February 25, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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मानव स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले सिलीगुड़ी के रेस्टोरेंट, स्वीट शाॅप,होटलों आदि के खिलाफ प्रशासन मौन क्यों?

पिछले दिनों सिलीगुड़ी की एक मिठाई दुकान से मांस बरामद होने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग के द्वारा कई दुकानों के खिलाफ अभियान चलाया गया था. सूत्र बताते हैं कि इनमें से 90% दुकानों में निम्न गुणवत्ता की सामग्री पकड़ी गई थी. सैंपल को जांच के लिए भेजा गया. लेकिन अभी तक विभाग के द्वारा उसकी रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की गई है. सिलीगुड़ी नगर निगम भी शायद रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है. लेकिन वर्तमान में इस पर राजनीति तेज हो गई है.

सिलीगुड़ी के होटल, रेस्टोरेंट ,मिठाई दुकान, ढाबे आदि के द्वारा ग्राहकों को परोसी जाने वाली सामग्री की खराब गुणवत्ता को लेकर चर्चा तब शुरू हो जाती है, जब ऐसी दुकानों से छापे की कार्रवाई में निम्न गुणवत्ता अथवा सड़ी गली सामग्री पकड़ी जाती है. अन्यथा सिलीगुड़ी की अधिकांश दुकानों में खराब गुणवत्ता की सामग्री मिलना कोई बड़ी बात नहीं है. ऐसा लगता है कि सिलीगुड़ी के लोग इसके अभ्यस्त हो गए हैं. कोई भी व्यक्ति अपने दिल पर हाथ रखकर यह दावा नहीं कर सकता कि वह जो खा रहा है, स्वास्थ्य अनुकूल है या कोई भी दुकानदार यह दावा नहीं कर सकता कि वह ग्राहकों को जो सामग्री परोस रहा है ,उसकी क्वालिटी स्वास्थ्य के नियमों के अनुरूप है.

यह कोई पहला मौका नहीं है जब इस तरह की चर्चा हो रही है. इससे पहले भी मोमो तथा दूसरे खाद्य पदार्थ में फफूंदी पड़ने अथवा बासी खाना परोसे जाने की चर्चा होती रही है. खाद्य सुरक्षा विभाग का अभियान नियमित रूप से नहीं चलता है. इसका फायदा होटल वाले और दुकानदार उठाते रहते हैं. सिलीगुड़ी के अधिकांश होटल, रेस्टोरेंट,ढाबे ,मिठाई दुकान आदि में निम्न गुणवत्ता के खाद्य पदार्थ पाए जाते हैं. अधिकांश होटलों का खाना दूषित तो होता ही है. होटल और दुकान भी दूषित होते है. जहां तहां गंदगी और मक्खियां भिनभिनाती रहती है. इन खाद्य पदार्थों को खाकर लोग बीमार पड़ जाते हैं.

खाद्य सुरक्षा विभाग को सब पता होता है. लेकिन विभाग के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती है. जब ऊपरी दबाव बढ़ता है तो तभी विभाग के द्वारा कुछ दुकानों से सैंपल उठाए जाने के बाद मामले की इतिहास श्री हो जाती है. इन सैंपलों की जांच की रिपोर्ट का पता किसी को नहीं चलता और धीरे-धीरे मामले को दबा दिया जाता है. पिछले दिनों एक मिठाई दुकान से लगे मांस के पकड़े जाने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग के द्वारा कुछ दुकानों की सामग्री का निरीक्षण कार्य चलाया गया. लेकिन उसकी जांच रिपोर्ट अब तक नहीं आई है.

सिलीगुड़ी नगर निगम में विपक्ष के नेता अमित जैन ने सर्वप्रथम यह मामला उठाया था.अब सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष ने भी यह मामला उठाया है और सवाल किया है कि खाद्य सुरक्षा विभाग अब तक रिपोर्ट को सार्वजनिक क्यों नहीं कर रहा है? सिलीगुड़ी भाजपा के द्वारा खाद्य सुरक्षा विभाग के दफ्तर के आगे प्रदर्शन भी किया गया है. सिलीगुड़ी नगर निगम इस पर खामोश क्यों है? गौतम देव को जवाब देना चाहिए. सवाल यह है कि जिन होटल अथवा दुकानों से खराब सामग्री पाई जाती है उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होनी चाहिए? हमारा कानून कुछ ऐसा है कि ऐसे मामलों में दोषी लोगों को सख्त सजा नहीं होती है.

यह हमारे स्वास्थ्य, धर्म और आस्था का विषय है. समाज को स्वस्थ रखने की जिम्मेवारी समाज की होती है. समाज व्यक्तियों का समूह होता है. पिछले दिनों अमित जैन ने ठीक ही कहा था कि मिठाई दुकान से हम लोग मिठाई खरीदते हैं तो उसे पूजा पर भी चढ़ाया जाता है. ऐसी दुकान से मांस निकले तो क्या हमारा धर्म भ्रष्ट नहीं हो जाता है.यह हमारी आस्था से खिलवाड़ है. धर्म और आस्था से बढ़कर मानव स्वास्थ्य है.

दूषित अथवा निम्न गुणवत्ता की सामग्री खाने के बाद मानव स्वास्थ्य का कितना नुकसान होता है, यह आसानी से समझा जा सकता है. हमारा सवाल है कि आखिर इसका उपाय क्या है? समाज की क्या भूमिका होनी चाहिए?प्रशासन और कानून का रवैया क्या होना चाहिए? जहां से मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री बरामद होती है, ऐसी दुकानों के मालिकों को क्या सजा दी जाए? यह सबसे बड़ा सवाल है और इस सवाल का हल सभी को मिलकर ढूंढना चाहिए!

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