सेवक रोड पर हुए दर्दनाक हिट एंड रन हादसे ने पूरे सिलीगुड़ी को झकझोर कर रख दिया है। जिस सड़क से रोज़ हजारों लोग अपने घर, दफ्तर और सपनों की ओर निकलते हैं, उसी सड़क पर एक मासूम ज़िंदगी बेरहमी से कुचल दी गई। इस मामले के मुख्य आरोपी देवांशु पाल चौधरी को मंगलवार को कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच सिलीगुड़ी अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे 4 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
लेकिन अदालत परिसर में जो माहौल था, वह सिर्फ कानूनी कार्यवाही का नहीं, बल्कि आक्रोश, दर्द और सवालों से भरा हुआ था।
हादसे में जान गंवाने वाले शंकर छेत्री को न्याय दिलाने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए। लोगों की आंखों में आंसू थे और आवाज़ में गुस्सा।
“क्या हमारे बच्चे की ज़िंदगी की कोई कीमत नहीं?”
“क्या अमीर होना कानून से ऊपर होना है?”
“हर रोज़ हादसे होते हैं, लेकिन इंसाफ कब मिलेगा?”
इन सवालों ने पूरे इलाके को गूंजा दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आरोपी वाहन चालक ने लापरवाही से गाड़ी चलाते हुए शंकर छेत्री को कुचल दिया और मौके से फरार हो गया। सड़क पर गिरा शंकर अपनी आखिरी सांसों के लिए तड़पता रहा, लेकिन मदद देर से पहुंची। यह दृश्य आज भी लोगों के दिलों में खौफ बनकर जिंदा है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस हिट एंड रन मामले में गिरफ्तार आरोपी का नाम देवांशु पाल चौधरी है। वह सिलीगुड़ी के एक पेट्रोल पंप मालिक का बेटा बताया जा रहा है। घटना के बाद से ही आरोपी को लेकर इलाके में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आरोपी प्रभावशाली परिवार से ताल्लुक रखने के कारण उसे 3 से 4 दिनों तक गिरफ्तार नहीं किया गया। लोगों का कहना है कि रसूख और दबदबे के चलते कार्रवाई में देरी हुई, जिससे आम जनता में नाराज़गी फैल गई. घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार किया। मंगलवार को जैसे ही उसे अदालत लाया गया, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। हालात को काबू में रखने के लिए अदालत परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, सेवक रोड हिट एंड रन मामले में पुलिस चार दिनों बाद आरोपी तक पहुंच सकी। बताया गया है कि हादसे के बाद आरोपी ने अपनी कार को सिलीगुड़ी के एक सर्विस सेंटर में छिपाकर रख दिया था, ताकि पहचान न हो सके। पुलिस ने गुप्त सूत्रों से मिली सूचना के आधार पर वाहन को बरामद किया और फिर आरोपी को हिरासत में लिया। जांच में यह भी सामने आया है कि हादसे के समय वाहन तेज़ रफ्तार में था और चालक ने नियंत्रण खो दिया था। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि घटना के वक्त चालक नशे की हालत में था या नहीं। फिलहाल आरोपी को अदालत में पेश कर चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है, ताकि हादसे से जुड़े सभी तथ्यों का खुलासा किया जा सके।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सेवक रोड पर आए दिन तेज़ रफ्तार गाड़ियों से हादसे होते हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जाते।
लोगों ने मांग की कि—
• आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए
• पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा मिले
• सेवक रोड पर ट्रैफिक नियमों को सख्ती से लागू किया जाए
शंकर छेत्री का परिवार सदमे में है। घर में मातम पसरा है। क्या उसे इंसाफ मिलेगा?”
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम पर एक सवाल है—
क्या सड़क पर आम आदमी की जान की कोई कीमत नहीं?
क्या कानून सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह जाएगा?
अब सबकी निगाहें अदालत पर टिकी हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार सिर्फ फाइलें नहीं चलेंगी, बल्कि न्याय चलेगा।
क्योंकि अगर आज शंकर को इंसाफ नहीं मिला, तो कल कोई और शंकर इसी सड़क पर कुचल दिया जाएगा।
यह लड़ाई सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि हर उस इंसान की है जो रोज़ सड़क पर अपनी जान लेकर चलता है।
