June 5, 2026
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क्या राजू विष्ट को मंत्री स्तर की जिम्मेदारी मिलने वाली है?

यूं तो दार्जिलिंग के भाजपा सांसद राजू बिष्ट हमेशा से ही राजनीति में अपनी सक्रियता दिखाते रहे हैं. परंतु राज्य में नई बीजेपी सरकार के आने के बाद उनकी राजनीतिक सक्रियता कुछ अधिक ही देखी जा रही है. खासकर दार्जिलिंग पहाड़ और कालिमपोंग क्षेत्रों की राजनीति में उनका दखल और प्रभुत्व बढ़ता जा रहा है.

यूं तो पहाड़ में भाजपा के तीन विधायक हैं. दार्जिलिंग विधानसभा क्षेत्र से नोमन राई, कर्सियांग विधानसभा क्षेत्र से सोनम लामा और कालिमपोंग विधानसभा क्षेत्र से भरत कुमार क्षेत्री भाजपा विधायक हैं. सभी युवा चेहरे हैं. लेकिन उनमें अनुभव की कमी है. शायद यही कारण है कि राज्य मंत्रिमंडल के गठन में पहाड़ के जीते इन तीनों विधायकों में से किसी को भी मंत्री नहीं बनाया गया.

भितरखाने सूत्रों से जो जानकारी मिल रही है, उसके अनुसार पहाड़ के लिए राज्य सरकार आने वाले समय में कुछ बड़ी घोषणा कर सकती है. इस समय पहाड़ के लिए भाजपा के संकल्प पत्र काफी महत्वपूर्ण हैं. विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने पहाड़ में समग्र विकास और स्थाई समाधान का संकल्प व्यक्त किया था, जिसे पूरा करना होगा और इसके लिए जरूरी होगा कि इन सभी मामलों पर अनुभव रखने वाले किसी योग्य भाजपा नेता को मंत्री बनाया जाए.

संभवतः केंद्र सरकार भी चाहेगी कि पहाड़ के विकास और स्थानीय लोगों के स्थाई राजनीतिक समाधान के लिए पहाड़ से कोई ऐसा बड़ा चेहरा हो जो केंद्र और राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर सके. केंद्र सरकार यह भी चाहेगी कि यह चेहरा गोरखा हो, जो स्थानीय राजनीतिक संगठनों में भी लोकप्रिय हो. इस पैमाने पर केंद्र सरकार की कसौटी पर राजू बिष्ट खरा उतर सकते हैं. राजू विष्ट दो-दो बार दार्जिलिंग से सांसद रह चुके हैं. उन्होंने पहाड़ और समतल के लिए काफी काम भी किया है. पहाड़ के राजनीतिक संगठनों में भी वे लोकप्रिय माने जाते हैं.

दार्जिलिंग के भाजपा सांसद राजू बिष्ट की जिस तरह से राजनीति में सक्रियता बढ़ गई है, जिस तरह से पहाड़ से लेकर समतल और Dooars के क्षेत्रों में लोकप्रियता बढी है और जिस तरह से राजू बिष्ट नई भाजपा सरकार में पहाड़ का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, उससे कयासों को बल मिलने लगा है. दावा तो यह भी किया जा रहा है कि पहाड़ में भाजपा उम्मीदवारों के चयन से लेकर उन्हें जीत दिलाने तक राजू बिष्ट की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

पिछले दिनों राज्य मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण के समय राजू बिष्ट अपने तीनों भाजपा विधायकों को स्वयं साथ लेकर कोलकाता गए थे और मुख्यमंत्री सुबेंदु अधिकारी से भी मिले थे. सुबेंदु अधिकारी से उनकी निकटता भी देखी जा रही है. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि बंगाल की राजनीति में अंदर ही अंदर कुछ पक रही है. कुछ बड़ी तैयारी हो रही है. पिछले कुछ समय से राजू बिष्ट के राजनीतिक बयान भी गौर करने लायक हैं. उनके बयान में उत्साह, आत्मविश्वास और अपनापन भी रहता है. एक नया जोश और नई उमंग देखी जा रही है. यह भविष्य के लिए कुछ संकेत है संकेत कुछ कहता है

राजू बिष्ट केंद्र सरकार के कई मंत्रियों के काफी करीबी रहे हैं. इस तरह से वे केंद्र के भी लाडले हैं. अगर भविष्य में केंद्र सरकार पहाड़ के विकास और स्थाई राजनीतिक समाधान के लिए किसी मंत्री का विकल्प तैयार करती है तो उसमें राजू बिष्ट का चेहरा फिट बैठ सकता है. कयास तो यह भी लगाया जा रहा है कि राजू बिष्ट, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और केंद्र सरकार के बीच पहाड़ को लेकर भविष्य का कार्यक्रम बनाया जा चुका है. ऐसे में अगर निकट भविष्य में राजू बिष्ट को लेकर केंद्र सरकार कोई बड़ी घोषणा करती है, जैसे उन्हें पहाड़ या पूर्वोत्तर मामलों को देखने के लिए मंत्री बनाया जाता है तो इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए.

पहाड़ और समतल के जानकार भी मानते हैं कि इसकी संभावना भी दिख रही है. क्योंकि राज्य मंत्रिमंडल के गठन में पहाड़ के तीन विधायकों को कोई जगह नहीं दी गई है. अब सरकार राजू बिष्ट को केंद्रीय राज्य मंत्री बनाकर इसकी भरपाई कर सकती है. हालांकि Dooars क्षेत्र से एक गोरखा नेता विशाल लामा को राज्य मंत्रिमंडल में जगह जरूर दी गई है. परंतु पहाड़ के स्थाई राजनीतिक समाधान का मुद्दा इतना बड़ा है कि उसे सुलझाने तथा पहाड़ के व्यवस्थित संचालन के लिए राजू बिष्ट जैसा कोई बड़ा चेहरा ही सक्षम हो सकता है.

तो क्या राजू विष्ट केंद्र सरकार के पहाड़ मामलों को देखने के लिए राज्य मंत्री बनाये जा सकते हैं. राजनीतिक विश्लेषकों को यह एक अवश्यंभावी घटना लगती है. सिलीगुड़ी और पहाड़ से जुड़े कुछ राजनीतिक संगठनों के अनुभवी लोगों का भी मानना है कि केंद्र सरकार अपना पिंड छुडाने के लिए राजू बिष्ट को केंद्र में राज्य मंत्री बनाकर यह दायित्व दे सकती है. वैसे भी राजू बिष्ट पहाड़ की राजनीति पर अपनी पकड़ रखते हैं. वह एक अनुभवी और सुलझे हुए नेता हैं तथा पहाड़ में उतना ही ज्यादा लोकप्रिय हैं.

बहरहाल यह एक अनुमान और विश्लेषण पर आधारित स्क्रिप्ट है. आधिकारिक तौर पर और ना ही भाजपा के स्तर पर इस बारे में कोई चर्चा की गई है. ना ही खुद राजू बिष्ट ने इस बारे में कभी कुछ कहा है. लेकिन राजनीतिक आईने में कुछ भी छिपाना संभव नहीं होता है. राजनीतिक घटनाएं संकेत देती है और भविष्य के लिए एक पृष्ठभूमि तैयार करती है. जिस तरह पहाड़ और समतल में राजनीतिक घटनाक्रम की धुरी राजू बिष्ट बनते जा रहे हैं, ऐसे में अगर उन्हें लेकर कोई धारणा या कयास लगाया जाता है तो इसमें गलत क्या है!

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