October 13, 2026
Sevoke Road, Siliguri
प्रमुख हेडलाइंस और अपडेट्स alert Global warming india natural disaster nepal newsupdate World

अगर विश्व के देशों ने नहीं दिया साथ, तो तबाह होता रहेगा नेपाल! नेपाल में एक बार फिर से तबाही!

If the world's nations don't support Nepal, it will continue to be devastated! Destruction threatens Nepal once again!

ऐसा लगता है कि नेपाल तबाही का दूसरा नाम हो गया है. 2025 से ही नेपाल को प्रकृति की बुरी नजर लग गई है. इस साल नेपाल में जैसी तबाही हुई है, वैसी तबाही तो पिछले एक दशक में भी नहीं हुई. अभी कुछ ही दिनों पहले 26 अगस्त को नेपाल में जो तबाही हुई थी, उसमें 1400 से ज्यादा लोग मरे थे. जबकि हजारों लोग लापता हो गए. इस तबाही को पूरी दुनिया ने देखा था.

इसके बाद कुछ अंतराल पर नेपाल की अन्य नदियों में काल कहर बनकर टूटा. इन नदियों के आसपास रहने वाले कई लोग इस काल के शिकार हो गए. अनेक बस्तियां तबाह हो गई. पुल बह गए. इस बाढ़ ने बिहार को भी घुटने पर ला दिया.ऐसी विनाशकारी बाढ़ आई, जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी. नेपाल में ही नहीं बिहार में भी दर्जनों लोग मारे गए और नदी में डूब गए. अनेक घर जलमग्न हो गए.

पिछले कुछ समय से नेपाल एक पर एक आ रही तबाहियों से जूझ रहा है. भोटेकोसी और त्रिशूली नदियों में आई भीषण बाढ ने बिहार के सीमावर्ती जिलों को भारी नुकसान पहुंचाया और आज भी बिहार सरकार पीड़ितों की सहायता में जुटी हुई है. नेपाल की बाढ़ से उत्तर प्रदेश भी अछूता नहीं रहा. रविवार को एक बार फिर से नेपाल के गोरखा जिले में बूढी गंडक की नदी में ऐसी तबाही आई, जिसके चलते दर्जनों मकान और पुल बह गए. इतना ही नहीं नेपाल सरकार की तीन महत्वपूर्ण जल विद्युत परियोजनाओं को भी भारी क्षति पहुंची है.

नेपाल का भौगोलिक परिवेश ही कुछ ऐसा है कि इस देश के साथ तबाही जुड़ गयी है. नेपाल के लोगों ने भी जैसे अब प्रकृति के आगे घुटने टेक दिए हैं और प्राकृतिक आपदा को जीवन का एक अंग मान लिया है. नेपाल में आने वाली बाढ़ अत्यंत भयंकर होती है. वास्तव में जोरदार वर्षा के चलती पहाड़ की ऊपरी शिराएं भूस्खलन में टूट कर गिरती हैं तो उसका मलबा किसी न किसी नदी या खोला में ही जाता है. रविवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ था. गोरखा जिले के चुमनुबरी गांव स्थित चुमके खोला में पहाड़ से विशाल चट्टाने गिर गई और बूढी गंडक में समा गई.

इससे नदी का प्रवाह एकदम से रुक गया. जब पानी हद से ज्यादा जमा हो गया तो इसका दबाव लगातार बढ़ता चला गया. इसके फल स्वरूप रिसाव बढता चला गया. तब उस समय रात का समय था. इसलिए प्रकृति को मनमानी करने का पूरा मौका मिल गया. सुबह होते ही जब पानी का दबाव एकदम से बढ़ गया तो पानी में लहरें पैदा होने लगीं. और इसके बाद पानी के साथ-साथ पहाड से गिरे मलबे के प्रभाव से नदी में बाढ़ आ गई.

उस समय लोग बाग सोए हुए थे. लेकिन जैसे ही बाढ के पानी का शोर होने लगा तो लोगों की नींद अचानक टूट गई. इससे वहां अफरा तफरी मच गई. सयार और बूढी गंडक की तेज धाराओं की आहट से चुमलिंग और लोकपा जैसी बस्तियों के लोग भागने लगे. नेपाल में कई पर्यटक भी घूमने आए थे. उन्होंने भी भाग कर अपनी जान बचाई. मिली जानकारी के अनुसार अब तक नेपाल की बाढ़ और भूस्खलन से चार पुल, तीन बिजली परियोजनाएं और 34 गौशालाएं तबाह हो गई हैं. इसके अलावा 45 घर पूरी तरह से तबाह हुए हैं. जबकि 27 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं.

नेपाल सरकार के स्थानीय प्रशासन ने बचाव एवं राहत कार्य तेज कर दिया है. अब तक तीन वाहनों के नदी में समाने की खबर है. नेपाल सरकार ने भारी संख्या में जवानों को बचाव कार्य में उतारा है. अब तक विदेशी नागरिकों समेत 80 से ज्यादा लोगों को बचाया जा सका है. नदी किनारे बने अधिकांश मकान जमींदोज हो चुके हैं. बताया जा रहा है कि लोकपा और चुमलिंग के बीच बूढी गंडक की सहायक नदी सयार में रुकावट आई, जिसके चलते यह बाढ़ आई है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चुमनुबरी में 1 किलोमीटर लंबा भूस्खलन हुआ है, जिसके कारण कई गौशाला पानी में बह गई. जान माल की व्यापक क्षति का अनुमान लगाया जा रहा है.

अब समय आ गया है कि नेपाल की बार-बार हो रही तबाही को देखते हुए पूरा विश्व एकजुट हो और इसका स्थाई समाधान ढूंढ सके ताकि नेपाल को एक बार फिर से खड़े होने में सफलता मिले. यह पूरे विश्व का दायित्व है. नेपाल सरकार और नेपाल के प्रधानमंत्री ने इस संबंध में पहले ही विश्व के नेताओं को सचेत किया और उनसे आग्रह भी किया है. वक्त का तकाजा है कि ग्लोबल वार्मिंग से लेकर जलवायु संरक्षण के मुद्दे पर दुनिया के सभी विकसित और विकासशील देश एक मंच पर खड़ा नजर आएं!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *