June 29, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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दार्जिलिंग मोड़ से लेकर चंपासारी तक नशेड़ियों का बढ़ता आतंक!

जब मोहम्मद को नशे की तलब हुई तो वह बेचैन हो उठा. उसकी जेब में पैसे नहीं थे. दोस्तों से भी उधारी नहीं मिल सकती थी. क्योंकि उसके सभी दोस्त उसकी तरह ही नशेड़ी थे, जो अपने ही घर में चोरियां करके नशे की तलब शांत करते थे. मोहम्मद अपने घर में कई बार चोरी कर चुका था. वह मां के पास पहुंच गया. उसने उससे पैसे मांगे. लेकिन मां ने उसे पैसे देने से मना कर दिया. मोहम्मद अहमद ने वहीं पास में रखे लोहे का सरिया उठा लिया और मां के सिर पर दे मारा. सिलीगुड़ी में घटी यह घटना सुर्खियों में है.

सांझ ढलते ही सिलीगुड़ी के कई इलाकों में सड़क किनारे, गलियों में, राह चलते लड़खड़ाते या बेढंगा चलते, खुद में ही बातें करते हुए कुछ ऐसे लोग मिल जाएंगे, जिन्हें देखते ही आप समझ लेंगे कि उन्होंने नशा कर रखा है. गुरुंग बस्ती, प्रधान नगर, चंपासारी, चेक पोस्ट से लेकर दार्जिलिंग मोड, सिलीगुड़ी जंक्शन के कुछ इलाके, कुलीपाडा ,डांगीपाड़ा, रेल गेट, वार्ड नंबर 5 से लेकर मध्य सिलीगुड़ी के कई इलाकों में अक्सर शाम के समय ऐसे नजारों को आप देख सकते हैं. समाज के सभ्य लोग उनसे दूर ही रहते हैं. क्योंकि उनसे बातें करने का मतलब कहीं ना कहीं झगड़ा होना है.

आप पुलिस में उनकी शिकायत भी नहीं कर सकते हैं. वैसे भी पुलिस नशेड़ियों को ज्यादा समय तक गिरफ्तार करके नहीं रख सकती है. जेल से छूटने के बाद ऐसे लोग शिकायत करने वाले को सीधा निशाना पर ले लेते हैं. यही कारण है कि सभ्य और शांति प्रिय लोग डर कर रहते हैं. इसका फायदा नशेड़ी उठाते रहते हैं. हालांकि सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस सिलीगुड़ी में नशा और नशेडियों के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है. परंतु स्थिति पहले से कहीं ज्यादा ही विषम हुई है. सूत्रों ने बताया कि सिलीगुड़ी के नजदीक माटीगाड़ा का इलाका शुरू से ही ड्रग्स अथवा नशा का केंद्र बन चुका है. इन इलाकों में अपराधिक घटनाएं भी सर्वाधिक देखी जाती हैं.

जानकार मानते हैं कि आपराधिक घटनाएं उन्हीं इलाकों में सर्वाधिक होती हैं, जहां मादक द्रव्यों की सर्वाधिक बिक्री होती है और जिन इलाकों में नशेडियों की तादाद ज्यादा रहती है. ड्रग्स अथवा नशीली वस्तुओं के आदी लोग नशे की अवस्था में कुछ भी कर गुजरते हैं. क्योंकि नशे के कारण उनका विवेक आमतौर पर मर चुका होता है. जब नशा हावी रहता है तो उन्हें अच्छे बुरे का कोई ज्ञान नहीं रहता है. जिन इलाकों में नशीले पदार्थों की बिक्री से लेकर नशेड़ियों का जमावड़ा ज्यादा होता है, वहां घरों में चोरियां और छोटे-मोटे कई अपराध होते रहते हैं. शाम होते ही नशेड़ियों का उत्पात शुरू हो जाता है. कभी-कभी तो वे स्वयं ही खाने पीने के दौरान आपस में उलझ पडते हैं, तो कभी घर में अपने स्वजनों से भिड़ जाते हैं.

