क्या पश्चिम बंगाल के स्कूलों का भगवाकरण होगा? यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि पश्चिम बंगाल सरकार स्कूलों में सिलेबस बदलने जा रही है. इसके लिए सरकार ने समिति का भी गठन कर दिया है, जो नई शिक्षा नीति के तहत सुझाव देगी कि स्कूलों में बच्चों को क्या पढ़ाया जाए और क्या नहीं पढ़ाया जाए. बंगाल सरकार ने पहले ही नई शिक्षा नीति लागू करने की घोषणा कर दी है.
स्कूली बच्चों के लिए साल 2027 काफी महत्वपूर्ण होगा. क्योंकि 2027 में सिलेबस बदलेंगे. पुस्तक बदलेंगी और यह नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत होगी. हालांकि सरकार ने अभी पुस्तकों में होने वाले बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक सूचना प्रेषित नहीं की है. परंतु संकेत मिल रहा है कि नई शिक्षा नीति के तहत बच्चों को पढ़ाया जाएगा ताकि पढ़ाई के साथ-साथ वे विचार परिपक्वता और समग्रता को प्राप्त कर सके. इसमें बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के भी कौशल सिखाए जाएंगे.
राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक वर्मन ने तो अब ऐलान कर दिया है कि पाठ्यक्रम में बदलाव होगा. यह बदलाव अभी प्राथमिक कक्षाओं में होगा. इसके अनुसार पहली कक्षा से बदलाव शुरू होगा. बच्चों की पुस्तक कैसी होगी, उन्हें क्या पढ़ाया जाएगा, क्या-क्या विषय होंगे जो उनका सर्वांगीण विकास कर सके, इस पर बनी समिति विचार कर रही है और एक दीर्घकालिक योजना के साथ अपना सुझाव प्रस्तुत करेगी. पाठ्यक्रम समिति में विचारक और विशेषज्ञों को शामिल किया गया है. उनकी सिफारिश के अनुसार ही पाठ्यक्रम में बदलाव देखने को मिलेगा.
जानकार मानते हैं कि नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम में होने वाले बदलाव राष्ट्रीय एकता और अखंडता के अनुरूप होंगे. बच्चों को राष्ट्रवादी बनाया जाएगा. उनकी सोच और विचार को एक विस्तृत फलक दिया जाएगा. 2028 से होने वाली पढ़ाई का माहौल भी बदलेगा जो बच्चों को राज्य से बाहर पूरे देश को एक राज्य के रूप में देखने की प्रेरणा देगा. हालांकि शिक्षा मंत्री दीपक वर्मन ने कहा है कि जो पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा, उसका कंटेंट आज के समय के अनुरूप होगा. जाहिर सी बात है कि बच्चों को व्यवसायिक शिक्षा भी मिलेगी. उन्हें चरित्र व जीवन का ज्ञान भी कराया जाएगा और एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में उनका विकास हो सके, यह सुनिश्चित किया जाएगा.
जब भी शिक्षा में कोई बदलाव होता है तो सर्वप्रथम एक समिति का गठन किया जाता है. पश्चिम बंगाल में पहले भी समितियों का गठन हो चुका है.प्रत्येक सरकार अपने-अपने आदर्श और थीम के अनुसार पुस्तकों में बदलाव और समितियां का गठन करती है. जाहिर सी बात है कि नई सरकार की समिति भी नई सरकार के आदर्श के अनुरूप होगी. इसलिए केवल पुस्तकों में बदलाव ही नहीं बल्कि विद्यालय, कक्षा और कक्षा के विद्यार्थियों के वस्त्र, रंग, लोगो आदि भी बदले जाएंगे.
नई सरकार ने पहले ही स्कूलों की वर्दी से लेकर विश्व बंगला के लोगो तक बदलाव कर दिया है. अब नई शिक्षा नीति के अनुरूप पुरानी परंपराओं को पुनर्जीवित किया जा सकता है और इसके अनुरूप वर्दी का रंग भी बदला जा सकता है. यानी नीले रंग की वर्दी बच्चों की नहीं होगी, एकदम पक्की बात है.इसके अलावा विद्यालय का रंग भी बदला जाएगा और यह सब बदलाव कहीं ना कहीं भगवाकरण की ओर ले जाए,तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए.

