सिलीगुड़ी से कोलकाता, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, असम के विभिन्न शहरों, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा आदि के लिए नियमित रूप से बसें जाती हैं. इनमें सामान्य यात्री बसों के अलावा लग्जरी या वोल्वो बसें भी शामिल है, जिनका किराया सामान्य बस किराया से काफी अधिक होता है.
इन लग्जरी बसों में आमतौर पर व्यापारी या फिर संभ्रांत लोग यात्रा करते हैं. अगर आप पूजा के दौरान लग्जरी बस से सिलीगुड़ी से कोलकाता, असम, बिहार, झारखंड ,उत्तर प्रदेश आदि जाने की तैयारी कर रहे हैं तो आपके लिए यह खबर जरूरी है.
आप यात्रा शुरू करने से पहले अपनी सीट और सीट के नीचे झांक कर देखें कि वहां कोई संदिग्ध वस्तु तो नहीं है. किसी ने वहां कुछ आपत्तिजनक सामान रखा तो नहीं है? अगर किसी सहयात्री का कोई सामान है तो उससे कहें कि वह अपना सामान अपनी सीट पर ही रखे. अगर यात्री आपसे अनुरोध भी करे तो उसकी बातों में ना आए. आपकी थोड़ी सी चूक आपके लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है
आपको क्या पता कि आपके बगल में बैठा व्यक्ति आपके बारे में क्या सोचता है! उसका मकसद क्या है और वह अपने साथ क्या ले जा रहा है? वह चोर या अपराधी हो सकता है. या वह मादक पदार्थों का तस्कर हो सकता है. वह व्यक्ति आपको फंसा सकता है. मीठी मीठी बातें करके आपके लिए बड़ी परेशानी उत्पन्न कर सकता है. पूजा की भीड़भाड़ में वह अपना मकसद पूरा करने के लिए कुछ भी कर सकता है. इसलिए यात्रा करते समय आपको हर समय चौकन्ना रहना चाहिए.
दरअसल सिलीगुड़ी के मादक पदार्थों के तस्करों ने सिलीगुड़ी से विभिन्न राज्यों में जाने वाली लग्जरी बसों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है. ऐसी ही एक वोल्वो बस कोलकाता से सिलीगुड़ी आ रही थी. इस बस से भारी मात्रा में मादक पदार्थ सिलीगुड़ी ले जाए जा रहे थे. जब बस कोलकाता से सिलीगुड़ी के लिए रवाना हुई, तभी खुफिया विभाग को वोल्वो बस में रखे मादक पदार्थों के बारे में सूचना मिली. खुफिया विभाग की टीम ने पुलिस को जानकारी दी. लिहाजा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बस में तलाशी अभियान चलाया और मादक पदार्थों की खेप को बरामद किया.
पुलिस ने लग्जरी बस से भारी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद किया. इसे किसी यात्री ने तकिए के नीचे छुपा कर रखा था. यह मादक पदार्थ किसी यात्री का था, जो सिलीगुड़ी लेकर जा रहा था. उसने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए मादक पदार्थों की तस्करी के लिए जानबूझकर वोल्वो बस को चुना था. क्योंकि इन बसों में आमतौर पर संभ्रांत यात्रियों के सफर करने के कारण पुलिस की नियमित जांच बहुत कम होती है
या यह भी कह सकते हैं कि ऐसी बसों में आमतौर पर व्यापारी या पर्यटक यात्रा करते हैं. ऐसे में पुलिस की नियमित जांच कार्रवाई महज खानापुरी होती है. पिछले दिन माटीगाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस ने तस्करों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाकर 285 gram मादक पदार्थों की बरामदगी के साथ ही 3 तस्करों को भी गिरफ्तार किया. सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस की मादक पदार्थों और तस्करों के खिलाफ कार्रवाई में तेजी आने के बाद तस्करों ने वोल्वो बस को निशाना बनाना शुरू कर दिया है.
अगर बसों के द्वारा मादक पदार्थों की तस्करी का पुराना रिकॉर्ड देखें तो आमतौर पर तस्करों ने इसके लिए सामान्य बसों को ही निशाना बनाया है. सिलीगुड़ी जंक्शन से इससे पहले बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश आदि की ओर जाने वाली सामान्य बसों में शराब और गांजे की तस्करी का पुलिस ने पहले ही भंडाफोड़ कर दिया है.
सिलीगुड़ी से बिहार जाने वाली बसों में शराब और अन्य नशीले पदार्थ ले जाने के मामले पहले भी सामने आए हैं. बिहार में शराबबंदी के चलते सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों से ही शराब तस्कर बसों के द्वारा शराब बिहार ले जाते हैं. कई बार बंगाल पुलिस ने तस्करों और उनके द्वारा ले जायी जा रही शराब की खेपों को बरामद करके तस्करों के जाल को काटने की जरूर कोशिश की है.
यह पहला अवसर है, जब लग्जरी बसों से नशीले पदार्थों की तस्करी का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. इस मामले के उजागर होने के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं. बंगाल पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बरामद माल किस यात्री का है और उसका संबंध किन तस्करों से है. सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस ने पहले ही यह पता लगा लिया है कि सिलीगुड़ी में मादक पदार्थों के तस्करों का एक नेटवर्क सक्रिय है, जो बिहार, असम और दूसरे राज्यों में मादक पदार्थो की तस्करी को अंजाम दे रहे हैं.
मानक पदार्थो की तस्करी के नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए बंगाल पुलिस डीडी व खुफिया विभाग की टीमों के साथ मिलकर एक बड़ा ऑपरेशन चला रही है. पुलिस का लक्ष्य है कि किसी भी तरह सिलीगुड़ी समेत पूरे बंगाल के नौजवानों को नशे की गर्त में जाने से बचाया जा सके. इसमें जांच एजेंसियां भी काफी सहयोग कर रही है.
अगर तस्करी के नेटवर्क का पता पुलिस लगा लेती है तो तस्करों का यह खेल बंद हो सकता है. परंतु समस्या तो यह है कि मादक पदार्थों के तस्कर साइबर फ्रॉड की तरह रोज एक नई चाल चलते रहते हैं. सबसे बड़ी कठिनाइ है कि इस खेल में असली चेहरे कभी पकड़े ही नहीं जाते. ऐसे में पुलिस का यह अभियान कितना सफल होगा, यह बताना आसान नहीं होगा.

