July 24, 2026
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बंगाल सरकार का फैसला मुसीबत है या राहत? जन्म- मृत्यु प्रमाण पत्र पर सीधा वार!

बंगाल सरकार के हाल में उठाए गए कुछ कदम, कुछ फैसले की चर्चा करना आवश्यक है. क्या सरकार ने जनता पर एक भाड़ बढ़ाया है या जनता को राहत दी है? क्या सरकार का यह फैसला सचमुच भ्रष्टाचार पर सीधा प्रहार है या जनता की जेब पर प्रहार है? यह तो पता नहीं. पर आने वाले समय में एक सन्नाटा पसरने वाला है. यह सन्नाटा कुछ इस तरह से होगा जैसे आंधी आने से पहले वातावरण में अजीब सी खामोशी छा जाती है.

ऐसा लगता है कि बंगाल सरकार ने पिछले कई सालों का सहेज कर रखा हुआ पिटारा एक-एक कर खोलना शुरू कर दिया है. इस पिटारे से निकलने वाली वस्तुएं उपभोक्ताओं को रुलाने वाली भी है तो राहत देने वाली भी है. चलिए जानते हैं कि बंगाल सरकार के फैसले से आप कितना प्रभावित होंगे. आपकी जेब से लेकर मानसिक और शारीरिक परेशानी धूप छांव की तरह ही आपको प्रभावित करेगी.

अभी तक आपके घर प्रत्येक 3 महीने पर बिजली बिल आता है, जो एक मोटी रकम होती है. कई कई बार उपभोक्ता एक साथ मोटी रकम का भुगतान नहीं कर पाते हैं. अब सरकार ने फैसला किया है कि हर महीने बिजली उपभोक्ताओं को बिल भेजा जाएगा. हालांकि प्रत्येक महीने बिल पाने के लिए आपको थोड़ा इंतजार करना होगा. मिल रही जानकारी के अनुसार जनवरी 2027 से हर महीने बिजली बिल आपके घर आएगा और आपको हर महीने बिजली बिल का भुगतान करना होगा.

लेकिन आप इस बिजली बिल में कोई अत्यधिक सब्सिडी अतिरिक्त सब्सिडी की अपेक्षा मत करिएगा अंतर सिर्फ इतना ही है कि एक साथ तीन महीने का भुगतान करते हैं उसे समय आपको सिर्फ एक महीने का ही भुगतान करना होगा हां किसानों के लिए सरकार ₹2 प्रति यूनिट अतिरिक्त सब्सिडी देने जा रही है लेकिन दूसरी खबर आपके लिए दुखदायी हो सकती है. सरकार स्मार्ट मीटर लगाने पर विचार कर रही है. हालांकि अभी तक सरकार की ओर से कहा गया है कि बस्ती इलाकों में या घरेलू उपभोक्ता के लिए यह अनिवार्य नहीं होगा.

परंतु सूत्र बता रहे हैं कि बाद में सरकार इसे अनिवार्य कर सकती है. इस स्थिति में स्मार्ट मीटर के भुक्तभोगी उपभोक्ता आसानी से समझ सकते हैं कि स्मार्ट मीटर की चाल आपकी जेब को कंगाल बना सकती है. यही कारण है कि जहां-जहां स्मार्ट मीटर लगाने की बात हो रही है, वहां इसको लेकर विरोध भी शुरू हो गया है. मिली जानकारी के अनुसार सभी सरकारी दफ्तरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में सरकार अनिवार्य रूप से स्मार्ट मीटर लगाने पर अडी हुई है.

इसको लेकर all बंगाल इलेक्ट्रिसिटी कंज्यूमर association विरोध में उतर गई है. सिलीगुड़ी में संगठन की ओर से विरोध शुरू कर दिया गया है. आने वाले समय में इसका पुरजोर विरोध हो सकता है. 23 जुलाई को सिलीगुड़ी के हाशमी चौक पर मानव श्रृंखला बनाकर इसका विरोध किया गया था. सूत्र बता रहे हैं कि आने वाले समय में सरकार के फैसले का राज्य व्यापी विरोध होगा.

लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी आपको बर्थ डेथ सर्टिफिकेट को लेकर होने वाली है. राज्य में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र अब पंचायत, नगर पालिका चेयरमैन, नगर निगम के मेयर नहीं जारी कर सकेंगे. मिली जानकारी के अनुसार केवल अधिकृत सरकारी अधिकारी या पंजीकरण अधिकारी ही जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करेंगे. सरकार का तर्क है कि जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़ा हो रहा था.

सरकार की ओर से तर्क दिया गया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान सबसे अधिक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र सामने आए. उसके बाद सरकार ने यह कदम उठाया है. सरकार चाहती है कि जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी सुरक्षित और पूरी तरह डिजिटल बनाया जाए. अगर ऐसा होता है तो लोगों को राहत मिल सकती है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल और चिंता की बात है कि अब तक जारी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र को भी सरकार मानने को तैयार नहीं है.

राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि 1997 से अब तक जारी सभी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों का सत्यापन किया जाएगा. इस प्रक्रिया के तहत घर-घर सर्वे कराया जाएगा. जिन लोगों के पास अब तक प्रमाण पत्र नहीं है, उन्हें निर्धारित सुनवाई प्रक्रिया के बाद प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे. लेकिन जांच में फर्जी पाए जाने वाले सभी प्रमाण पत्र तुरंत रद्द कर दिये जाएंगे. न केवल रद्द किए जाएंगे बल्कि जारी करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी.

इस संदर्भ मेंआचार्य चाणक्य की एक बात स्मरण आती है. जाने अनजाने मस्तिष्क में घूमने लगती है कि प्रशासन को जनता के हिसाब से चलना चाहिए. हमारे देश के लोगों को सख्त अनुशासन और नियम पसंद नहीं है. सरकार की नीति ऐसी होनी चाहिए, जहां आवश्यकता के अनुसार नियमों में बदलाव और सुधार भी हो. सरकारी भ्रष्टाचार कोई आज का विषय नहीं है और ना ही यह कोई ज्वलंत मुद्दा है. भ्रष्टाचार उन्मूलन का एक तरीका होता है जो धीरे-धीरे व्यवस्था को पटरी पर लाता है. बंगाल सरकार को भी इसी नीति पर आगे बढ़ना होगा. तभी उसमें स्थायित्व भी आएगा.

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