सिलीगुड़ी में नशेड़ियों के उत्पात और उनके द्वारा आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने की कई घटनाएं घट चुकी है. आए दिन सिलीगुड़ी के किसी न किसी इलाके में नशा से संबंधित आपराधिक घटनाएं होती रहती हैं. पिछले दिनों सिलीगुड़ी के अशरफ नगर इलाके में एक नशेडी बेटे ने अपनी मां पर उस समय हमला कर दिया, जब मां ने बेटे को नशा के लिए पैसे देने से इनकार कर दिया. बेटे ने अपनी मां पर लोहे की छड़ से हमला करके उसे बुरी तरह घायल कर दिया. यह खबर सुर्खियों में है. हालांकि पुलिस ने आरोपी नशेड़ी बेटे मोहम्मद फरमद को गिरफ्तार करते जेल भेज दिया है.

सवाल है कि आखिर सिलीगुड़ी को नशेड़ियों से कैसे बचाया जाए. पुलिस पहले भी प्रयास कर चुकी है. ड्रग्स अथवा नशीली वस्तुओं के खिलाफ पुलिस का अभियान ज्यादा सफल नहीं हुआ है. क्योंकि इस नेटवर्क में कुछ रसूखदार लोग जुड़े हुए हैं, जिनके खिलाफ पुलिस को कोई सबूत नहीं मिलता है. बीच वाले या मध्यस्थ लोग पकड़े जाते हैं तो उनकी जल्द ही जमानत भी हो जाती है. जमानत कराने वाले रसूखदार ही होते हैं. जो परदे के पीछे रहकर नशा नेटवर्क का संचालन करते हैं. जब तक पुलिस ऐसे लोगों को समाज के बीच नहीं लाती है, तब तक इस क्षेत्र में ड्रग्स के खिलाफ पुलिस का अभियान ज्यादा सफल होने की गुंजाइश नहीं है.

जहां तक सिलीगुड़ी के युवाओं को नशे की दलदल में जाने से बचाने का सवाल है तो ऐसे में पुलिस को उन इलाकों में सतर्क दृष्टि रखने की जरूरत है, जहां नशे की आपूर्ति होती है. शाम के समय कुछ दुकानों पर बैठे कुछ युवा आपस में गप करते हुए मिल जाएंगे. यहां ज्यादा संभावना है कि ड्रग्स या मादक पदार्थों की बिक्री होती है. चाय की दुकान पर भी कुछ ऐसा ही मंजर देख सकते हैं. दबिश की कार्रवाई करने से पहले पुलिस को इन स्थानों की पूरी जानकारी और सबूत प्राप्त करने में कोई ज्यादा दिक्कत नहीं आ सकती है.

प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ पुलिस को युवा चेतना और नशे के खिलाफ एक सशक्त अभियान चलाने की जरूरत है ऐसा अभियान केवल खाना पूरी करने के लिए नहीं होना चाहिए बल्कि उसकी वास्तविक धरातल पर उतरने की जरूरत है. नशे के आदी युवकों की काउंसलिंग भी जरूरी है. वैसे तो सिलीगुड़ी तथा आसपास के इलाकों में कई नशा मुक्ति केंद्र चल रहे हैं, पर सूत्र बताते हैं कि यहां नशेडियों के इलाज की आड़ में उनका मानसिक और आर्थिक शोषण ज्यादा होता है.

और आखिर में सिलीगुड़ी को नशे की दलदल में जाने से बचाने के लिए समाज के बुद्धिजीवी लोगों को भी सामने आने की जरूरत है. पुलिस और पब्लिक मिलकर ही नशे की जड़ पर चोट कर सकते हैं. अगर सिलीगुड़ी में नशा नियंत्रण का प्रयास सफल होता है तो यहां अपराध की घटनाएं भी कम होगी और सिलीगुड़ी की छवि भी निखरेगी. अगर ऐसा नहीं होता है तो आज नशे के लिए एक बेटा अपनी मां पर जानलेवा हमला कर देता है, कल स्थिति इससे भी ज्यादा भयंकर होगी और इसमें घर का घर तबाह हो सकता है!

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