चिलचिलाती दोपहर में सेवक मोड़ से सवारी लेकर सेवक रोड पर चले एक टोटो चालक के चेहरे पर निराशा और हताशा झांक रही थी. चोपड़ा का रहने वाला टोटो चालक जैसे खुद से ही कह रहा था कि अब करें तो क्या करें. इधर-उधर से कर्ज लेकर ₹100000 में टोटो निकाला था. अभी उसकी किस्त पूरी नहीं हुई है. राज नामक यह टोटो चालक पिछले 5 सालों से सिलीगुड़ी में टोटो चला रहा है. परिवार में बीवी और तीन बच्चे हैं. टोटो चलाकर ही वह अपने घर का खर्च समेत टोटो की किस्त निकाल पाता है.
राज, शमशाद, विवेक, विशाल आदि कई ऐसे टोटो चालक हैं जो काम धंधा नहीं मिलने के चलते टोटो चलाकर अपना गुजर बसर कर रहे हैं. उन्होंने प्रशासन पर क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि सिलीगुड़ी जैसे छोटे शहर में संपर्क सड़कों पर टोटो चलाकर परिवार का पेट पालने की तो बात ही छोड़िए, क्या टोटो की किस्त तक निकाली जा सकती है भला? वे निराश होकर कहते हैं कि अब उन्हें कोई और धंधा देखना होगा. लेकिन कौन सा धंधा करें, क्या करें और कहां जाएं इस तरह की अनिश्चितता और भविष्य को लेकर आशंका उनके चेहरे पर साफ दिख रही है.
सिलीगुड़ी की कई मुख्य सड़कों पर टोटो नहीं चल रहे हैं. खासकर सिलीगुड़ी जंक्शन क्षेत्र, हिल कार्ट रोड क्षेत्र, हाशमी चौक इलाका, महावीर स्थान रेलवे ओवरब्रिज इत्यादि. सिलीगुड़ी ट्रैफिक प्रशासन की ओर से सिलीगुड़ी के टोटो चालकों पर सबसे बड़ा एक्शन शुरू किया गया है. सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सिलीगुड़ी में ट्रैफिक व्यवस्था संचालन के लिए सभी तरह के कदम उठाए जा सकते हैं. सूत्र बताते हैं कि स्थानीय प्रशासन को लगता है कि सिलीगुड़ी में हजारों की तादाद में चल रहे टोटो के चलते ही ट्रैफिक का बुरा हाल है. इसलिए ट्रैफिक नियंत्रण के लिए प्रशासन की ओर से सख्त कदम उठाए जा रहे हैं.
सिलीगुड़ी प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों में सिलीगुड़ी शहर के भीतर 9:00 बजे के बाद बसो का नहीं चलना अथवा उन्हें रोड के किनारे खड़ा नहीं करना, सिलीगुड़ी से खुलने वाली लंबी दूरी की बसों को ते॔जिंग नोर्गे बस टर्मिनस अथवा परिवहन नगर में शिफ्ट करना, रोड के किनारे बसों को लगाने पर प्रतिबंध, महावीर स्थान रेलवे ओवरब्रिज पर टोटो पर बैन, हिलकार्ट रोड पर बैन, सेवक रोड पर बैन, सिलीगुड़ी जंक्शन इलाके में टोटो पर बैन इत्यादि कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं और इसके साथ ही बनाए गए नियमों का पालन भी शुरू हो गया है.
हालांकि टीएमसी सरकार में भी टोटो चालकों पर एक्शन होते रहे हैं. परंतु एक्शन के साथ ही कार्यवाही और सख्त प्रशासन सिलीगुड़ी में पहली बार देखा जा रहा है. प्रशासन का यह फैसला टोटो चालकों के लिए किसी कुठाराघात से कम नहीं है. हालांकि टोटो चालकों के कान में यह बात पड़ गई थी कि भाजपा सरकार टोटो परिचालन पर नियंत्रण के लिए प्रस्ताव ला सकती है. लेकिन इतनी जल्दी यह देखने को मिलेगा, उन्हें विश्वास नहीं था.
आपको बताते चलें कि सिलीगुड़ी में ट्रैफिक सुधार के लिए सिलीगुड़ी के विधायक और मंत्री डॉ शंकर घोष के अलावा दार्जिलिंग भाजपा सांसद राजू बिष्ट ने अथक प्रयास किया था और राज्य में भाजपा की नई सरकार बनने पर राज्य सरकार से सिलीगुड़ी की मुख्य सड़कों पर टोटो नहीं चलने देने के लिए निवेदन भी किया था. सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट ने अब इस पर कड़ा एक्शन लिया है.
इसमें कोई शक नहीं है कि सिलीगुड़ी में ट्रैफिक अव्यवस्था के लिए टोटो वाले भी जिम्मेदार हैं. परंतु ऐसे सभी टोटो वालों पर नकेल कसने के लिए इंसानियत का तकाजा है कि प्रशासन को कोई भी कठोर कदम उठाने से पहले उनकी रोजी-रोटी के लिए भी चिंता करनी चाहिए. इस संदर्भ में सिलीगुड़ी नगर निगम और मेयर गौतम देव की पहल अच्छी थी. उनका विचार था कि सड़कों पर टोटो तो चले लेकिन नियंत्रित तरीके से चले और इसके लिए सिलीगुड़ी नगर निगम की ओर से पंजीकृत टोटो को प्रोत्साहन दिया गया था.
लेकिन मौजूदा प्रशासन ने तो पंजीकृत और अपंजीकृत सभी को एक ही तराजू में तौल रखा है. यानी सिलीगुड़ी की मुख्य सड़कों पर किसी भी टोटो या ई-रिक्शा को चलने नहीं दिया जाएगा. यह कोलकाता हाई कोर्ट का ऑर्डर भी है, जिसका पालन सिलीगुड़ी में शुरू कर दिया गया है.अब देखना होगा कि प्रशासन का यह कठोर तरीका सिलीगुड़ी के टोटो वालों पर कितना भारी पड़ता है और भविष्य में टोटो चालकों की ओर से क्या बडे कदम उठाए जाते हैं.
