June 8, 2026
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सावधान! सिलीगुड़ी में भूकंप के झटके क्यों आते रहते हैं?

सिलीगुड़ी और उत्तर बंगाल में पिछली रात 11:06 पर आए भूकंप के झटकों ने एक बार फिर से लोगों को दहलाकर रख दिया है. यह तो गनीमत थी कि उस समय रिमझिम बरसात हो रही थी. इसलिए कई लोगों को इसकी अनुभूति भी नहीं हुई और जिन लोगों को इसकी अनुभूति हुई, उनमें तो हडकंप ही मच गया. भूकंप 5.6 तीव्रता का था. इसलिए झटके जबरदस्त थे. कुछ लोग कमरे से निकल कर बाहर आ गए और उनमें हिम्मत नहीं पड़ी कि दोबारा वापस कमरे में जाएं.

सिलीगुड़ी, जलपाईगुड़ी, कूच बिहार, अलीपुरद्वार आदि के लोगों ने अपने अलग-अलग अनुभव बताए हैं. किसी के घर का पंखा हिलने लगा, तो किसी का बेड. कुछ लोग समझ ही नहीं पाए. जबकि कई लोग ऐसे भी हैं जिन्हें कुछ महसूस ही नहीं हुआ. लेकिन एक बात तो साफ हो गई है कि भूकंप के झटके जबरदस्त थे. जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जिओ साइंस के अनुसार भूकंप का केंद्र भूटान में था और यह 10 किलोमीटर की गहराई में स्थित था. पिछली रात आए भूकंप के झटके कोलकाता में भी महसूस किए गए हैं.

भूकंप की भविष्यवाणी के लिए अलर्ट मैसेज ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं होता है. क्योंकि कई बार अलर्ट मैसेज के तुरंत बाद ही झटके आ जाते हैं. जैसा कि पिछली रात आए भूकंप में देखा गया. अलर्ट मैसेज के तुरंत बाद ही झटके आने लगे. कभी-कभी अलर्ट मैसेज और सतर्कता के बीच की अवधि शून्य हो जाती है, जहां व्यक्ति को संभलने का मौका ही नहीं मिलता है. हालांकि अलर्ट मैसेज से व्यक्ति संभल सकता है जरूर और अपना यथा संभव बचाव भी कर सकता है.

सिलीगुड़ी में बार-बार भूकंप के झटके आते रहते हैं. पिछले साल तो कई बार भूकंप के झटके लगे. इस साल यह पहला मौका है जब 5.6 तीव्रता का भूकंप आया और कई लोगों को दहला कर रख दिया. पड़ोसी देश बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, चीन तथा भारत में कहीं भी भूकंप होता है, तो सिलीगुड़ी में भूकंप के झटके जरुर महसूस किए जाते हैं. यहां तक कि अफगानिस्तान, तिब्बत आदि क्षेत्रों में भी भूकंप होता है तो भी यहां जरूर महसूस किया जाता है. वास्तव में सिलीगुड़ी भूकंप के दृष्टिकोण से एक संवेदनशील क्षेत्र है.

आखिर सिलीगुड़ी में बार-बार भूकंप के झटके लगना भविष्य के लिए क्या संकेत है? विशेषज्ञ लोगों को सावधान करते हैं और चेतने की सलाह देते हैं. कोई बड़ी गंभीर मुसीबत आने से पहले इसका संकेत किसी न किसी रूप में सामने आ ही जाता है. छोटे झटके बड़े झटके भी बन सकते हैं और जान माल का भारी नुकसान कर सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार यह भविष्य के लिए एक खतरनाक संकेत है. सिलीगुड़ी के निकट ही हिमालय क्षेत्र स्थित है जो भूकंप के लिए एक सक्रिय क्षेत्र माना जाता है. यहां हर समय भूगर्भीय हलचल होती रहती है. दूसरे में सिलीगुड़ी समेत उत्तर बंगाल का भवन स्ट्रक्चर ऐसा है कि भूकंप के भारी झटकों का सामना नहीं कर सकता है.

उत्तर बंगाल में कहीं भी आप चले जाइए. यहां की मिट्टी काफी भुरभुरी और बलुई है, जो भवन निर्माण के दृष्टिकोण से अच्छी नहीं मानी जाती है. इस मिट्टी में भवन की बुनियाद आमतौर पर कमजोर होती है. विशेषज्ञों के अनुसार इस स्थिति में भवन तैयार करते समय इंजीनियरों को भूकंप निरोधी भवन के डिजाइन पर विचार करना चाहिए और सही व कानूनी दिशा निर्देशों का पालन करते हुए बिल्डिंगों का निर्माण करना चाहिए. सिलीगुड़ी नगर निगम शहरी अथवा ग्रामीण क्षेत्रों में भवनों की जो स्थिति है, उनमें से कितने भवन या अपार्टमेंट भूकंप रोधी हैं, यह आप स्वयं ही विचार कर सकते हैं. यह स्थिति भविष्य के लिए अत्यंत खतरनाक है.

जब-जब भूकंप के झटके लगते हैं. शासन प्रशासन और विशेषज्ञ भी सक्रिय हो जाते हैं. लेकिन कुछ दिनों के बाद इस बात को भुला दिया जाता है. पर्यावरणविद प्रकृति के साथ चलने की सलाह देते हैं. विकास का मापदंड पर्यावरण के इतर नहीं हो सकता है. हालांकि सिलीगुड़ी प्रशासन अब इस दिशा में गंभीर होता जा रहा है. भवन निर्माण से लेकर भूकंप से जान माल के नुकसान से बचाव के कई नियमों को अनिवार्य किया जा रहा है. लेकिन प्राकृतिक आपदाओं का बचाव करने के लिए यह जरूरी है कि हम अनुकूल संगत प्रयास करें. जिस भवन में रहते हों, वहां सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य रूप से होना चाहिए.

यह तो बुनियादी बातें हैं. व्यक्ति को खुद के स्तर पर सजग रहना जरूरी है. भूकंप से बचाव के लिए सरकारी निर्देशों का पालन हर हालत में होना चाहिए. कोई भी प्राकृतिक आपदा हो, उसका धैर्य पूर्वक सामना करना चाहिए और घबराना नहीं चाहिए. अन्यथा मुसीबत बढ़ सकती है. भूकंप से बचाव के छोटे-मोटे नियम है. यह छोटे-छोटे नियम जान माल के बचाव के लिए काफी महत्वपूर्ण होते हैं.इस तरह से आप भूकंप के प्रति सजग रहकर अपना और जान माल का अच्छे तरीके से बचाव कर सकते हैं.

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