बड़े अरमानों से बनाया था घरौंदा, लेकिन अचानक ही हवा का एक झोंका आया और सब कुछ ताश के पत्तों की तरह बिखर गया… सिलीगुड़ी में हजारों टोटों चालकों की कल्पना में किसी शायर का यह शेर जरूर गूंज रहा होगा. दुर्गा पूजा में अधिक से अधिक कमाई करने का उनका सपना बिखर गया है. जब से सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नर सैयद वकार रजा का फरमान आया है, तभी से ही टोटो चालकों पर जैसे बिजली गिर पड़ी है. वे सिर पर हाथ धरकर भविष्य की चिंता में खो गए हैं.
सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस और ट्रैफिक विभाग ने जिस तरह का फैसला लिया है, अगर उस पर पूरी तरह अमल होता है, तो शायद सिलीगुड़ी के ट्रैफिक इतिहास में यह पहला अवसर होगा, जब सिलीगुड़ी में मुख्य की तो बात ही छोड़िए, छोटी बड़ी किसी भी सड़क पर टोटो नहीं चलेगा. इससे पहले दुर्गा पूजा के समय टोटो को पूजा पंडाल वाली सड़क पर चलने की अनुमति नहीं होती थी. केवल वर्धमान रोड व कुछ अन्य सड़कों पर पूजा के दौरान टोटो चलते सिलीगुड़ी के लोगों ने देखा था. पहली बार आप देख पाएंगे कि सप्तमी से लेकर विजयादशमी या विसर्जन तक सिलीगुड़ी की सड़कों पर टोटो नहीं चलेंगे.
आमतौर पर देखा जाता है कि सामान्य दिनों में टोटो चालकों की कमाई हो या ना हो, लेकिन पूजा के समय एक-एक टोटो चालक अच्छा खासा कमा लेते हैं. सिलीगुड़ी के टोटो चालक शंकर ने बताया कि सामान्य दिनों में ज्यादा भाड़ा नहीं मिलता है. काट छांटकर उन्हें बस इतना मिल जाता है कि घर पर दाल रोटी खा सकें. लेकिन त्योहारों के समय ही उन्हें अच्छी कमाई की उम्मीद रहती है. उसने बताया कि सिलीगुड़ी प्रशासन ने जो फैसला लिया है, वह उनके ऊपर किसी कुठाराघात से कम नहीं है.
एक अन्य टोटो चालक ने बताया कि वह हैरान है कि आखिर सिलीगुड़ी प्रशासन ने इस तरह का फैसला कैसे ले लिया! अगर आप किसी को नौकरी नहीं दे सकते हैं तो उसकी रोजी-रोटी से खेलने का हक भी आपको नहीं होना चाहिए. प्रशासन को इस पर विचार करना चाहिए. आखिर हमारी गलती क्या है… हम जाएं तो कहां जाएं! सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नर सैयद वकार रजा के अनुसार केवल टोटो चालक ही नहीं, बल्कि कार चालकों की भी मुसीबतें बढने वाली हैं, जो पूजा घूमने के लिए सपरिवार कार से निकलते हैं और मुख्य सड़क पर कार पार्किंग करने के बाद पंडाल घूमने निकलते हैं.
इस बार कार वाले भी मुख्य सड़क पर कार पार्किंग नहीं कर सकते हैं. जब उन्हें कार पार्किंग की अनुमति नहीं होगी तो वे घर से कार लेकर भला क्यों जाएंगे! इस बार पूजा के दौरान सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस ने पूजा के दौरान शांति, सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिस तरह के कदम उठाए हैं, अगर अंतिम समय तक उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता है तो सिलीगुड़ी का पूजा इतिहास बदल जाएगा! पहली बार पूजा के दौरान कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए बाहर से पुलिस फोर्स मंगायी जा रही है.
सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस ने बीएसएफ और एसएसबी के साथ मिलकर चिकन नेक की सुरक्षा का अभेद्य किला तैयार किया है. खुफिया विभाग, डीडी टीम, महिला विनर्स जैसे दस्तों को बड़ी जिम्मेवारी सौंपी गई है. यह सभी पूजा के दौरान और जब तक प्रतिमा विसर्जन नहीं हो जाता है, कानून व्यवस्था एवं लोगों की सुरक्षा के लिए जवाब देह होंगे. मिली जानकारी के अनुसार इस बार शहर और आसपास के इलाकों में कम से कम 1000 पंजीकृत पूजा होने की उम्मीद है.
अब तक 840 आवेदन पुलिस प्रशासन को प्राप्त हो चुके हैं. सिलीगुड़ी प्रशासन ने पूजा पंडालों में होने वाली भीड़भाड़ और अव्यवस्था को रोकने के लिए ड्रोन कैमरे से निगरानी के अलावा जगह-जगह पुलिस सहायता केंद्र, पेट्रोलिंग, खुफिया विभाग द्वारा असामाजिक तत्वों पर कड़ी नजर, बदमाशों की पहचान, हुड़दंग करने वालों पर नियंत्रण आदि के लिए जिस तरह की योजना बनाई है, अगर उसका पूर्ण रूपेण पालन किया जाता है तो यह पहली पूजा होगी, जहां पुलिस प्रशासन से लेकर दमकल,बिजली तक सभी अपने-अपने दायित्व के प्रति अलर्ट रहेंगे. हर विभाग को काम बांट दिया गया है.
आमतौर पर प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुड़दंग की ज्यादा संभावना रहती है. इसके लिए भी सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस ने जिस तरह की व्यवस्था की है, वह भी एक इतिहास बन जाएगा. प्रतिमा विसर्जन के दौरान ड्रोन का इस्तेमाल नहीं होगा. जैसा कि राज्य सरकार का आदेश है, पुलिस की भरसक कोशिश रहेगी कि डीजे पर प्रतिबंध पूरी तरह लोग लागू रहे और लोग इसका पालन करें. प्रतिमा विसर्जन के दौरान पूजा कमेटियों को महत्वपूर्ण जिम्मेवारी दी गई है. उन्हें प्रशासनिक निर्देश का हर हालत में पालन करना होगा. पर्यावरण और प्रदूषण को ध्यान में रखकर ही उन्हें प्रतिमा विसर्जन करना होगा. इस तरह से आप देखेंगे कि सिलीगुड़ी के पूजा इतिहास में पहली बार कुछ नए बदलाव होने जा रहे हैं.
