6- 7 महीने का यह शिशु कौन था, कहां से आया, लावारिस है या… उसके माता-पिता कौन हैं, बच्चे की हत्या किसने की? यह तो बाद में पता चलेगा. पुलिस इस बारे में पता करेगी ही. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बच्चे का कसूर क्या था? कदाचित शिशु यह सवाल उनसे कर रहा है, जिन्होंने उसे इस हाल में पहुंचाया है या फिर यह सवाल वह अपनी उस मां से कर रहा है, जिसने 9 महीने तक उसे गर्भ में रखा था. क्या इसी दिन के लिए कि उसके वजूद को मिटा दिया जाएगा?
सिलीगुड़ी के चंपासारी इलाके में एक अजीब सा सन्नाटा व्याप्त है. लोग एक दूसरे से कानाफूसी कर रहे हैं. इलाके में उत्तेजना भी है तो मातम भी पसरा है. जो भी सुनता है, शिशु को इस हाल में पहुंचाने वाले के प्रति उसका गुस्सा भड़क उठता है. यह पूरा मंजर देखने के बाद लोग गुस्से और तनाव में आ जाते हैं. यहां इंसानियत जिंदा है, लेकिन उस दरिन्दे की तलाश है, जिसने शिशु को मौत के घाट पहुंचाया है.
आज सुबह चंपासारी इलाके में स्थित द्वितीय महानंदा सेतु के निकट कुछ लोग दुकान में चाय पी रहे थे तो कुछ लोग सड़क पर टहल रहे थे. उस समय ठंडी ठंडी हवा बह रही थी. महिषमारी नदी रोजाना की तरह शांत थी. लेकिन नदी के जल में जैसे कुछ हलचल मच रही थी. कुछ बच्चे नदी के पास ही खेल रहे थे. तभी नदी की धारा में बहता हुआ एक बैग किनारे लगा. रोजाना की तरह यहां प्लास्टिक आदि सामान चुनने वाले की नजर पड़ी तो वह लेने के लिए दौड पडा.
कुछ लड़के वही खेल रहे थे. उन्होंने भी नदी के किनारे पानी में बहकर आये एक बैग को देखा तो वे भी उस तरफ दौड़ पड़े. शायद कोई कीमती सामान होगा, यह सोचकर बच्चे उधर दौड़ पड़े थे. तब तक प्लास्टिक चुनने वाले ने बैग को लपक लिया था. पर जैसे ही उसने बैग खोल कर देखा, तो उसकी चीख निकल गई. उसने बैग को वहीं छोड़ा और भाग खड़ा हुआ.
वहां खेल रहे दूसरे लड़कों ने भी उसकी चीख सुनी तो वह भी घबरा गये. जैसे ही उन्होंने बैग के पास जाकर उसमें झांक कर देखा तो उनकी भी चीख निकल गई. बैग में लगभग 6-7 महीने का एक बच्चा पड़ा था. बच्चा खून में नहाया हुआ था. यह मंजर कुछ ऐसा ही था कि किसी की भी चीख निकल जाती. धीरे-धीरे यह बात आसपास के लोगों को मालूम हुई तो वह भी वहां पहुंच गये. इस बीच किसी ने प्रधान नगर थाने को मामले की जानकारी दे दी तो कुछ देर के बाद पुलिस भी वहां पहुंच गई.
पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर बैग को बरामद कर लिया, जिसमें बच्चे का शव पडा था. पुलिस ने आसपास के लोगों से घटना के बारे में पूछताछ की. लेकिन यह पता नहीं चल सका कि शिशु कौन था और वह पानी में बहकर यहां कैसे पहुंचा था. प्रधान नगर पुलिस ने आरंभिक कार्यवाही करते हुए शिशु के शव को बरामद करके पोस्टमार्टम के लिए उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज अस्पताल भिजवा दिया.
पुलिस अपनी कार्यवाही तो करेगी ही. लेकिन उससे बड़ा सवाल यह है कि हमारा समाज कहां जा रहा है? यह कोई पहला मौका तो है नहीं कि महानंदा या दूसरी नदियों से शिशु का शव बरामद हुआ हो. इससे पहले भी इस तरह की कई घटनाएं घट चुकी है .आखिर ऐसी घटनाएं हमारे समाज में क्यों जन्म ले रही हैं? हर बार एक निर्दोष ही बलि का बकरा क्यों बनाया जाता है? आखिर इस मासूम का कसूर क्या है?
