June 29, 2026
Sevoke Road, Siliguri
प्रमुख हेडलाइंस और अपडेट्स

बंगाल के गुंडों पर गिरेगी गाज! विधानसभा में पास हुआ पब्लिक सेफ्टी बिल!

पश्चिम बंगाल की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने अपने घोषणा पत्र के एक और संकल्प को आज पूरा कर लिया है. विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह तक बंगाल के गुंडो को सबक सिखाने की बात कर चुके हैं. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने संबंधित विधेयक पब्लिक सेफ्टी बिल को पास कर दिया है. इस बिल में दंगों, हिंसा और एंटी सोशल एक्टिविटीज पर रोक लगाने के कड़े प्रावधान किए गए हैं.

द वेस्ट बेंगल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल of एंटी सोशल एक्टिविटीज बिल 2026 की कई विशेषताएं हैं, तो कुछ जटिलताएं भी हैं. इसमें बिना ट्रायल के 12 महीने तक प्रीवेंटिव डिटेंशन का प्रावधान है.मुख्यमंत्री सुबेंदु अधिकारी का दावा है कि इस कानून के जरिए राज्य में गुंडागर्दी, दंगा और हिंसा को रोकने में सफलता मिलेगी. यह विधेयक जो कानून बनेगा, इसमें कानून द्वारा घोषित गुंडा व्यक्ति को न केवल जेल भेजा जाएगा, बल्कि उसके द्वारा जितना भी नुकसान किया गया हो, उसकी संपत्ति को बेचकर वसूला जाएगा.

. मौजूदा कानून में हिंसा में सीधे अथवा किसी अन्य तरीके से शामिल लोगों से प्रॉपर्टी को हुए नुकसान का खर्च वसूलने का कोई प्रावधान नहीं है. जबकि नए बिल में वसूली का भी प्रावधान है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा है कि इस कानून का उद्देश्य उन लोगों पर लगाम लगाना है, जो समाज में डर, आतंक, हिंसा और अशांति फैलाते हैं.

विधेयक सदन में पारित जरूर हुआ है. लेकिन अब इस पर दोनों सदनों में बहस करायी जाएगी. जाहिर है कि विपक्ष विधेयक का विरोध करेगा. विपक्ष ने आरोप लगाना शुरू कर दिया है कि भाजपा सरकार इस कानून का इस्तेमाल राजनीतिक मकसद के लिए कर सकती है. भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के द्वारा कहा जा रहा है कि उनकी सरकार कानून का दुरुपयोग नहीं करेगी. उनका मकसद लोगों को सुरक्षा प्रदान करना और समाज में शांति और स्थिरता प्रदान करना है.

जो भी हो, विधेयक में प्रीवेंटिव डिटेंशन के जो प्रावधान दिए गए हैं, उनको लेकर राजनीति शुरू हो गई है. भाजपा सरकार दावा कर रही है कि इस विधेयक के कानून बन जाने से राज्य में कानून व्यवस्था मजबूत होगी. हालांकि इस बिल में कई ऐसे प्रावधान है जो बहस के विषय हो सकते हैं. बिल के कानून बन जाने के बाद बंगाल में असामाजिक गतिविधियों और हिंसा से जुड़े मामलों में पुलिस कार्रवाई का एक नया ढांचा तैयार होगा.

इस बिल के कानून बनने के बाद राज्य की पुलिस को भी कई अधिकार मिल जाएंगे, जो अब तक उन्हें नहीं मिले हैं. इस बिल में कुछ प्रावधान ऐसे हैं जहां अपराधों को दो कैटेगरी में रखा गया है. पुलिस को मिले अहम अधिकारों में ऐसे संबंधित मामलों में रेड करने, तलाशी अभियान चलाने ,घर का सामान जब्त करने, गिरफ्तारी आदि मामलों में पहले से ज्यादा अधिकार मिल गए हैं. इस बिल के प्रावधान के अनुसार उन लोगों पर भी कार्रवाई की जा सकती है जो किसी अपराधी को पनाह देते हैं.

आपको बताते चलें कि पश्चिम बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल of एंटी सोशल एक्टिविटीज बिल के प्रावधान की तुलना नेशनल सिक्योरिटी एक्ट से की जा रही है और यही कारण है कि इस पर राजनीतिक गहमागहमी बढती जा रही है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *