August 13, 2026
Sevoke Road, Siliguri
प्रमुख हेडलाइंस और अपडेट्स

ISI एजेंट खालिद की डायरी ने खोला बंगाल को तबाह करने का कच्चा चिट्ठा! यहां स्लीपर सेल तैयार करने के लिए भेजा गया था!

पश्चिम बंगाल पुलिस ने उत्तर 24 परगना से जिस संदिग्ध आई एस आई एजेंट राणा रऊफ खालिद उर्फ सनी उर्फ वहाब आलम को गिरफ्तार किया है, अब पूछताछ के क्रम में उसने ऐसी ऐसी जानकारियां देनी शुरू कर दी है, जो काफी रोंगटे खड़े कर देने वाला है. पता चलता है कि पश्चिम बंगाल को बर्बाद करने के लिए पाकिस्तान की ISI ने नेपाल से लेकर बांग्लादेश में एक बड़ा जाल बिछाया था. अब पाकिस्तान की चाल बंगाल पुलिस ने विफल कर दी है.

वहाब आलम के कुछ साथी नेपाल में थे. नेपाल के उसके साथी पाकिस्तान के आतंकवादियों से संपर्क कर रहे थे. जबकि खुद वहाब आलम बांग्लादेश से संपर्क बनाए हुए था. वह बंगाल के सभी संवेदनशील स्थानों, सेना की छावनी, बीएसएफ की चौकी, रेलवे स्टेशन, रेल लाइन ,सिलीगुड़ी गलियारा इत्यादि सभी संवेदनशील स्थानों की छवि, वीडियो ,नक्शा आदि नेपाल के अपने साथियों के जरिए पाकिस्तान भेज रहा था.

वहाब आलम की डायरी में 6 ISI एजेंट के नाम दर्ज मिले हैं. इनमें से पांच एजेंट नेपाल में है और बांग्लादेश में इसका एक साथी है. उनके नाम भी डायरी में दर्ज हैं. इसके अनुसार काशिफ, हनीफ चौधरी, सोहेल, जेडी और हारुन सफदर नेपाल में है. जबकि पावेल बांग्लादेश का एजेंट है. इन्हीं ISI एजेंट साथियों के जरिए पश्चिम बंगाल को अस्थिर और उथल-पुथल करने की साजिश रची गई थी.

कुछ समय पहले पाकिस्तान का एक और खुफिया एजेंट पकड़ा गया था. उससे पूछताछ चल रही है. राणा रऊफ खालिद बंगाल में सभी संवेदनशील स्थानों की रेकी करता था और वहां वीडियो शूट करने के बाद अपने साथियों को भेज देता था. इस काम के लिए उसे अच्छे खासे पैसे मिलते थे. उसकी डायरी अथवा उससे पूछताछ के क्रम में कई और लोगों के नाम मिले हैं, जो बंगाल में अलग-अलग स्थानों में रहते हैं.

यह सभी खालिद के साथी हैं जो उसकी जासूसी गतिविधियों में मदद कर रहे थे. पुलिस ने कोलकाता के तपसिया से मोहम्मद एजाज को गिरफ्तार किया है. उसके अलावा पूर्वी कोलकाता से दो अन्य संदिग्ध व्यक्तियों को भी गिरफ्तार किया है, जो खालिद से जुड़े हुए थे. पुलिस को यकीन है कि इनके जरिए खालिद को सारी सूचनाएं मिल रही थी, जिसे वह सीमा पार भेज रहा था.

पुलिस के राडार पर आने के बाद खालिद ने नेपाल से अपना कनेक्शन खत्म करने की चाल तो जरूर चली थी, लेकिन समय रहते बंगाल पुलिस और एसटीएफ को पता चल गया. दरअसल खालिद ने नेपाल में अपने संपर्क के सबूत मिटाने के लिए अपने मोबाइल फोन की सिम को फेक दिया था. खालिद के पास एक से ज्यादा सिम थे. समय रहते STF ने उन सिमों को बरामद कर लिया है.

मोबाइल के इन सिमों के जरिए नेपाल और बांग्लादेश के साथ ही पाकिस्तान के भी खुफिया एजेंट और आतंकवादियों का कच्चा चिट्ठा हासिल किया जा सकता है. पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी सिम को पुनर्जीवित और एक्टिवेट करने की कोशिश में है.उम्मीद की जा रही है कि इन सिमों के जरिए बंगाल पुलिस और एसटीएफ को आगे की जांच में महत्वपूर्ण सुराग मिल सकता है.

अब तक जो महत्वपूर्ण जानकारी हाथ लगी है, उसके अनुसार राणा को बंगाल में स्लीपर सेल तैयार करने के लिए भेजा गया था और वह इसी कार्य में लगा हुआ था. राणा बंगाल आने से पहले नेपाल के काठमांडू में था. काठमांडू में ही उसके अन्य साथी छिपे थे, जिनके नाम उसकी डायरी में दर्ज है. वहां उसने अपने साथियों के साथ किसी मिशन के लिए प्लान किया और उसके बाद वह उत्तर 24 परगना के बनगांव के रास्ते बांग्लादेश जा रहा था.

बांग्लादेश जाने से पहले वह पावेल से मिलना चाहता था. उसे वह नया मोबाइल देना चाहता था, ताकि इसके जरिए नेपाल और पाकिस्तान में संपर्क की विस्तृत योजना बनाई जा सके. इस काम के लिए राणा को अच्छे खासे पैसे मिलते थे. हालांकि एसटीएफ ने जब उसे गिरफ्तार किया तो उसकी जेब से मात्र 350 रुपए ही मिले थे.

एसटीएफ और पुलिस के अधिकारी राणा की उन सच्चाइयों को भी सामने लाना चाहते हैं, जो अब तक प्रकाश में नहीं आई है. एसटीएफ सरगर्मी से पूछताछ कर रही है. देखना होगा कि और कितने संदिग्ध पकड़े जाते हैं. खालिद की पूरी प्लानिंग क्या थी, यह भी स्पष्ट हो जाएगा.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *