यह घटना दर्शाती है कि सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में मानव तस्कर किस कदर सक्रिय हैं. बंगाल की भोली भाली, मासूम, नादान लड़कियों को गुमराह करके दूसरे प्रदेशों में ले जाया जाता है, जहां न केवल उनकी जिंदगी को नर्क बना दिया जाता है बल्कि उन्हें जिस्म की मंडी में भी बिठा दिया जाता है. आए दिन ऐसी घटनाएं हमारे समाज में घटित हो रही हैं. लेकिन पुलिस और कानून के द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है.
इस घटना में तो पुलिस की कार्यशैली और कर्त्तव्यनिष्ठा पर ही सवाल उठने लगे हैं. यहां जिस घटना की चर्चा हो रही है, मीडिया में दावा किया जा रहा है कि अगर पुलिस ने समय रहते उचित कदम उठाया होता तो पीड़िता की इस तरह से जिंदगी नर्क नहीं बन जाती! आज पीड़िता अपने साथ हुए जुल्म, शोषण एवं उत्पीड़न के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटा रही है और कानून से इंसाफ मांग रही है.
पीड़िता की उम्र 16 साल है. उसका नाम रेशमा कल्पित नाम है. वह सिलीगुड़ी के नजदीक कालियागंज थाना के अंतर्गत एक गांव में रहती है.उसे अदालत पर भरोसा है. क्योंकि आरंभ में तो पुलिस ने उसके मामले पर गौर ही नहीं किया था. बाद में खुद पीड़िता ने अदालत के सामने पूरी घटना कह सुनायी. उसके बाद कोर्ट के आदेश के बाद कालियागंज थाना की पुलिस ने उसके मामले को हाथ में लिया और जांच शुरू कर दी.
पुलिस की अब तक की इन्वेस्टीगेशन, प्रत्यक्ष दर्शियों के बयान और उपलब्ध साक्ष्योंं के आधार पर कहा जा रहा है कि रेशमि जाकिर अली और हैदर अली नामक दो लड़कों के संपर्क में थी. ये दोनों लड़के स्थानीय थे. ये रेशमा से छुप-छुप कर मिलते थे. ये लड़के कौन थे, कहां के थे, यह जानने के बजाय रेशमा उनकी बातचीत से काफी प्रभावित थी.
बाद में रेशमा को महसूस हुआ कि वह हैदर अली से प्यार करने लगी है. धीरे-धीरे रेशमा और हैदर अली का मिलना जुलना इस मोड़ पर आ गया कि रेशमा ने हैदर अली के साथ अपनी गृहस्थी बसाने का फैसला कर लिया.
28 मई 2026 का दिन था. रेशमा मन ही मन घर से भागने और और हैदर अली के साथ गृहस्थी बसाने की अपनी योजना बना चुकी थी. उसकी योजना के बारे में उसके घर वालों को भनक तक नहीं लगी थी. उस दिन रेशमा किसी बहाने से घर से निकल गई और उसके बाद देर रात तक नहीं लौटी. तब घर वालों को उसकी चिंता होने लगी. 2 दिन और दो रात बेटी की तलाश होती रही. उसके बाद रेशमा की मां ने कालियागंज थाने में बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी. लेकिन आरोप है कि पुलिस ने उसकी रिपोर्ट को गंभीरता से नहीं लिया.
पीड़िता रेशमा ने अदालत को जो बयान दिया है, उसके अनुसार वह घर से भाग कर हैदर अली और उसके दोस्त जाकिर अली के साथ दिल्ली जाने के लिए ट्रेन में बैठ गई. लड़की हैदर अली से शादी करना चाहती थी तथा उसके साथ अपनी जिंदगी की नयी शुरुआत करना चाहती थी. हैदर अली ने उसे जिंदगी के सब्जबाग दिखाये थे. उसने पीड़िता को सपनों की दुनिया में काफी भटकाया. इसके बाद वह उसके साथ गृहस्थी बसाने के लिए तैयार हो गई थी.
वह कालियागंज से चली तो रास्ते में ट्रेन में एक और लड़की उसके साथ हो गई. लड़की बारसोई थाना क्षेत्र की रहने वाली थी. वह भी कम उम्र की थी. दोनों लड़कियां ट्रेन में रास्ते में आपस में काफी घुल मिल गई थीं. लेकिन उन्हें जिस जगह ले जाया गया, वह दिल्ली नहीं था, बल्कि उत्तर प्रदेश का एक शहर था. उनके साथ जा रहे लड़कों ने उन्हें ट्रेन से उतारा और एक होटल में ले गए. अब तक दोनों लड़कियों को लड़कों की योजना की कोई भनक नहीं थी. वह उनके साथ प्यार-मोहब्बत से पेश आ रहे थे.
लेकिन होटल में आते ही लड़कों का व्यवहार उनके प्रति अचानक बदल गया. उन्होंने उन दोनों लड़कियों को कमरे में ले जाकर बंद कर दिया और जबरन उनके साथ गैंगरेप किया. होटल के उस कमरे में उनके अलावा कुछ और लड़के थे. सभी ने बारी-बारी से उनके साथ गैंगरेप किया. यह सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा. लगभग 1 महीने तक दोनों लड़कियों के साथ गैंगरेप किया जाता रहा. उसके बाद उन्हें होटल से निकाल कर एक ऐसी जगह ले जाया गया, जो एक बदनाम कोठे के नाम से मशहूर था. उन्हें कोठी पर ले जाकर बेच दिया गया.
बड़ी मुश्किल से दोनों लड़कियां वहां से फरार होने में सफल रही और किसी तरह से अपने घर लौटी. रेशमा अपने साथ हुए जुल्म और शोषण की कहानी पुलिस को सुनाना चाहती थी. लेकिन आरोप है कि कालियागंज पुलिस ने उसके बयान को गंभीरता से नहीं लिया. पीड़िता और उसके घर वालों ने कालियागंज थाना प्रभारी को कई बार लिखित शिकायत दी. लेकिन पुलिस ने कथित रूप से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की.
उसके बाद 20 सितंबर को रेशमा और उसके घर वालों ने उत्तर दिनाजपुर के पुलिस अधीक्षक से संपर्क किया और इस संदर्भ में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई. लेकिन आरोप है कि पुलिस अधीक्ष कार्यालय से भी पीड़िता को न्याय नहीं मिला. अंततः उसे अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा.
पीडिता के साथ हुए जुल्म, शोषण और उत्पीड़न की कहानी सुनने के बाद कोर्ट ने कालियागंज पुलिस को संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने और मामले की जांच का आदेश दिया. पुलिस की अब तक की जांच में पता चला है कि लड़कियों की जिंदगी बर्बाद करने वाले लड़के मानव तस्कर गिरोह से हो सकते हैं. इस तरह का आरोप पीडिता की मां ने भी लगाया है. इस गांव में इससे पहले भी कई नाबालिग लड़कियों को प्रलोभन देकर गायब किया जा चुका है.
फिलहाल पुलिस ने पीड़िता की मां की लिखित शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है. रायगंज पुलिस अधीक्षक सोनवणे कुलदीप सुरेश ने मीडिया से बातचीत में आश्वासन दिया है कि पुलिस की भूमिका की भी जांच होगी. पीड़िता के वकील पलाश रंजन दास के बयान को भी गंभीरता से लिया गया है. वकील पलाश रंजन दास ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिसके कारण उनकी मुवक्किल की जिंदगी बर्बाद हुई है. अगर पुलिस चाहती तो अब तक आरोपी जेल की सलाखों में होते. पीड़िता पक्ष की ओर से कहा गया है कि न्याय मिलने तक उनकी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी.
