पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्र की मदद से पहाड़, तराई और Dooars के चाय बागान तथा चाय बागानों में काम करने वाले चाय श्रमिकों के जीवन में एक नई सुबह लाने की तैयारी कर ली है. जो योजना बनाई गई है, उसमें चाय बागानों के बुनियादी ढांचे में सुधार के साथ ही चाय श्रमिकों की माली हालत को बदलने तथा उनके भविष्य को सुनिश्चित करने की तैयारी है. राज्य सरकार सभी चाय श्रमिकों और उनके परिवारों को प्रधानमंत्री चाय श्रमिक प्रोत्साहन योजना का लाभ दिलाने के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने जा रही है.
उत्तर बंगाल चाय की खेती के लिए मशहूर है. सिलीगुड़ी के आसपास पहाड़ और Dooars में जहां तक आपकी नजर जाती है, आपको चाय बागान ही नजर आएंगे. चाय दुकानों की हरियाली किसी भी व्यक्ति का मन मोह लेती है. चाय बागानों के लिए मशहूर उत्तर बंगाल में वर्तमान में अनेक चाय बागान उचित संचालन तथा रखरखाव के अभाव और वित्तीय संकट के कारण बंद हो चुके हैं, अनेक आखिरी सांस ले रहे हैं. इन चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिक रास्ते पर आ चुके हैं. उनकी माली हालत सबसे ज्यादा चिंता जनक है.
राज्य में भाजपा की सरकार है. राज्य और केंद्र की डबल इंजन की सरकार ने पहली बार उत्तर बंगाल के चाय बागानों में हरियाली लौटाने तथा चाय श्रमिकों के चेहरे पर मुस्कान सजाने की एक बड़ी तैयारी की है. राज्य सरकार ने केंद्र सरकार की मदद से उत्तर बंगाल में चाय बागानों की स्थिति में सुधार के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं. सरकार ने फैसला किया है कि पूरे उत्तर बंगाल में तराई, पहाड़, Dooars में स्थित जितने भी बंद और बीमार चाय बागान है, उन्हें फिर से चालू किया जाएगा. इसके लिए प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है.
राज्य सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने चाय श्रमिक तथा चाय बागानों की विभिन्न विकास मूलक योजनाओं के लिए 330 करोड रुपए मंजूर किए हैं. बंद चाय बागानों को खोलने तथा चाय बागान में काम करने वाले श्रमिकों की माली हालत सुधारने के लिए एक विस्तृत योजना बनाई गई है. इसके अंतर्गत वर्षों से अपनी मांग को लेकर संघर्ष कर रहे श्रमिकों को उनके अधिकार दिए जाएंगे. जैसे श्रमिकों के लिए आवास और जमीन के अधिकार पत्र, चाय श्रमिकों को अतिरिक्त जमीन के मालिकाना हक की व्यवस्था, उनके लिए पक्के मकान, विश्राम शेड आदि निर्माण कार्य किए जाएंगे.
राज्य सरकार की योजना में दार्जिलिंग, कर्सियांग, कालिमपोंग, तराई, Dooars के लगभग 450 बीमार चाय बागानों को शामिल किया गया है. उनकी स्थिति में सुधार के साथ ही बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा. उत्तर बंगाल दौरे पर आए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट कर दिया है कि चाय बागान से लेकर चाय श्रमिकों की स्थिति बदली जाएगी. दुर्गा पूजा से पहले चाय श्रमिकों को 20% की दर से पूजा बोनस दिया जाएगा.
अतीत में झांककर देखा जाए तो चाय बागान के श्रमिक बरसों से चाय बागान मालिकों के असहयोग, तो कभी यूनियनों की मनमानी, राज्य सरकार और नेता मंत्रियों की उपेक्षा और शोषण के शिकार रहे हैं. चाय बागानों के इतिहास में शायद यह पहला अवसर होगा, जब राज्य सरकार की बहुमुखी योजना से चाय श्रमिकों के साथ-साथ चाय बागानों की सूरत बदल जाएगी. चाय बागानों के श्रमिक पीढियों से अपनी ही जमीन से बेदखल हैं. स्वास्थ्य और दैनिक रोजमर्रे के विभिन्न संकटों और देनदारियों से जूझते हुए चाय श्रमिकों को आखिरी उम्मीद रहती है कि पूजा से पहले एक मुश्त बोनस मिल जाने से उनके परिवार और बच्चों को एक बड़ा सहारा मिल जाएगा बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लौट जाएगी.
हर बार बोनस मांग को लेकर कभी सरकार तो कभी बागान प्रबंधक से टकराहट, कभी त्रिपक्षीय बैठक तो कभी चाय श्रमिकों के बकाया वेतन को डकारने वाले बागान प्रबंधक और मालिक बागान छोड़कर ही चले जाते रहे हैं. यह भी देखा गया है कि चाय श्रमिकों के पीएफ के पैसे भी बागान मालिक या प्रबंधक डकार जाते हैं. इस बार सरकार ने उपरोक्त सभी समस्याओं का निदान ढूंढ लिया है. इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पूजा से पहले ही चाय श्रमिकों को 20% की दर से बोनस का भुगतान कर दिया जाएगा. पहली बार यह मसला बिना किसी विवाद के ही संपन्न हो गया है. सरकार के इस फैसले से यूनियन, कर्मचारी और श्रमिक सभी खुश हैं. उन्हें उम्मीद है कि राज्य और केंद्र की डबल इंजन सरकार जल्द से जल्द चाय बागान श्रमिक कल्याण योजना को जमीन पर उतारने की कोशिश करेगी.
