जिस तरह की स्थिति बन रही है और जिस तरह का संकेत नवान्न से मिल रहा है, उसे देखते हुए जून महीने में सरकार से ₹3000 अपने खाते में पाने की बाट देख रही महिलाओं को निराश होना पड़ सकता है. अन्नपूर्णा भंडार योजना की तो बात ही छोड़िए, उन्हें लक्ष्मी भंडार का भी पैसा मिले, ऐसा नहीं लगता है. क्योंकि बंगाल की नई भाजपा सरकार ने मान लिया है कि पूर्ववर्ती सरकार की लक्ष्मी भंडार योजना बिना सत्यापन के चल रही थी. पूर्व में योजना का लाभ उठा रहे लोग पकड़े जा रहे हैं.
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी की सरकार द्वारा शुरू की गई लक्ष्मी भंडार योजना के तहत पात्र महिलाओं के सत्यापन में लगभग 30 लाख लाभार्थियों को अपात्र बताया है. जो गलत तरीके से योजना का लाभ उठा रहे थे. सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि लक्ष्मी भंडार योजना की भी जांच होगी. ऐसे में जो महिलाएं जून महीने में सरकार से पैसे पाने की उम्मीद कर रही थी, उनकी उम्मीदों को भी झटका लग सकता है.
इससे पहले सुबेंदु अधिकारी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि उनकी सरकार की नई योजना अन्नपूर्णा भंडार योजना के सफल संचालन में कुछ वक्त लग सकता है. यह वक्त कम से कम 3 महीने का हो सकता है. सरकार ने कहा है कि अन्नपूर्णा भंडार योजना के तहत फार्म भरने की अवधि 3 महीने की होगी. यानी जून महीने से शुरू होने वाली यह योजना अगस्त तक चल सकती है. जब तक अन्नपूर्णा योजना पूरी नहीं हो जाती, तब तक राज्य की महिलाओं को लक्ष्मी भंडार के तहत पैसे ट्रांसफर किए जाते रहेंगे.
परंतु अब लक्ष्मी भंडार योजना की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठने लगे हैं. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि लक्ष्मी भंडार योजना की 2.20 करोड़ लाभार्थियों में से लगभग 30 लाख लाभार्थी इस योजना के पात्र नहीं है. उन्होंने दावा किया है कि 30 लाख संदिग्ध नाम की पहचान हुई है. जिनमें कई ऐसे लोग शामिल हैं जो या तो भारतीय नागरिक नहीं है या फिर जिनके नाम मतदाता सूची से स्थाई रूप से हटाए जा चुके हैं.
लक्ष्मी भंडार योजना के तहत राज्य की महिलाओं को हर महीने ₹1500 व ₹17000 की सहायता राशि टीएमसी की सरकार देती आई है. अप्रैल महीने तक महिलाओं के खाते में पैसे ट्रांसफर किए गए थे. लेकिन मई महीने में सरकार बदल जाने से उन्हें लक्ष्मी भंडार का पैसा नहीं मिला. सुवेंदु अधिकारी की सरकार ने कहा है कि जब तक भाजपा सरकार की नई योजना अन्नपूर्णा भंडार योजना का काम पूरा नहीं हो जाता है, तब तक राज्य की महिलाएं लक्ष्मी भंडार योजना के तहत नियमित राशि पाती रहेंगी. मुख्यमंत्री ने कहा था कि 3 जून को महिला लाभार्थियों के बैंक खाते में पहली किस्त की राशि हस्तांतरित की जाएगी.
परंतु अब लक्ष्मी भंडार योजना की जांच में लाभ उठा रहे कुछ पुरुष सदस्यों के सामने आने के बाद इस योजना की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठने लगे हैं. मुर्शिदाबाद जिले के बहरामपुर निवासी राकिबुल शेख से पुलिस ने गिरफ्तार किया है. उस पर आरोप है कि वह पिछले तीन सालों से लक्ष्मी भंडार योजना का पैसा ले रहा था. जबकि यह योजना महिलाओं के लिए है. राकिबुल ने स्वीकार किया है कि इस खेल में वह अकेला शामिल नहीं है. बल्कि उसके जैसे कई लोग वर्षों से इसका लाभ उठा रहे थे.
हालांकि राज्य सरकार ने अन्नपूर्णा योजना का फार्म जारी कर दिया है. किंतु उसे ऑनलाइन अभी तक जारी नहीं किया गया है. ऐसी चर्चा है कि सरकार 1 जून को पोर्टल लांच कर देगी. इस योजना का फॉर्म ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से भरा जा सकेगा. फार्म कुल 13 पन्नों का है. इस फॉर्म को नए आवेदक और पुराने आवेदक दोनों भरकर जमा करेंगे. पुराने आवेदक से यहां तात्पर्य है कि जो महिलाएं लक्ष्मी भंडार का पैसा पा रही थीं, उन्हें भी अन्नपूर्णा भंडार का फॉर्म भरना होगा.
उनके द्वारा भरे जाने वाले फार्म का सत्यापन होगा. यह सत्यापन निगम, पंचायत अधिकारी, बीडीओ आदि या बीएलओ के जरिए कराए जाएंगे, जो घर-घर जाकर लाभार्थियों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे. इस तरह से फार्म का सत्यापन होगा. तत्पश्चात ही महिलाओं को अन्नपूर्णा भंडार योजना का लाभ मिलेगा और इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम तीन-चार महीने का वक्त लग सकता है. इस तरह से यह कहा जा सकता है कि जून महीने में अन्नपूर्णा भंडार का पैसा मिलने की तो बात ही छोड़िए, लक्ष्मी भंडार का भी पैसा मिल जाए तो बड़ी बात होगी!
हालांकि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 3 जून से लक्ष्मी भंडार का पैसा महिलाओं के खाते में डीबीटी के जरिए ट्रांसफर करने की बात कही है, परंतु यह तभी संभव हो सकता है जब तक कि अधिकारी लक्ष्मी भंडार योजना की पूरी तरह जांच नहीं कर लेते. बहरहाल देखना होगा कि सरकार जून महीने में महिलाओं के खाते में लक्ष्मी भंडार का पैसा ट्रांसफर करती है या नहीं.
