June 2, 2026
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बंगाल में TMC को समाप्त करने की स्क्रिप्ट तैयार? किसी भी समय बड़ा खेला होने के मिलने लगे संकेत!

राजनीति में सब जायज है. यहां ना कोई दोस्त होता है ना दुश्मन. आंकडों का खेल और आंकड़ों के खेल का बाजीगर ही सबसे बड़ा राजनेता होता है. विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार क्या हुई, बाजी ही पलट गई है. ममता बनर्जी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनकी पार्टी का वजूद खतरे में है!

ममता बनर्जी को लगता है कि बीजेपी उनकी पार्टी तोड़ने की साजिश रच रही है. अगर उन्हें ऐसा लगता है तो इसमें आश्चर्य ही क्या. क्योंकि राजनीति में तो यह सब चलता ही है. ममता बनर्जी बीजेपी के खिलाफ कोलकाता से लेकर दिल्ली तक धरना देने वाली है. उन्हें अपनी पार्टी बचाने की चिंता बढ़ गई है. उन्हें आभास हो गया है कि बंगाल में महाराष्ट्र की तर्ज पर ही खेला हो सकता है.

याद करिए वर्ष 2022 के महाराष्ट्र को. राज्य में शिवसेना की संयुक्त सरकार थी. तब शिवसेना के ही एक मंत्री एकनाथ शिंदे ने पार्टी से बगावत कर दी और दर्जनों शिवसैनिकों के साथ ऐसा खेला खेला कि उद्धव ठाकरे के हाथों से ही सरकार और सियासत दोनों ही चली गई.

सूत्र बता रहे हैं कि कुछ इसी तरह की स्क्रिप्ट बंगाल में भी तैयार की जा चुकी है. ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी से टीएमसी के जिन दो विधायकों को निष्कासित किया था, उनमें से एक निष्कासित विधायक ॠतबरत बनर्जी हैं. ॠतबरत बनर्जी महाराष्ट्र के एकनाथ शिंदे बन गए हैं. ममता बनर्जी किसी भी तरह इस विरोध विद्रोह को दबाने की कोशिश में है

सूत्रों ने बताया कि बनर्जी और संदीपन साहा दोनों विधायकों ने कोलकाता स्थित विधायक हॉस्टल में टीएमसी के कई विधायकों से मुलाकात की है. जैसा कि आपको पता है कि टीएमसी के 80 में से 60 विधायक पहले ही ममता बनर्जी से दूरी बना चुके हैं. इन्हीं विधायकों से बनर्जी और संदीपन साहा दोनों मुलाकात कर रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार उनकी मुलाकात के मायने निकाले जा रहे हैं. हालात महाराष्ट्र की तरह टीएमसी के वजूद को समाप्त करने जैसा है.

बनर्जी और संदीपन साहा ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ पहले से ही मोर्चा खोल दिया है. टीएमसी के असंतुष्ट विधायकों से उनकी बढती नजदीकियां इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में टीएमसी में एक बड़ा घमासान हो सकता है. पार्टी के अधिकांश विधायक पार्टी छोड़ कर एक नई पार्टी बना सकते हैं. पश्चिम बंगाल में टीएमसी को तोड़ने के लिए महाराष्ट्र की तर्ज पर सियासी स्क्रिप्ट तैयार कर ली गई है. किसी भी समय टीएमसी के दर्जनों विधायक आर बनर्जी के नेतृत्व में एक नई पार्टी बना सकते हैं.

सूत्रों ने दावा किया है कि टीएमसी के लगभग 50 विधायक इन दोनों नेताओं के संपर्क में है. इन असंतुष्ट विधायकों को भाजपा का मौन समर्थन मिल रहा है. टीएमसी में इस विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब विपक्ष के नेता के समर्थन से जुड़े एक प्रस्ताव पर कुछ विधायकों के हस्ताक्षर जाली होने का आरोप लगाया गया. इस संदर्भ में एक मामला दर्ज किया गया था, जिसकी जांच सीआईडी कर रही है.

सूत्रों ने बताया है कि ॠत व्रत बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी के असंतुष्ट विधायक एक नया गुट बना सकते हैं और विधानसभा में बैठ सकते हैं. कोलकाता के सियासी गलियारों से चर्चा तो यह भी है कि यह सभी असंतुष्ट विधायक खुद को वास्तविक टीएमसी बताते हैं. जिस तरह से महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे ने अपनी दलील रखी थी, ठीक उसी तरह की दलील असंतुष्ट गुट की तरफ से विधानसभा स्पीकर के समक्ष रखी जा सकती है. हालांकि आधिकारिक तौर पर इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है.

कहीं सचमुच राज्य में इस तरह की स्थिति न बन सके, इसलिए ममता बनर्जी डरी हुई है और भविष्य की आशंकाओं को लेकर चिंतित है. पल-पल घटनाक्रम बदल रहे हैं. कब क्या हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है. हालांकि राजनीतिक विश्लेषक बंगाल में खेला होने को अवश्यंभावी घटना मान रहे हैं.

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