विगत 98 दिनों से लगातार अनशन पर बैठे चाय बागान श्रमिकों के चेहरे पर उस समय चमक आ गई, जब उन्होंने सुना कि उनके बागान मालिक गोविंद गर्ग को पुलिस ने कोलकाता में गिरफ्तार कर लिया है. चाय बागान श्रमिकों के अनुसार चाय बागान मालिक गोविंद गर्ग लगभग 12 करोड रुपए की उनकी पीएफ राशि, लगभग 84 लाख की ग्रेच्युटी, लगभग 20 लाख की एलटीए राशि को डकारने का प्रयास कर रहे थे. इससे चाय बागान श्रमिक और मजदूर चिंतित थे. उनकी चिंता भी जायज थी.
वे काफी समय से अपने हक और न्याय की लड़ाई लड़ रहे थे. वे सब जगह जा चुके थे. सरकारी अधिकारियों के दफ्तरों के दरवाजे खटखटा कर थक चुकी थी चुके थे. लेकिन कहीं भी उन्हें न्याय नहीं मिला. कुछ श्रमिक संगठनों ने प्रयास तो किया जरूर, लेकिन समझौते का भी बागान मालिकों की ओर से पालन नहीं किया गया. कई बार सिलीगुड़ी, पहाड़, तो कोलकाता में बैठक चलती रही. लेकिन नतीजा शून्य.
अब उनके सामने आंदोलन, भूख हड़ताल के अलावा सभी रास्ते बंद हो चुके थे. श्रमिकों की बची खुची एक उम्मीद राजू बिष्ट थे. राजू बिष्ट ने उन्हें आश्वासन ही नहीं बल्कि भरोसा दिया था कि उन्हें उनका हक और न्याय दिलाने के लिए वह संघर्ष करते रहेंगे. रविवार को श्रमिकों की ओर से लॉन्ग व्यू मार्च निकाला गया. दार्जिलिंग के चौरास्ता से शुरू हुआ मार्च शाम तक कर्सियांग पहुंच गया. उनके इस मार्च को विद्यार्थियों से लेकर सभी तबके के लोगों का समर्थन मिल रहा था.
कर्सियांग की पहाड़ियों के ढलान पर स्थित एक चाय बागान है लॉन्गव्यू चाय बागान, जो लगभग 1020 हेक्टेयर में फैला हुआ है. इस चाय बागान में किसी समय श्रमिकों और प्रबंधन के बीच अच्छा समन्वय रहता था. लेकिन धीरे-धीरे हालात मालिक और श्रमिकों में उलझते चले गए. मालिकों ने अपनी हुकूमत चलानी शुरू कर दी
उन्होंने अपने श्रमिकों को एक बंधुआ मजदूर से ज्यादा महत्व नहीं दिया. जब मजदूरों को इसका एहसास हुआ, उसी समय से उनके बीच तलवार खींच गयी. प्रबंधन पक्ष श्रमिकों के वेतन से पीएफ का पैसा तो काट रहा था लेकिन वह पैसा ईपीएफओ में जमा ही नहीं हो रहा था. इससे श्रमिकों में असंतोष व्याप्त रहने लगा.
कई बार श्रमिकों की ओर से प्रबंधन पक्ष से निवेदन किया गया. लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ. केवल पीएफ के पैसे ही नहीं थे बल्कि वेतन भुगतान, बोनस विसंगतियां और दूसरे मुद्दे भी इसमें शामिल थे. इस बागान में सैकडों श्रमिकों के परिवार का गुजारा होता था. उनके परिवार की माली हालत लगातार खस्ता होती जा रही थी. लगभग एक दशक से श्रमिक पक्ष और बागान प्रबंधन के बीच व्याप्त कड़वाहट लगातार बढ़ती जा रही थी.
2024 में पहली बार बकाया राशि के लिए श्रमिक पक्ष की ओर से आंदोलन किया गया. उसके बाद बोनस आंदोलन भी शुरू हुआ. 10 मार्च को कोलकाता में एक त्रिपक्षीय बैठक भी हुई. जिसमें यह फैसला किया गया कि श्रमिकों के 12 करोड रुपए पीएफ बकाया 15 अप्रैल तक भुगतान कर दिया जाएगा. लेकिन मालिक पक्ष ने ऐसा नहीं किया. इसके बाद 21 अप्रैल को श्रमिकों ने आंदोलन शुरू कर दिया. श्रमिकों को न्याय और उनका हक दिलाने के लिए राजू बिष्ट ने ऐडी चोटी का जोर लगा दिया था.
राजू बिष्ट ने श्रमिक पक्ष की ओर से उन्हें न्याय और अधिकार दिलाने के लिए काफी भाग दौड़ की. उन्होंने चाय बागान के श्रमिकों को एकजुट किया और चाय बागान मालिक गोविंद गर्ग के खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज करवाने में सफल रहे. सूत्र बताते हैं कि वैसे तो गोविंद गर्ग के खिलाफ विभिन्न मामलों में 6 मुकदमे दर्ज किए गए हैं. लेकिन यह मुकदमा श्रमिकों के पीएफ डकारने को लेकर था. इसलिए पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी.
FIR दर्ज होते ही चाय बागान मालिक गोविंद गर्ग भूमिगत हो गए. आखिरकार शनिवार की रात कोलकाता पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त कर ली. सूत्रों ने बताया कि गोविंद गर्ग की गिरफ्तारी में राजू बिष्ट का एक बहुत बड़ा योगदान था. गोविंद गर्ग को गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया गया जहां से उन्हें 5 दिनों के पुलिस रिमांड में सौंप दिया गया.पहली बार सरकार बदलने के बाद किसी बागान मालिक पर पुलिस ने अपने तरीके से कार्रवाई की और इसका असर यह रहा कि बागान मालिक गोविंद की तबीयत ही खराब हो गई.
उन्हें सुकना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए ले जाया गया. हालांकि बाद में वह खुद ही ठीक हो गए. अब उन पर दर्ज लगभग 6 मुकदमो को लेकर पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है. इसके अलावा मजदूरों की विभिन्न मांगों, उनके वेतन भुगतान, बोनस भुगतान पीएफ जमा ना करने आदि मामले में भी पुलिस ने मोर्चा खोल दिया है. लॉन्ग व्यू चाय बागान के श्रमिकों को लगता है कि पहली बार पुलिस ने किसी चाय बागान मालिक के खिलाफ निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई की है. आंदोलन करने वाले चाय बागान श्रमिक राजू बिष्ट के प्रति अपना आभार व्यक्त कर रहे हैं और उनकी तरफ आशा और विश्वास भरी निगाहों से देख रहे हैं.
