सिलीगुड़ी, मंगलवार: पहाड़ी क्षेत्रों में प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने और विकास कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से मंगलवार को उत्तरकन्या में एक उच्चस्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई। राज्य सरकार के गृह एवं पर्वतीय मामलों के राज्य मंत्री विशाल लामा की पहल पर हुई इस बैठक में दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट, जीटीए तथा जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में मानसून के दौरान भूस्खलन से निपटने, प्रशासनिक सुधार और विकास परियोजनाओं को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय पूर्व में तैयार किए गए करीब 200 करोड़ रुपये के डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) को रद्द करने का रहा। राज्य मंत्री विशाल लामा ने कहा कि जिन परियोजनाओं से आम लोगों को वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा था और जो केवल कुछ ठेकेदारों तथा नेताओं के हित में बनाई गई थीं, उन्हें निरस्त कर जीटीए में व्यापक स्तर पर सुधार अभियान शुरू किया गया है। उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय और मुख्यमंत्री कार्यालय की अंतिम मंजूरी के बाद पहाड़ों में जनहित से जुड़ी विकास परियोजनाओं को तेजी से लागू किया जाएगा।
वहीं सांसद राजू बिष्ट ने कहा कि वर्षों से उपेक्षित रहे पहाड़ी क्षेत्रों के विकास के लिए जीटीए के 360 करोड़ रुपये के वार्षिक बजट के अलावा उत्तर बंग विकास विभाग (एनबीडीडी) से अतिरिक्त 250 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि पेयजल, सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास के माध्यम से पहाड़ के लोगों को समान अधिकार और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि जीटीए के तहत 1 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली करीब 50 परियोजनाओं की विभागीय जांच और ऑडिट जारी है। इन परियोजनाओं में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर मामले की जांच सीएजी, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने पर सरकार अंतिम निर्णय लेगी।
सांसद राजू बिष्ट ने आश्वासन दिया कि जीटीए की संवैधानिक व्यवस्था का पूरा सम्मान करते हुए सभी फैसले लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत लिए जाएंगे और पहाड़ के समग्र विकास के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

