ऐसा प्रतीत होता है कि बंगाल की जनता ने कानून अपने हाथ में ले लिया है. टीएमसी के तथाकथित भ्रष्ट नेताओं, मंत्रियों, पंचायत प्रधान से लेकर पार्षदों को मुंह छुपाते भागना पड़ रहा है. कोलकाता से शुरू हुआ यह खेल अब सिलीगुड़ी तक पहुंच गया है. सिलीगुड़ी के निकट माटीगाड़ा एक नंबर ग्राम पंचायत प्रधान कृष्ण सरकार पर हिंसक भीड़ ने अंडे फेके तो आज सिलीगुड़ी नगर निगम के 46 नंबर वार्ड पार्षद दिलीप बर्मन भी स्थानीय लोगों के आक्रोश का शिकार बने. उन पर भी अंडे फेके गए हैं.
जलपाईगुड़ी और कूचबिहार के कई टीएमसी नेता अंडरग्राउंड हो चुके हैं. ऐसे तथाकथित भ्रष्ट टीएमसी नेताओं को एक तरफ जनता के आक्रोश का शिकार होना पड़ रहा है तो दूसरी तरफ पुराने मामलों में पुलिस उनकी दनादन गिरफ्तारी कर रही है. इस कारण टीएमसी के कई नेता अंडरग्राउंड हो गए हैं और नेपाल भागने की फिराक में है. खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नेपाल सीमा के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है, ताकि तथाकथित टीएमसी के भ्रष्ट नेता नेपाल के रास्ते विदेश भाग न सके. जहांगीर खान उर्फ पुष्पा की गिरफ्तारी के बाद पानी टंकी सीमा पर अतिरिक्त बल तैनात किया गया है.
पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार एक तरफ टीएमसी के तथाकथित भ्रष्ट नेताओं और अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई कर रही है तो दूसरी तरफ जनता स्वयं कानून हाथ में लेकर टीएमसी के भ्रष्ट नेताओं का हिसाब ले रही है. ऐसे टीएमसी नेताओं को या तो दौड़ा दौड़ा कर पीटा जा रहा है या फिर उन पर सड़े हुए अंडे फेके जा रहे हैं. पिछले दिनों की घटनाएं एक बानगी है. असली खेल अब शुरू हुआ है. कोलकाता से शुरू हुआ जनता का कानून अब सिलीगुड़ी तक पहुंच गया है. टीएमसी के कई संदिग्ध नेता और पार्टी कार्यकर्ता अंडरग्राउंड हो चुके हैं. अभिषेक बनर्जी का ज्यादातर समय दिल्ली में बीत रहा है.
एक तरफ बंगाल की भाजपा सरकार राज्य में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति सुदृढ़ कर रही है. पिछले दिनों सुबेंदु अधिकारी की सरकार ने राज्य में पारदर्शी शासन स्थापना के क्रम में कई आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया है. सिलीगुड़ी में भी कई पुलिस अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेवारी सौंपी गई है. दूसरी तरफ राज्य में सशक्त सरकार और विकास के लक्ष्य को पूरा करने के लिए मंत्रियों के विभागों का भी बंटवारा कर दिया गया है.सिलीगुड़ी से विधायक शंकर घोष को पर्यटन मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है.
उत्तर बंगाल से चार विधायक मंत्री बने हैं. उन सभी को पोर्टफोलियो सौंप दिया गया है. इन मंत्रियों में माटीगाड़ा नक्सलबाड़ी के विधायक आनंदमय बर्मन भी हैं, जिन्हें परिवहन व वित्त विभाग की जिम्मेदारी दी गई है. फालाकाटा के विधायक दीपक बर्मन को स्कूल शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. कुमार ग्राम के विधायक मनोज उरांव को पर्यावरण एवं वन विभाग का मंत्रालय सौंपा गया है. भाजपा सरकार राज्य का विकास करने के लिए कृत संकल्प है तो दूसरी तरफ राज्य में पारदर्शी शासन व्यवस्था के साथ ही टीएमसी के भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है.
राहत सामग्री चोरी के आरोप में पूर्व मंत्री उज्जवल विश्वास गिरफ्तार हो चुके हैं. हिंसक भीड़ ने उनके घर पर पत्थर और अंडे फेके हैं. पूर्व मंत्री उज्जवल विश्वास को नदिया के कृष्ण नगर से गिरफ्तार किया गया है. उनके घर पर भारी मात्रा में सरकारी राहत सामग्री बरामद होने की सूचना पर स्थानीय लोगों और भाजपा के समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा. उग्र भीड ने पूर्व मंत्री के घर पर धावा बोल दिया. जमकर तोड़फोड़ की और उन पर अंडे फेंके. ऐसे ऐसे कई उदाहरण उदाहरण हैं.
पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में टीएमसी के एक स्थानीय नेता श्रीकांत घोष को जनता ने सार्वजनिक रूप से माफी मंगवाकर कान पकड़कर उठक बैठक करायी. वर्तमान में टीएमसी के लिए स्थिति एकदम फिल्मी बन गई है. नेता तो नेता, टीएमसी के कार्यकर्ता भी अंडरग्राउंड हो चुके हैं. सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार सिलीगुड़ी और आसपास के क्षेत्र से ऐसे टीएमसी के नेता जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप थे, जनता के बीच नहीं देखे जा रहे हैं. आज स्थिति यह बन गई है कि टीएमसी का कोई भी भ्रष्ट नेता खुद को टीएमसी का नहीं बता रहा है.
टीएमसी से सभी अपना पिंड छुड़ा रहे हैं. ममता बनर्जी के साथ साए की तरह रहने वाली सयानी घोष भी ममता और टीएमसी से ब्रेकअप कर चुकी है. यह सब किसी फिल्मी कहानी जैसा लगता है. विश्वास नहीं लेकिन विश्वास तो करना ही होगा. यही है जनता का कानून जहां बंगाल की जनता भ्रष्ट नेताओं का पहले अपने तरीके से स्वागत करती है और फिर पुलिस और कानून के सुपुर्द कर देती है.
