October 28, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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बंगला-गाड़ी खरीदना हो तो अभी खरीद लें, क्योंकि 2027 में आप चाह कर भी नहीं खरीद पाएंगे!

If you want to buy a bungalow or a car, buy it now, because in 2027 you will not be able to buy it even if you want to!

क्या आप सिलीगुड़ी में मकान खरीदना चाहते हैं? क्या आप अपने लिए एक नई कार लेना चाहते हैं? तो फिर देर किस बात की? आप यह मत सोचिए कि जब महंगाई नियंत्रण में आ जाएगी तो गाड़ी बंगला खरीदना सस्ता हो जाएगा. इस भ्रम में ना रहिए. आपके लिए खरीददारी का यही समय अनुकूल है.

क्योंकि डेढ़ 2 महीने के बाद आप चाहकर भी ना तो बांग्ला खरीद पाएंगे और ना ही गाड़ी या अन्य कोई वस्तु. उस समय शोरूम या प्रॉपर्टी डीलर के ऑफिस में जाकर जब खरीददारी करने की बात करेंगे तो पता चलेगा कि इतना तो आपका बजट भी नहीं है. फिर आप मन मसोस कर रह जाएंगे.

विश्व व्यापी मंदी तेजी से पीछा कर रही है. 2008 की मंदी को आप भूल नहीं सके होंगे. कुछ इस तरह की स्थिति आने वाली है. कच्चे तेल का भाव लगातार चढ़ रहा है. इसका भाव 114 डॉलर प्रति बैरेल तक पहुंच गया है. कच्चे तेल की कीमत बढने से भारत सरकार को अधिक डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. इससे रुपए के मूल्य में कमजोरी आती है. रूपए में कमजोरी आने से सभी प्रकार के आयात वाले सामान महंगे हो जाते हैं. इससे निर्माण लगत में वृद्धि होती है.

घरेलू स्तर पर महंगाई दर 5.5% के स्तर को भी पार कर चुकी है. जैसा कि अनुमान लगाया जा रहा है, दिसंबर जनवरी तक यह छह प्रतिशत हो सकती है. उस समय भवन निर्माण से लेकर फैक्ट्री अथवा कंपनियों में बनाए जा रहे उत्पाद काफी महंगे हो जाएंगे. तब भारतीय रिजर्व बैंक भी रेपो रेट बढ़ा सकता है. इससे कर्ज लेने में पसीने छूटने लगेंगे.

वर्तमान में तो त्यौहारों को देखते हुए विभिन्न कंपनियों की ओर से ग्राहकों को विशेष छूट दी जा रही है. इसके अलावा बैंक ब्याज दर भी कम है. लेकिन जैसा कि हालत बता रहे हैं, भारतीय रिजर्व बैंक रेपो रेट में फिर से वृद्धि कर सकता है.

वर्तमान में वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही है. यह जल्द ही व्यापक बन सकती है.भू राजनीतिक तनाव, ऊर्जा आपूर्ति में कठिनाई, खराब मौसम इत्यादि के चलते महंगाई तेजी से बढ़ सकती है. मैन्युफैक्चरिंग मंहगा होने से इसका असर लोगों के जीवन पर पड़ना तय है.

सरल अर्थ में समझिए कि एक तरफ भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है तो दूसरी तरफ डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है. ऊर्जा निर्माण खर्च बढ़ने से आयातित वस्तुओं पर खर्च बढ़ रहा है. पूंजी प्रवाह में भी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. इसके साथ ही शेयर मार्केट धड़ाम हो रहा है. व्यापार और व्यापारियों का संतुलन बिगड़ रहा है.

अगर भू राजनीतिक तनाव और बढ़ता है अथवा केंद्रीय सरकारी बैंकों ने सख्त मौद्रिक नीति अपनाई तो रुपए पर और दबाव बढ़ेगा. एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर रुपए में बेस लाइन के मुकाबले 5% की गिरावट आती है, तो महंगाई लगभग 40 आधार अंक बढ़ सकती है.

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