमसी के नेताओं के दिमाग घूम गए हैं. पापिया घोष ने टीएमसी के राज में नदियों से उत्खनन, बालू तस्करी, सिंडिकेट, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा, पार्टी में योग्य और जमीनी नेताओं को दरकिनार करना, पार्टी में कारपोरेट कल्चर लाना, पार्टी का मूल उद्देश्य से भटक जाना इत्यादि कई मुद्दों पर बात करके पूरी पार्टी को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है. पापिया घोष ने कहा है कि अब समय आ गया है कि पार्टी को आत्ममंथन करना चाहिए.

पापिया घोष ने इसकी शुरुआत कर दी है. धीरे-धीरे दार्जिलिंग जिला तृणमूल के कई वरिष्ठ नेता खुलकर पार्टी की करारी हार को लेकर अपना विचार रखेंगे. पार्टी की नीतियों और नेतृत्व पर भी सवाल उठाना लाजिमी है. संगठन पर भी चोट पहुंचेगी. गौतम देव एक अनुभवी नेता है. उन्हें लगता है कि वह दिन दूर नहीं जब पार्टी के कई नेता और पार्षद हाई वोल्टेज ड्रामा कर सकते हैं. इसलिए वह दिन देखने से पहले ही गौतम देव मेयर पद से इस्तीफा देना चाहते हैं.

अब सवाल यह है कि अगर गौतम देव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया तो सिलीगुड़ी नगर निगम किसके सहारे चलेगी? ऐसी स्थिति में राज्य सरकार सिलीगुड़ी नगर निगम को टेकओवर कर सकती है. दूसरा विकल्प है कि टीएमसी का कोई अन्य पार्षद या डिप्टी मेयर कार्यवाहक के रूप में एसएमसी को चला सकते हैं. हालांकि यह मात्र औपचारिकता ही होगी.

2027 में सिलीगुड़ी नगर निगम का चुनाव होगा. लेकिन उससे पहले सिलीगुड़ी नगर निगम का बोर्ड टीएमसी के हाथों में रह पाता है या नहीं, यह देखना दिलचस्प होगा. वैसे राजनीतिक गलियारो में यह भी चर्चा है कि टीएमसी के पाला बदलने वाले कई पार्षद भाजपा में शामिल हो सकते हैं. ऐसे में भाजपा के पास पर्याप्त संख्या बल हो जाएगा और भाजपा अपना आकस्मिक बोर्ड गठन कर सकती है. हालांकि यह मात्र एक कयास है. वास्तविकता क्या होगी, यह किसी को पता नहीं है. लेकिन 9 तारीख को राज्य में भाजपा की सरकार के गठन के बाद सिलीगुड़ी नगर निगम के भविष्य पर पड़ी धुंध भी साफ हो जाएगी.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *