सिलीगुड़ी में ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या को दूर करने के लिए कंचनजंघा स्टेडियम के मेला ग्राउंड में बड़ी पार्किंग व्यवस्था तैयार की गई। मकसद साफ था—विधान रोड, विधान मार्केट और आसपास की सड़कों को बेतरतीब पार्किंग से राहत दिलाना और लोगों की आवाजाही आसान करना। लेकिन अब तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
विधान रोड पर एक बार फिर जगह-जगह स्कूटी, मोटरसाइकिल, टोटो और चार पहिया वाहन खड़े दिखाई दे रहे हैं। सड़क के दोनों किनारों पर वाहनों की कतार लगने से कई जगह सड़क संकरी हो रही है। यही हाल ऋषि अरविंद रोड, राजा राममोहन राय रोड और बिमल सिन्हा सरणी समेत विधान रोड से जुड़ने वाली कई सड़कों का भी बताया जा रहा है।
दुकानों के सामने भी बड़ी संख्या में बाइक और स्कूटी खड़ी रहती हैं। आरोप है कि ग्राहकों के साथ-साथ दुकानदारों के वाहन भी सड़क किनारे पार्क किए जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब वाहन खड़े करने के लिए अलग से पार्किंग की व्यवस्था कर दी गई है, तो लोग अब भी सड़क को ही पार्किंग क्यों बना रहे हैं?
कंचनजंघा स्टेडियम के मेला ग्राउंड में करीब 800 वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था की गई है। इतना ही नहीं, इसे और आधुनिक बनाने के लिए करीब 1 करोड़ 65 लाख रुपये की लागत से पेवर ब्लॉक, CCTV और बेहतर एंट्री-एग्जिट सिस्टम जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना भी है।
लेकिन दूसरी तरफ विधान रोड के फुटपाथ की स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है। कहीं चाय की दुकान, कहीं फल की दुकान, कहीं फास्ट फूड तो कहीं पान-सिगरेट की दुकान—फुटपाथ के कई हिस्सों पर अस्थायी दुकानें नजर आ रही हैं। नतीजा यह कि पैदल चलने वाले लोगों को फुटपाथ छोड़कर सड़क पर चलना पड़ रहा है।
यानी एक तरफ सड़क पर पार्किंग, दूसरी तरफ फुटपाथ पर कब्जा और बीच में गुजरते वाहन और पैदल यात्री। ऐसे में ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने की पूरी कवायद पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।
राज्य के पर्यटन मंत्री और सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष भी सड़क, फुटपाथ और सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने को लेकर कई बार अपनी बात रख चुके हैं। ऐसे में अब सवाल यह है कि क्या विधान रोड की यह तस्वीर उनके संज्ञान में है?
क्या प्रशासन फिर से सड़क और फुटपाथ को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अभियान चलाएगा? या फिर कुछ दिनों की कार्रवाई के बाद हालात दोबारा वैसे ही हो जाएंगे?
क्योंकि अगर पार्किंग के लिए करोड़ों रुपये की योजना बनाई जा रही है, लेकिन वाहन फिर भी सड़क पर ही खड़े होते रहें, तो सवाल सिर्फ ट्रैफिक का नहीं है… सवाल यह भी है कि आखिर बनाई गई पार्किंग व्यवस्था का फायदा जमीन पर लोगों को कितना मिल रहा है?

