August 18, 2026
Sevoke Road, Siliguri
प्रमुख हेडलाइंस और अपडेट्स good news newsupdate siliguri SILIGURI MUNICIPAL CORPORATION

सिलीगुड़ी के ‘वेनस मोड़’ का नाम ‘तिलक बहादुर छेत्री चौक’ किए जाने की उठ रही मांग!

There is a demand to rename Siliguri's 'Venus More' as 'Tilak Bahadur Chhetri Chowk'!

क्या सिलीगुड़ी के सफदर हाशमी चौक (वेनस मोड़)का नाम बदलकर तिलक बहादुर छेत्री चौक किया जाना चाहिए? तिलक बहादुर छेत्री चौक के समर्थन में कई लोग सामने आए हैं. जबकि कई ऐसे लोग भी हैं जो सफदर हाशमी चौक नाम परिवर्तन करने के पक्ष में नहीं है. सफदर हाशमी चौक का नाम तिलक बहादुर छेत्री चौक नाम परिवर्तित किए जाने की मांग करने वालों का एक मजबूत आधार और तर्क से भी इनकार नहीं किया जा सकता है.

सिलीगुड़ी के बहुचर्चित वेनस मोड़ का नाम शुरू से ही राजनीतिक विवाद का कारण रहा है. जब तक वेनस मोड था, तब तक तो ठीक था. लेकिन जैसे ही सिलीगुड़ी नगर निगम बोर्ड ने वेनस मोड़ का नाम बदलकर सफदर हाशमी चौक किया, तो उस समय नाम को लेकर विवाद हुआ था. कुछ लोग चाहते थे कि वेनस मोड का नाम तिलक बहादुर छेत्री के नाम पर रखा जाना चाहिए.

लेकिन तत्कालिन सिलीगुड़ी नगर निगम बोर्ड प्रशासन ने वही किया, जो पहले से उसकी योजना में शामिल था. निगम बोर्ड ने राज्य सरकार की सलाह से सफदर हाशमी चौक नाम रखा और इसका बोर्ड भी लगा दिया गया. राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद यह कयास लगाया जा रहा था कि भाजपा सरकार सफदर हाशमी चौक का नाम बदलकर बंगाल के किसी अन्य हिंदू स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर रखेगी.

भारतीय जनता पार्टी की सरकार भविष्य में सफदर हाशमी चौक के नाम को लेकर क्या करेगी, यह तो पता नहीं. लेकिन एक बार फिर से एक अनोखी घटना ने सफदर हाशमी चौक के नाम को लेकर विवाद को बढ़ा दिया है. सफदर हाशमी चौक का जो बोर्ड लगा हुआ है, उस बोर्ड पर पिछले दिनों किसी ने तिलक बहादुर छेत्री चौक का नाम का पोस्टर लगा दिया था. इस पोस्टर के चस्पा जाने के साथ ही विवाद बढ़ गया.

आनन फानन में सीपीएम ने इस मुद्दे को उठाकर राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया. पूर्व मेयर अशोक भट्टाचार्य ने कहा कि सफदर हाशमी के साथ-साथ तिलक बहादुर छेत्री का भी सम्मान है. दोनों महान विभूति हैं. लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि सफदर हाशमी और तिलक बहादुर छेत्री के बीच किसी तरह की तुलना होनी चाहिए. दूसरे संगठनों ने भी भाजपा पर आरोप लगाए और कहा कि यह भाजपा की मिली भगत है. हालांकि भाजपा नेता अमित जैन ने स्पष्ट कर दिया कि जिसने भी यह पोस्टर लगाया है, वह भाजपा का कार्यकर्ता नहीं है. भाजपा का इससे कोई लेना-देना नहीं है.

अब वेनस मोड़ का नाम तिलक बहादुर छेत्री चौक रखने के पक्ष में कई लोग सामने आ रहे हैं. वे लोग चाहते हैं कि वेनस मोड़ यानी सफदर हाशमी चौक का नाम बदलकर तिलक बहादुर छेत्री चौक कर दिया जाए. उनका तर्क है कि कंचनजंगा स्टेडियम कभी तिलक मैदान होता था. तिलक बहादुर छेत्री ने भूमि दान की थी. इसलिए अब समय आ गया है कि तिलक बहादुर छेत्री का सम्मान किया जाए और अगर सफदर हाशमी चौक का नाम तिलक बहादुर छेत्री चौक कर दिया जाता है तो इससे बड़ा सम्मान और क्या हो सकता है!

यह कोई पहला मौका नहीं है, जब सफदर हाशमी चौक का नाम तिलक बहादुर छेत्री चौक करने की मांग उठी हो. अगर हम इतिहास के झरोखों में जाएं तो तिलक बहादुर छेत्री वह शख्सियत थे, जिन्होंने सिलीगुड़ी के बच्चों और युवाओं के खेलने के लिए कंचनजंगा स्टेडियम की भूमि दान में दी थी. 1980 में यहां स्टेडियम का निर्माण शुरू हुआ. आरंभ में यह तिलक मैदान ही होता था. लेकिन बाद में तिलक मैदान का नाम बदलकर कंचनजंगा स्टेडियम नाम कर दिया गया.

क्षेत्र के इतिहास और गोरखा समुदाय के योगदान को याद करते हुए स्थानीय स्तर पर समय-समय पर इस विरासत और मूल नाम को सम्मान देने की मांग उठती रही है. इस मांग को अनुचित नहीं कहा जा सकता है. दूसरी तरफ सफदर हाशमी की भी बात कर लेते हैं. सफदर हाशमी वामपंथी विचारधारा के नाटककार, अभिनेता और निर्देशक थे. उनका जन्म दिल्ली में हुआ था. देश में नुक्कड़ नाटक को लोकप्रिय बनाने के लिए उन्हें जाना जाता है. वे मजदूरों और शोषितों की आवाज उठाते थे.

हालांकि भाजपा की ओर से अभी इस पर चुप्पी साधी गई है. लेकिन अब सफदर हाशमी चौक के नाम को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए हैं. एक पक्ष का कहना है कि सफदर हाशमी चौक का नाम तिलक बहादुर छेत्री चौक किया जाए, जबकि दूसरी तरफ माकपा जैसे राजनीतिक संगठनों ने सफदर हाशमी चौक के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है.अब देखना होगा कि राज्य की भारतीय जनता पार्टी की सरकार और भाजपा के नेता इस पूरे प्रकरण में अपना क्या रुख तय करते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *